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    PF खाताधारकों के लिए खुशखबरी: मई-जून तक खाते में आएगा ब्याज, EPFO की अधिसूचना जारी

    By sanjay mishraEdited By: Prince Gourh
    Updated: Sat, 04 Apr 2026 09:29 PM (IST)

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) इस वर्ष ईपीएफ खाताधारकों को रिकॉर्ड समय में ब्याज का भुगतान करने की तैयारी में है। अप्रैल से 2025-26 के लिए घोषित 8. ...और पढ़ें

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    PF खाताधारकों के लिए खुशखबरी (फाइल फोटो)

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन इस वर्ष ईपीएफ खाताधारकों को इस वर्ष के ब्याज की रकम उनके खाते में रिकार्ड समय के भीतर जमा कराने की पूरी तैयारी में है।

    इसके तहत ईपीएफओ की योजना है कि अप्रैल महीने से ही वर्ष 2025-26 के लिए घोषित 8.25 प्रतिशत ब्याज की रकम जमा कराने की शुरूआत कर दी जाए और मई-जून तक सभी सभी खाते में ब्याज का भुगतान जमा करा दिए जाएं।

    अधिसूचना हुई जारी

    हालांकि ईपीएफ को बीते वित्त वर्ष के लिए घोषित ब्याज दर की रकम जमा कराने के लिए अभी वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है। श्रम मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि ईपीएफओ न्यासी बोर्ड द्वारा तय 8.25 प्रतिशत ब्याज पर वित्त मंत्रालय की मंजूरी आते ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।

    अधिसूचना जारी होने के पश्चात ईपीएफओ ईपीएफ खातों में ब्याज की रकम जमा कराने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।बउम्मीद की जा रही है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े तक वित्त मंत्रालय ईपीएफओ न्यासी बोर्ड के द्वारा स्वीकृत ब्याज दर के प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी।

    सूत्रों ने बताया कि श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने भी ईपीएफओ को खाताधारकों के खाते में उनके ब्याज की रकम यथाशीघ्र प्राथमिकता के आधार पर जमा कराने के लिए विशेष रूप से निर्देश दिया है और मई-जून तक इस पूरा कर लेने का लक्ष्य दिया है।

    इसके मद्देनजर ही ईपीएफओ ने करीब सात करोड़ से अधिक खाते में ब्याज जमा कराने के लिए अपनी तैयारी कर ली है। मालूम हो ईपीएफओ के न्यासी बोर्ड ने बीते दो मार्च को ईपीएफ पर ब्याज दर में कोई छेड़छाड़ न करते हुए वर्ष 2025-26 के लिए भी 8.25 प्रतिशत ब्याज दर को बरकार रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

    वित्त मंत्रालय को नहीं उठाना पड़ता आर्थिक बोझ

    श्रम मंत्रालय ने इस पर सहमति जताते हुए वित्त मंत्रालय को भेज दिया था और अभी उसकी मंजूरी का इंतजार है। वैसे न्यासी बोर्ड द्वारा लिए फैसले पर वित्त मंत्रालय अमूमन मुहर लगा देता है क्योंकि ब्याज दर की रकम ईपीएफओ को होने वाली आय से दी जाती है और वित्त मंत्रालय को इसका आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ता।

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