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    'जन गण मन' से पहले बजेगा 'वंदे मातरम': स्कूलों में राष्ट्रगीत के सभी 6 पैरा अनिवार्य, सिनेमाघरों को छूट

    Updated: Wed, 11 Feb 2026 02:50 PM (IST)

    केंद्र सरकार ने 'वंदे मातरम्' के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और महत्वपूर्ण आयोजनों में इसके सभी छह छंद बजाना अनिव ...और पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 'वंदे मातरम्' को लेकर बुधवार सुबह नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देश के तहत, अब सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों और कई महत्वपूर्ण आयोजनों में 'वंदे मातरम्' बजना अनिवार्य होगा। सभी लोगों को खड़े होकर इसका सम्मान करना होगा, ठीक वैसे ही जैसे राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समय होता है। लेकिन सिनेमा हॉल में फिल्मों के दौरान यह नियम लागू नहीं होगा।

    सबसे अहम बात यह है कि गीत के पूरे छह छंद बजाए जाएंगे, जिनमें से चार छंद 1937 में कांग्रेस ने हटा दिए थे। यह फैसला स्वतंत्रता संग्राम के इस गीत को उसकी मूल शक्ति के साथ वापस लाने की कोशिश है।

    केंद्रीय गृह मंत्रालय के इन नए नियमों के तहत 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रगान के तुरंत बाद बजाया जाएगा। यानी पहले फिर 'जन गण मन'। यह सभी सरकारी कार्यक्रमों, स्कूलों में लागू होगा।

    Vande Matram Rules

    सरकारी आयोजनों में अनिवार्य होगा 'वंदे मातरम्'

    'वंदे मातरम्' अब पद्म पुरस्कार जैसे नागरिक सम्मान समारोहों में भी बजाया जाएगा। राष्ट्रपति के किसी भी कार्यक्रम में उनके आने-जाने के समय यह गीत बजना जरूरी होगा। राष्ट्रपति या राज्यपालों के आगमन, प्रस्थान, उनके भाषण से पहले और बाद में भी यह नियम लागू होगा। तिरंगा फहराने के मौके पर भी इसका पालन होगा। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब यह गीत बजाया या गाया जाएगा, तो मौजूद सभी लोग ध्यान मुद्रा में खड़े रहेंगे।

    National anthem

    क्या हैं पूरे वंदे मातरम् के पूरे 6 छंद?

    बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में 'वंदे मातरम्' लिखा था, जो 1882 में उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में छपा। इसमें कुल छह छंद हैं। शुरुआती छंद भारत को मां के रूप में चित्रित करते हैं। बाद के छंदों में दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और सरस्वती जैसी हिंदू देवियों का जिक्र है। 1937 में कांग्रेस ने फैजपुर अधिवेशन में सिर्फ पहले दो छंदों को अपनाया, क्योंकि कुछ मुस्लिम सदस्यों को देवियों के जिक्र से आपत्ति थी। अब सरकार ने फैसला किया है कि पूरे छह छंद ही बजेंगे, जो लगभग 3 मिनट 10 सेकंड लंबे होंगे।

    छंद 1

    वन्दे मातरम्।सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।शस्यशामलां मातरम्।शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं।सुखदां वरदां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।

    छंद 2

    वन्दे मातरम्। कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले।कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले।अबला केन मा एत बले।बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं।रिपुदलवारिणीं मातरम्।।वन्दे मातरम्।।

    छंद 3

    वन्दे मातरम्। तुमि विद्या, तुमि धर्म।तुमि हृदि, तुमि मर्म।त्वं हि प्राणाः शरीरे।बाहुते तुमि मा शक्ति।हृदये तुमि मा भक्ति।तोमारई प्रतिमा गडि।मन्दिरे-मन्दिरे मातरम्।।वन्दे मातरम्।।

    छंद 4

    वन्दे मातरम्। त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी।कमला कमलदलविहारिणी।वाणी विद्यादायिनी।नमामि त्वाम्।नमामि कमलां अमलां अतुलां।सुजलां सुफलां मातरम्।।वन्दे मातरम्।।

    छंद 5

    वन्दे मातरम्। श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां।धरणीं भरणीं मातरम्।शत्रु-दल-वारिणीं।मातरम्।।वन्दे मातरम्।।

    छंद 6

    वन्दे मातरम्। त्वं हि शक्ति, त्वं हि शक्ति।त्वं हि शक्ति मातरम्।वन्दे मातरम्।।

    पूरी खबर: 200 छात्रों पर अंग्रेजों ने ठोका था 5-5 रुपये का जुर्माना, गीत से राष्‍ट्रगीत बनने की 'वंदे मातरम्' की अनोखी कहानी