'अलग-अलग राय होना सामान्य बात', SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद को लेकर EC ने 8 प्वाइंट्स में दी सफाई
चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की रिपोर्ट पर सफाई दी है।
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SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद को लेकर EC ने जारी किया प्रेस नोट (फोटो-पीटीआई)
HighLights
चुनाव आयोग ने SIR पर मतभेद की खबरों पर सफाई दी।
आयोग ने 8 बिंदुओं में अपनी कार्यप्रणाली स्पष्ट की।
अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े हुए। चुनाव आयुक्तों के फैसले में मतभेद को लेकर अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट जारी की थी। इस मामले में सफाई देते हुए चुनाव आयोग ने प्रेस नोट जारी किया है।
चुनाव आयोग ने 8 प्वाइंट्स में SIR से जुड़ी तमाम बातें साझा की हैं। साथ ही आयोग के काम करने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया है। चुनाव आयोग ने साफ तौर पर कहा कि सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे कमीशन के एकमत से लिए गए फैसलों का नतीजा हैं।
चुनाव आयोग ने 8 प्वाइंट्स में दी सफाई
- ECI एक संवैधानिक संस्था है जो संविधान के आर्टिकल 324, कानूनी नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के तहत काम करती है। कमीशन एक मल्टी-मेंबर संवैधानिक संस्था के तौर पर काम करता है। लिखे हुए नोट्स, ऑब्जर्वेशन, टेक्निकल सुझाव और अंदरूनी चेक-एंड-बैलेंस स्टैंडर्ड, लगातार चलने वाले तरीके हैं जिन्हें पूरी ट्रांसपेरेंसी, कानूनी पालन और ऑपरेशनल सख्ती पक्का करने के लिए डिजाइन किया गया है। ECI के सभी काम कमीशन के कानूनों और निर्देशों के अनुसार किए गए हैं।
- कमीशन के सभी ऑफिशियल ऑर्डर, फैसले और एडमिनिस्ट्रेटिव निर्देश पूरी तरह से कानूनी तौर पर मान्य हैं और चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दूसरे इलेक्शन कमिश्नर (अपॉइंटमेंट, सर्विस की शर्तें और टर्म ऑफ ऑफिस) एक्ट, 2023 के तहत तय कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
- ड्राफ्ट स्टेज के दौरान कमीशन मेंबर्स द्वारा उठाए गए कोई भी ऑपरेशनल सवाल या इनपुट, वोटर के अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्टैंडर्ड एडमिनिस्ट्रेटिव प्रैक्टिस का हिस्सा हैं। कमिश्नरों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रोसेस को और बेहतर बनाने के लिए थे।
- किसी भी संस्था में अलग-अलग विचार और बातें बातचीत का एक आम हिस्सा हैं। आखिरी फैसला लेने से पहले वे फैसला लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। सिर्फ तीन कमिश्नर ही नहीं, बल्कि कमीशन का हर अधिकारी चुनाव सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए कमीशन को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह से अधिकृत है।
- 10 महीने के समय में फैले कुछ खास इंटरनल नोट्स/ऑब्जर्वेशन को हाईलाइट करना और अप्रूवल, फैसलों, इंस्ट्रक्शन और इनिशिएटिव के बहुत बड़े ग्रुप को नजरअंदाज करना, तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा दिखाता है। हाल के महीनों में, कमीशन ने कई फैसले लिए हैं, इंस्ट्रक्शन जारी किए हैं, लगभग 40 नई इनिशिएटिव शुरू की हैं और देश भर में इलेक्टोरल रोल रिवीजन (SIR सहित) समेत कई इलेक्टोरल रिफॉर्म किए हैं। ये सभी फैसले पिछले एक साल में पूरे कमीशन के एकमत से लिए गए फैसलों का नतीजा हैं।
- आयोग ने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल के बड़े चुनाव और इस दौरान चुनाव से जुड़ी एक्सरसाइज सफलतापूर्वक की हैं। इस काम में बड़े पैमाने पर एडमिनिस्ट्रेटिव और ऑपरेशनल मशीनरी और आयोग की कई मंजूरियां और निर्देश शामिल थे।
- कमीशन के डिजिटल प्लेटफॉर्म, जैसे कि ECINet, बिना इजाजत छेड़छाड़, हेरफेर वगैरह को रोकने के लिए सख्त डेटा सिक्योरिटी प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। IT सिक्योरिटी चेक और ऑडिट कंट्रोल, नेशनल डेटाबेस में लागू किए गए स्टैंडर्ड साइबर सिक्योरिटी उपाय हैं। इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (EROs) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEOs) समेत कानूनी अथॉरिटी, कानून के तहत रजिस्ट्रेशन और डिलीट करने के लिए कानूनी शक्तियों के अनुसार काम करती हैं।
- भारत का चुनाव आयोग अपने संवैधानिक कामों को पूरी ईमानदारी से निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार है, और हमारे लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका को पहचानता है।
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क्या है पूरा मामला?
अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग से कई बड़े सवाल किए थे। चुनाव आयोग में तीन अधिकारियों के पास फैसले लेने का अधिकार है, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हैं।
रिपोर्ट में बताया गया कि दो चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना उन मामलों पर फैसले लिए गए, जिन पर उन दोनों चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्ति के बाद भी चुनाव आयोग ने SIR को लेकर फैसले जारी किए। यह भी कहा गया कि 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की गईं।
चुनाव आयोग ने ये प्रेस नोट जारी करते हुए साफ किया है कि SIR समेत चुनाव आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से और दोनों चुनाव आयुक्तों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से लिए गए हैं।
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