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    अलनीनो के खतरे पर सरकार अलर्ट, किसानों को बचाने के लिए बीज से उर्वरक तक बड़ी तैयारी

    Updated: Fri, 29 May 2026 09:10 PM (IST)

    केंद्र सरकार कमजोर मानसून और अलनीनो के संभावित प्रभाव से किसानों को बचाने के लिए खरीफ सीजन की तैयारी में जुटी है। जिला स्तर पर आपातकालीन योजनाएं बनाई ...और पढ़ें

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    कमजोर मानसून से निपटने की तैयारी तेज (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)

    HighLights

    1. कमजोर मानसून हेतु 1.74 लाख क्विंटल बीज बफर तैयार।

    2. राज्यवार कृषि रोडमैप, नई फसल किस्में विकसित करने पर जोर।

    3. नकली बीज, कीटनाशकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कमजोर मानसून और अलनीनो के असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए तैयारी तेज कर दी है। मानसून में देरी और कम बारिश होने की स्थिति में जिला स्तर पर इमरजेंसी और कंटीजेंसी प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

    सरकार का फोकस केवल संकट से निपटने पर नहीं, बल्कि पहले से तैयारी कर किसानों को नुकसान से बचाने पर है। इसी रणनीति के तहत बीज, उर्वरक, फसल बीमा, कृषि ऋण, किसान आईडी और राज्यवार कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर केंद्र और राज्यों के बीच व्यापक रणनीति बनाई गई है।

    राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन

    राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के समापन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार अलनीनो की स्थिति पर नजर रख रही है। अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। फिर भी कमजोर मानसून की स्थिति से किसानों को बचाने के लिए पहले से तैयारी की जा रही है। राज्यों को अलर्ट रहने और जिला स्तर तक तैयारी रखने को कहा गया है।

    केंद्र सरकार की सबसे बड़ी चिंता है कि लंबी अवधि तक कम बारिश की स्थिति में फसलों की बुवाई प्रभावित न हो। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर 1.74 लाख क्विंटल बीज का बफर स्टाक तैयार करने का फैसला लिया गया है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित जिलों में तुरंत बीज भेजे जाएंगे ताकि दोबारा बुवाई या वैकल्पिक फसल लगाने में किसानों को दिक्कत न हो।

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    कृषि मंत्री ने क्या कहा?

    कृषि मंत्री ने बताया कि खरीफ के लिए देश में बीज की कोई कमी नहीं है। कुल 173 लाख क्विंटल मांग के मुकाबले 192 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध है। यानी जरूरत से 11 प्रतिशत अधिक। राज्यों से समय पर बीज उठाव कर किसानों तक पहुंचाने को कहा गया है।सरकार अब उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर ही नहीं, बल्कि क्षेत्र विशेष के हिसाब से खेती की योजना बना रही है।

    राज्यों को अपनी मिट्टी, जलवायु और संसाधनों के अनुसार अलग कृषि रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों को अरहर, सोयाबीन और तिलहन जैसी फसलों की कम अवधि वाली और मौसम के अनुकूल नई किस्में विकसित करने के लिए कहा गया है, ताकि कमजोर मानसून की स्थिति में भी उत्पादन प्रभावित न हो।

    सरकार ने दिलाया भरोसा

    उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर भी सरकार ने भरोसा दिलाया। खरीफ सीजन के लिए 390 लाख टन उर्वरक की अनुमानित मांग के मुकाबले फिलहाल 200 लाख टन का स्टाक उपलब्ध है। संतुलित उर्वरक उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है।

    इसके लिए एक जून से 30 जून तक देशभर में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा, जिसमें किसानों को स्वाइल हेल्थ कार्ड और संतुलित खाद उपयोग के बारे में जागरूक किया जाएगा।कृषि मंत्री ने नकली बीज, घटिया कीटनाशकों और खराब कृषि आदानों को किसानों के लिए बड़ा खतरा बताया।

    शिवराज सिंह ने क्या कहा?

    उन्होंने राज्यों को अधिक सैंपलिंग, मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के विस्तार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सरकार खेती को तकनीक और पारदर्शिता से जोड़ने पर भी जोर दे रही है।

    शिवराज ने कहा कि अब तक 9.76 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। इससे किसानों को योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी और खाद वितरण में पारदर्शिता आएगी। साथ ही कालाबाजारी रोकने में भी मदद मिलेगी।

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