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    'किसी तीसरे की जरूरत नहीं': बालेन शाह की मांग पर भारत का दो टूक जवाब, J&K पर EU-पाक को भी नसीहत

    Updated: Tue, 02 Jun 2026 09:56 PM (IST)

    विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ और पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर पर दिए गए संयुक्त बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ...और पढ़ें

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    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल 

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को भारत-नेपाल सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी तीसरे पक्ष की भागीदारी को पूरी तरह खारिज कर दिया। यह बयान नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के उस बयान के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें उन्होंने विवाद के समाधान के लिए चीन और ब्रिटेन की भूमिका की मांग की थी।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'हमने सीमा संबंधी सभी मुद्दों से निपटने के लिए द्विपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। यह साफ होना चाहिए कि भारत-नेपाल के बीच यह द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।'

    द्विपक्षीय तंत्र पर जोर

    जायसवाल ने नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों और नेपाल विदेश मंत्रालय के बयान पर ध्यान दिया। उन्होंने दोहराया कि दोनों देशों के पास सीमा मुद्दों को सुलझाने के लिए पहले से ही स्थापित तंत्र मौजूद हैं। MEA ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा का लगभग 98% हिस्सा पहले ही सीमांकित किया जा चुका है।'

    कुछ हिस्सों में समस्या गंडक नदी के रास्ता बदलने के कारण हुई है। तय हिस्सों में 'नो-मैन्स लैंड' पर अतिक्रमण के मामले भी सामने आए हैं, जिनकी संयुक्त मैपिंग चल रही है

    क्या है पूरा विवाद?

    नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा था कि सीमा मुद्दों पर चर्चा न केवल भारत और चीन के साथ, बल्कि ब्रिटेन के साथ भी हो रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि ब्रिटेन को भी इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए क्योंकि मुद्दा ‘ब्रिटिश इंडिया’ के समय का है। शाह ने यह भी स्वीकार किया कि दोनों तरफ अतिक्रमण हुए हैं और दोनों पक्षों को बैठकर समाधान निकालना चाहिए।

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    भारत का आंतरिक मामला: जायसवाल 

    इसके साथ ही जायसवाल ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर के जिक्र के संबंध में, हम यह कहना चाहेंगे कि हम भारत के आंतरिक मामलों पर संयुक्त प्रेस बयान में ऐसे बेवजह के जिक्र को पूरी तरह से खारिज करते हैं।'

    प्रवक्ता ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि जिन संस्थाओं या देशों का इस मुद्दे पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, उन्हें ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए।

    उन्होंने साफ किया, 'जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं। जिन लोगों का ऐसे मामलों में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, उन्हें इन पर कोई भी टिप्पणी करने से बचना चाहिए।'

    भारत की अडिग स्थिति

    यह तीखी प्रतिक्रिया EU और पाकिस्तान के संयुक्त बयान के बाद आई है, जिसमें जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया गया था। भारत लंबे समय से इस तरह के बयानों को अपना आंतरिक मामला मानते हुए खारिज करता रहा है।

    सरकार का रुख साफ है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इसमें किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।