SSB से BSF तक... तीन प्रमुख सुरक्षा बलों की कमान, पढ़ें 5 गैलेंट्री अवॉर्ड विजेता IPS दलजीत सिंह चौधरी की उपलब्धियां
केंद्र सरकार ने IPS ऑफिसर दलजीत सिंह चौधरी को BSF का नया महानिदेशक नियुक्त किया है। वे पहले SSB के DG थे। जम्मू सीमा पर आतंकी हमलों के चलते यह फैसला लिया गया। दलजीत सिंह चौधरी 1990 बैच के UP कैडर के IPS अधिकारी हैं, जिन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। उन्हें कई वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। 30 नवंबर 2025 को वे रिटायर होंगे। 1965 के युद्ध के बाद BSF की स्थापना हुई थी।
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दलजीत सिंह चौधरी तीन दशकों का शानदार करियर (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 3 अगस्त 2024 को केंद्र सरकार ने 1990 बैच के IPS ऑफिसर दलजीत सिंह चौधरी को सीमा सुरक्षा बल (BSF) का नया महानिदेशक नियुक्त किया था। इससे पहले वे सशस्त्र सीमा बल (SSB) के DG थे। उनकी नियुक्ति तब हुई थी जब DG नितिन अग्रवाल को अचानक उनके मूल केरल कैडर में वापस भेज दिया गया था।
केंद्र सरकार ने यह बदलाव ऐसे समय में किया था जब जम्मू क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगातार आतंकी हमले हो रहे थे। इन हमलों में सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के हताहत होने के मामले भी सामने आए थे। इसी के चलते केंद्र ने BSF के शीर्ष नेतृत्व में यह बदलाव किया था।
बता दें, BSF पश्चिम में पाकिस्तान और पूर्व में बांग्लादेश सीमा की रक्षा करती है और सीमा पर घुसपैठ व तस्करी रोकने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी BSF की होती है।
कौन हैं दलजीत सिंह चौधरी?
- दलजीत सिंह चौधरी UP कैडर के 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।
- उनका जन्म 25 नवंबर 1965 को दिल्ली में हुआ था।
- 34 साल के करियर में वे उत्तर प्रदेश मेंकई अहम पदों पर काम कर चुके हैं।
- केंद्रीय स्तर पर वे 2017 से लगातार डिपुटेशन पर रहे हैं।
- उन्होंने ITBP में ADG, CRPF में स्पेशल DG व ADG और SSB के DG जैसे पद संभाल चुके हैं।
- वे बेहतरीन मार्क्समैन और क्वालिफाइड स्काइडाइवर भी माने जाते हैं।
सेवा और सम्मान
IPS दलजीत सिंहचौधरी को अब तक चार पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री, पुलिस मेडल फॉर मेरिटोरियस सर्विस, राष्ट्रपति पुलिस पदक फॉर डिस्टिंग्विश्ड सर्विस और अति उत्कृष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। अपनी शिक्षा के तौर पर उन्होंने BSc और LLB की पढ़ाई की है।

रिटायरमेंट से पहले भावुक विदाई
दलजीत सिंह चौधरी 30 नवंबर 2025 को रिटायर होंगे। इसी रिटायरमेंट के मद्देनजर दिल्ली में BSF के जवानों और कर्मचारियों ने उन्हें विदाई दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि, अभी आधिकारिक रूप से उन्हें विदाई नहीं दी गई है।
इन दिनों वे रायपुर में चल रहे DGP-IGP सम्मेलन में शामिल हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। 30 नवंबर को दिल्ली में IPS दलजीत सिंह चौधरी को आधिकारिक विदाई दी जाएगी।
कैसे बनी BSF? 1965 के हमले के बाद आया बड़ा बदलाव
- 1965 से पहले भारत-पाक सीमा की निगरानी राज्य की सशस्त्र पुलिस करती थी।
- 9 अप्रैल 1965 को पाकिस्तान ने कच्छ क्षेत्र में सरदार पोस्ट, छार बेट और बेरिया बेट पर हमला किया।
- इस हमले ने राज्य पुलिस की सीमाएं उजागर कर दीं, जो हथियारबंद आक्रमण संभालने में सक्षम नहीं थी।
- इसके बाद केंद्र सरकार ने एक केंद्र-नियंत्रित सीमा बल बनाने का फैसला किया।
- 1 दिसंबर 1965 कोBSF की स्थापना की गई।
1965 से पहले भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा राज्य की सशस्त्र पुलिस बटालियन के हाथ में थी। लेकिन यह व्यवस्था तब कमजोर पड़ गई जब 9 अप्रैल 1965 को पाकिस्तान ने कच्छ इलाके में सरदार पोस्ट, छार बेट और बेरियाबेट पर अचानक हमला किया। इस हमले ने यह साफ कर दिया कि सीमाओं की रक्षा के लिए केवल राज्य पुलिस पर्याप्त नहीं है और एक ज्यादा सक्षम, प्रशिक्षित और केंद्र की कमान में काम करने वाली फोर्स की जरूरत है।
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इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने सचिवों की समिति की सिफारिश पर एक समर्पित सीमा बल बनाने का फैसला लिया। इसके बाद 1 दिसंबर 1965 को सीमा सुरक्षा बल (BSF) की स्थापना की गई, जो आज भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की प्रमुख सुरक्षा जिम्मेदारी संभालती है।
Source:
- सीमा सुरक्षा बल (BSF) की आधिकारिक वेबसाइट:
- https://www.bsf.gov.in/bsf-history.htm
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