राजस्थान में पकड़ा मुन्नाभाई MBBS... आठवीं पास चला रहा था 100 बेड का अस्पताल; मुकदमा दर्ज
राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर चिकित्सक बनने के मामले का राजस्थान एसओजी ने राजफाश किया है। एसओजी ...और पढ़ें

राजस्थान में आठवीं पास चला रहा था 100 बेड का अस्पताल (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
एसओजी ने शुक्रवार को दो आरोपितों को गिरफ्तार किया, आठ पर मुकदमा दर्ज
जालौर के एक निजी अस्पताल में पर्चियां बनाने का काम करता था आरोपित
जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेज के आधार पर चिकित्सक बनने के मामले का राजस्थान एसओजी ने राजफाश किया है। एसओजी ने शुक्रवार को दो आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें एक आरोपित मात्र आठवीं कक्षा पास है।
आरोप है कि उसने फर्जी एमबीबीएस डिग्री और स्त्री रोग में डिप्लोमा के आधार पर डाक्टर के रूप में पंजीकरण कराया। इसके बाद 100 बेड का अस्पताल संचालित करने लगा और मरीजों के ऑपरेशन भी करने लगा।
एसओजी ने इस मामले में दोनों मुख्य आरोपितों समेत सात नामजद व अन्य अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। फरार आरोपितों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं।
एसओजी अब इस मामले में अन्य आरोपितों की भूमिका, फर्जी डिग्रियां तैयार करने वाले गिरोह और मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेज की जांच कर रही है।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सीकर निवासी पंकज यादव और जालौर जिले के नानजीराम चौधरी के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया कि नानजीराम केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ा है। वर्ष 2010 से 2014 के बीच वह जालौर जिले के एक निजी अस्पताल में पर्चियां बनाने का काम करता था। इसी दौरान वह अस्पताल में नर्सिंग संबंधी काम भी करने लगा।
इसके बाद उसने कथित तौर पर आंध्र प्रदेश शिक्षा बोर्ड से 10वीं और 12वीं कक्षा के फर्जी प्रमाणपत्र, कानपुर की रामा यूनिवर्सिटी के नाम से फर्जी एमबीबीएस डिग्री और मुंबई के एक कालेज से स्त्री रोग में डिप्लोमा हासिल किया।
आरोप है कि उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में सांठगांठ कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर चिकित्सक के रूप में अपना पंजीकरण भी करवा लिया। वर्ष 2016 में उसने वही अस्पताल खरीद लिया और उसका नाम भाष्कर अस्पताल रखा।
पिछले दिनों एसओजी को नानजीराम के बारे में मुखबिर से सूचना मिली थी। इसके बाद की गई जांच में उसकी डिग्रियां और अन्य दस्तावेज फर्जी पाए गए।
छह बार परीक्षा में फेल, फिर भी बन गया डाक्टरगिरफ्तार दूसरा आरोपित पंकज यादव वर्ष 2013 से 2018 के बीच कजाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर चुका था। भारत में चिकित्सक के रूप में काम करने के लिए उसे फारेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) पास करना आवश्यक था।
हालांकि, वह इस परीक्षा में लगातार छह बार असफल रहा। आरोप है कि परीक्षा पास किए बिना ही पंकज ने बिहार के श्रीकृष्ण मेडिकल कालेज के नाम से फर्जी डिग्री तैयार करवाई और बिहार मेडिकल काउंसिल में फर्जी तरीके से पंजीकरण करा लिया। इसके बाद वह चिकित्सक के रूप में काम करने लगा।
