उम्र पर भारी पड़ी ममता की चाह, पति की उम्र 55 से ज्यादा होने पर भी कोर्ट ने दंपती को दी IVF की मंजूरी
22 साल से संतान का इंतजार कर रहे मनेंद्रगढ़ जिला निवासी दंपती को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राहत दी है। ...और पढ़ें

47 वर्ष की महिला को हाई कोर्ट से मिली आईवीएफ से मां बनने की अनुमति
HighLights
47 वर्ष की महिला को हाई कोर्ट से मिली आईवीएफ से मां बनने की अनुमति
पति के 57 वर्ष के कारण प्रजनन अधिकार कानून के तहत नहीं मिल रही थी अनुमति
जेएनएन, बिलासपुर। 22 साल से संतान का इंतजार कर रहे मनेंद्रगढ़ जिला निवासी दंपती को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने 57 वर्षीय पति और 47 वर्षीय पत्नी को टेस्ट ट्यूब पद्धति से संतान प्राप्ति के उपचार की अनुमति दी है।
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 31 जुलाई 2026 के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें पति की उम्र 55 वर्ष से अधिक होने के आधार पर उपचार की अनुमति नहीं दी गई थी।
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला निवासी दंपती के अनुसार, अर्चना तिवारी ने 2013 में अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान उपचार (इन्ट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन) कराया था। और 2015 में गर्भवती हुई, लेकिन चार माह में गर्भपात हो गया। इसके बाद इन्होंने राज्य सहायक प्रजनन तकनीक एवं सरोगेसी बोर्ड के समक्ष आवेदन किया था।
रायपुर के आयुष टेस्ट ट्यूब केंद्र में जांच के बाद उन्हें उपयुक्त पाया गया। 24 जून 2026 को अनुमति मांगी गई, लेकिन 31 जुलाई 2026 को सक्षम प्राधिकारी ने पति की आयु अधिक बताकर उनका आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद दंपति ने हाई कोर्ट का रुख किया।
दंपती के अधिवक्ता गगन तिवारी ने कहा कि कानून महिला के लिए 50 और पुरुष के लिए 55 वर्ष की अलग सीमा तय करता है, संयुक्त आयु सीमा नहीं है। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 31 जुलाई का आदेश रद करते हुए टेस्ट ट्यूब पद्धति से मां बनने के लिए उपचार की अनुमति दे दी।
