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'अस्थायी ट्रस्टी से मंदिर की संपत्ति दान में नहीं ले सकती सरकार', धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण पर सख्त सुप्रीम कोर्ट

Published: Sat, 17 Oct 2026 02:00 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार किसी अस्थायी ट्रस्टी से कानूनी तौर पर मंदिर की संपत्ति दान में प्राप्त नहीं कर सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सरकार मंदिर की संपत्ति पर किसी भी तरह नहीं कर सकती कब्जा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सरकार मंदिर की संपत्ति पर किसी भी तरह नहीं कर सकती कब्जा

HighLights

  1. कहा, सरकार मंदिर की संपत्ति पर किसी भी तरह नहीं कर सकती कब्जा

  2. तमिलनाडु के एक मंदिर की जमीन के मालिकाना हक से जुड़ा है मामला

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार किसी अस्थायी ट्रस्टी से कानूनी तौर पर मंदिर की संपत्ति दान में प्राप्त नहीं कर सकती।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि संरक्षक के रूप में राज्य न तो एकतरफा संपत्ति पर कब्जा कर सकता है और न ही अपने किसी अधिकारी को ऐसा करने की अनुमति दे सकता है।

सरकार पर जिन धार्मिक एवं धर्मार्थ संस्थाओं की रक्षा की जिम्मेदारी है, उनकी संपत्ति के मामले में ऐसा नहीं किया जा सकता।

शीर्ष अदालत का यह फैसला तमिलनाडु के नागापालयम मरिअम्मन-पोनाचिअम्मन मंदिर की जमीन के मालिकाना हक से जुड़ी याचिका पर आया।

इस मामले में तमिलनाडु के इरोड जिले के कोडुमुडी गांव में एक एकड़ से अधिक जमीन नागापालयम मरिअम्मन-पोनाचिअम्मन मंदिर की थी और मंदिर ट्रस्ट उसका प्रबंधन करता था।

30 अगस्त, 2017 को तहसीलदार ने एक प्रमाणपत्र जारी किया, जिसमें कहा गया कि मंदिर के अस्थायी ट्रस्टी एस. भूपति ने मंदिर की जमीन सरकार को दे दी है। एम. पेरियासामी और तीन अन्य लोगों ने दानपत्र को चुनौती दी थी।

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकार पर संबंधित जमीन के संरक्षक के रूप में काम करने का वैधानिक दायित्व था।

लेकिन, सरकार ने न केवल मंदिर की संपत्ति का दान स्वीकार किया, बल्कि हाई कोर्ट और इस अदालत में भी उसका बचाव करता रहा। अदालत ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह आठ सप्ताह के भीतर मंदिर को एक लाख रुपये हर्जाना दे।