चुनावी चंदा-कर चोरी मामले में तीन राजनीतिक दलों पर FIR, गुजरात सीआईडी जांच में जुटी
चुनावी चंदा- कर चोरी मामले में गुजरात सीआईडी ने शनिवार को तीन राजनीतिक दलों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआइआर) दर्ज की। ...और पढ़ें

चुनावी चंदा-कर चोरी मामले में तीन राजनीतिक दलों पर FIR (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
गुजरात सीआईडी ने स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी, सत्यवादी रक्षक पार्टी और गरीब कल्याण पार्टी के खिलाफ दर्ज किए अलग
गुजरात सीआईडी ने स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी, सत्यवादी रक्षक पार्टी और गरीब कल्याण पार्टी के खिलाफ दर्ज किए अलग
पीटीआई, अहमदाबाद। चुनावी चंदा- कर चोरी मामले में गुजरात सीआईडी ने शनिवार को तीन राजनीतिक दलों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआइआर) दर्ज की। इन दलों पर वित्त वर्ष 2022 से 2025 के बीच ‘चुनावी चंदा घोटाले’ के जरिये सरकारी खजाने को 314 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है।
अपराध जांच विभाग (सीआइडी) ने आणंद स्थित स्वतंत्रता अभिव्यक्ति पार्टी (एसएपी), अहमदाबाद स्थित सत्यवादी रक्षक पार्टी (एसआरपी) और गरीब कल्याण पार्टी (जीकेपी) के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
आरोप है कि इन दलों ने करदाताओं से चंदा लिया और अपना कमीशन काटने के बाद बाकी रकम वापस कर दी। चूंकि राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर आयकर से छूट मिलती है, इसलिए चंदा देने वाला स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के बदले मिली रसीद दिखाकर कर में छूट का दावा कर सकते थे।
सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि ये प्राथमिकी आयकर विभाग की शिकायत पर दर्ज की गई हैं। तीनों दलों के पदाधिकारियों के अलावा कुछ चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) को भी आरोपित बनाया गया है।
सीआईडी अधिकारियों का दावा है कि तीनों दलों के आरोपित पदाधिकारियों ने स्वीकारा है कि उन्होंने कर चोरी में मदद करके कमीशन कमाने के उद्देश्य से ही इन दलों का गठन किया था। मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
आयकर विभाग की शिकायत के अनुसार, एसएपी, उसके पदाधिकारी, एक कर सलाहकार और एक सीए 519 करोड़ रुपये के फर्जी चंदे और 155 करोड़ रुपये की कर चोरी से जुड़े मामले में शामिल हैं।
अन्य प्राथमिकी में अहमदाबाद स्थित जीकेपी के अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष समेत नौ लोगों तथा तीन सीए को 62 करोड़ रुपये की कर चोरी में संलिप्तता को लेकर नामजद किया गया है।
तीसरी प्राथमिकी एसआरपी के तीन पदाधिकारियों और एक कास्ट मैनेजमेंट अकाउंटेंट के खिलाफ दर्ज की गई है। उन पर 124.5 करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान की साजिश रचने का आरोप है।
प्राथमिकी के अनुसार तीनों दलों के बैंक खातों में चंदा जमा किया गया। इसके बाद फर्जी खरीद या खर्च दिखाकर नकली बिल के आधार पर धनराशि निकाली गई।
इसके बाद राजनीतिक दल अपना कमीशन काटकर बाकी नकद राशि चंदादाताओं को वापस कर देते थे। इन दलों ने मिलीभगत कर निर्वाचन आयोग को झूठी रिपोर्ट सौंपी। आरोपित सीए ने इन संस्थाओं और कुछ मुखौटा कंपनियों के खातों के लिए फर्जी ऑडिट रिपोर्ट तैयार की।
