EPF Interest Rates: पीएफ पर ब्याज दरें घटेंगी या बढ़ेगी? होली से पहले होगा अहम फैसला
अमेरिकी टैरिफ वॉर, शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव और कम ब्याज दरों के कारण 2025-26 में ईपीएफ ब्याज दरें बढ़ाना मुश्किल है। ईपीएफओ के लिए 8.25% की वर्तमान दर ...और पढ़ें

ईपीएफ पर ब्याज दरें बढ़ाने की इस साल गुंजाइश कम।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संजय मिश्र, नई दिल्ली। अमेरिकी टैरिफ वॉर की चुनौतियों और शेयर बाजार में लगातार जारी उथल-पुथल के बीच निवेश पर ब्याज दरों में आयी कमी के चलते 2025-26 वित्त वर्ष में ईपीएफ पर ब्याज दरें बढ़ने की गुंजाइश कम है। इन तीनों अहम फैक्टर के कारण पिछले साल के 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को बनाए रखना ही ईपीएफओ के लिए चुनौती है क्योंकि चालू वर्ष के दौरान निवेश से होने वाली उसकी आय पर असर पड़ा है।
श्रम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी स्तर के सूत्रों के अनुसार, शेयर बाजार के उतार चढ़ाव का प्रभाव ईटीएफ से होने वाली आय पर पड़ा है तो सरकारी बांड-फिक्सड इनकम निवेश की कम हुई ब्याज दरों ने ईपीएफ की आय को प्रभावित किया है। हालांकि वर्तमान वित्त वर्ष की ईपीएफओ की संपूर्ण आय का अभी आकलन हो रहा जिसके बाद ही ब्याज दर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
ईपीएफ ब्याज दर 8.15 से 8.25 के बीच रहने की संभावना
वैसे अब तक के संकेतों के अनुसार, 2025-26 के लिए ईपीएफ ब्याज दर 8.15 से 8.25 के बीच ही रहने की संभावनाएं हैं। साफ है कि बढ़ोतरी की बजाय वर्तमान 8.25 ब्याज दर को बरकरार रखने के लिए ही ईपीएफओ को भारी मशक्कत करनी होगी।
हालांकि सूत्रों ने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद अप्रैल-मई में होने वाले पांच राज्यों के चुनाव को देखते हुए ईपीएफ ब्याज दर घटाने का कदम उठाना सरकार के लिए भी आसान नहीं है और यदि वर्तमान ब्याज दर को इस साल कायम रखा जाता है तो यह एक अहम कारण होगा।
दो साल से ईपीएफ की ब्याज दरें यथावत
मालूम हो कि पिछले दो साल से ईपीएफ की ब्याज दरें यथावत रही हैं। ईपीएफ न्यासी बोर्ड की दो मार्च को प्रस्तावित बैठक में चालू वर्ष की ब्याज दरों पर चर्चा की संभावना है।
श्रम मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सस्ते ब्याज दर के दौर में ईपीएफ पर आकर्षक ब्याज देने के लिए आमदनी बढ़ाने के विकल्पों पर विचार मंथन चल रहा है मगर ईपीएफ खाताधारकों की जमा राशि की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए इस दिशा में कोई कदम उठाया जाएगा। इस समय ईपीएफ में कुल जमा राशि करीब 28 लाख करोड़ रुपए है जिसमें 85 प्रतिशत निवेश सरकारी बांड-इंस्ट्रूमेंट्स में है जिस पर कुछ समय के दौरान ब्याज दरें घटी हैं।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी
वहीं शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और अमेरिकी टैरिफ वार के दोहरे दबाव के कारण ईटीएफ से होने वाली आय में भी कमी आयी है। ईटीएफ से आय बढ़ाने के लिए ईपीएफओ अपने निवेश पोर्टफोलियो को बहुआयामी बनाने से जुड़े विकल्पों पर भी विचार मंथन कर रहा है। ईपीएफओ अपनी कुल जमा राशि का अधिकतम 15 प्रतिशत ही शेयर बाजार संचालित ईटीएफ में निवेश कर सकता है।
श्रम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार ईपीएफओ ने वर्ष 2023-24 में 57184 करोड़ रुपए, 2022-23 में 53081 करोड़ रुपए और 2021-22 में 43568 करोड़ रूपए ईटीएफ में निवेश किए। ईपीएफओ को 2015 में आमदनी बढ़ाने के लिए ईटीएफ में सीमित निवेश की छूट दी गई थी।
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