समुद्री क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनेगा भारत... अगले 5 साल में शुरू होंगे 20 नए जलमार्ग, बनारस-पटना में बनेंगे जहाज मरम्मत केंद्र
केंद्र सरकार जल परिवहन में सुधारों को प्राथमिकता दे रही है, जिसका लक्ष्य 2047 तक माल ढुलाई में जलमार्ग की हिस्सेदारी 6% से बढ़ाकर 12% करना है। इससे लॉ ...और पढ़ें

इसके पीछे सोच लॉजिस्टिक लागत को घटाकर विश्व बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धा की है
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ढांचागत सुधारों को प्राथमिकता में रखते हुए केंद्र सरकार ने जल परिवहन में प्रयासों को पतवार को और गति देने के लिए कमर कस ली है। वैश्विक कारोबारी चुनौतियों के बीच भारत का प्रयास है कि माल परिवहन में जलमार्ग की मौजूदा छह प्रतिशत की हिस्सेदारी को वर्ष 2047 तक दोगुना बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया जाए।
इसके पीछे सोच लॉजिस्टिक लागत को घटाकर विश्व बाजार में मजबूत प्रतिस्पर्धा की है। इसी उद्देश्य के साथ इस बार बजट में केंद्र सरकार ने दस हजार करोड़ की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना और अगले पांच वर्ष में ही 20 नए जलमार्ग शुरू करने की भी घोषणा की है। सरकार इन योजनाओं को समुद्री क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयासों के रूप में भी देख रही है।
कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना में अगले पांच वर्षों के लिए कुल 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इस योजना का उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण ईकोसिस्टम स्थापित करना है। इस पहल के तहत भारत का लक्ष्य अगले दशक में लगभग दस लाख टीईयू (उच्चतम प्रतिशत कंटेनर) की वार्षिक घरेलू विनिर्माण क्षमता प्राप्त करना है।
केंद्रीय बजट ने सुधार की रफ्तार बढ़ाकर 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने में समुद्री क्षेत्र को आधार बनाया है और भारत के आर्थिक परिवर्तन को सशक्त गति दी है। समुद्री क्षेत्र को भारत की व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के एक रणनीतिक साधन के रूप में स्पष्ट रूप से स्थापित किया है। अगले पांच वर्षों में 20 अतिरिक्त जलमार्गों को चालू करने का निर्णय हरित और किफायती परिवहन को और मजबूत करेगा। सड़क एवं रेल नेटवर्क पर दबाव कम करेगा।
- सरबानंद सोनोवाल, केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री
इससे लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार होने का अनुमान है। यह पहल आयातित खाली कंटेनरों पर भारत की निर्भरता को काफी हद तक कम करेगी, जो वर्तमान में लगभग बीस लाख यूनिट है। इसी तरह अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्गों को शुरू करने की घोषणा की गई है। सरकार का मानना है कि इससे जलमार्ग के राष्ट्रीय नेटवर्क का और विस्तार होगा। पर्यावरण के अनुकूल और कम लागत की माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
बजट में एक घोषणा ओडिशा में महानदी रिवर सिस्टम पर राष्ट्रीय जलमार्ग-5 के विकास की है। यह जलमार्ग तालचर और अंगुल के खनिज समृद्ध क्षेत्रों को कलिंगनगर जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों, पारादीप और धामरा के बंदरगाहों से जोड़ेगा। काकुड़ी, कुरुंती और पंकपाल में प्रमुख टर्मिनल विकसित किए जाएंगे। पूर्वी भारत के डंकुनी से सूरत को जोड़ने वाले नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का भी प्रस्ताव रखा गया है।
इसके साथ ही केंद्रीय बजट में अंतर्देशीय जलमार्ग क्षेत्र में कौशल विकास के लिए रीजनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (आरसीओई) के रूप में प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना की घोषणा की गई है। कोलकाता और वाराणसी में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे पूरे जलमार्ग क्षेत्र के युवाओं को संबंधित क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। वहीं, वाराणसी और पटना में अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए समर्पित जहाज मरम्मत केंद्र शुरू किए जाएंगे।
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