मिसाइल-तोपें और रडार सिस्टम... कितना शक्तिशाली है INS Kolkata? हिंद महासागर में भारत की चाल से चीन-पाकिस्तान परेशान
भारतीय नौसेना ने पश्चिमी हिंद महासागर में व्यापारी जहाज MV Mashallah 1 पर समुद्री डकैती के प्रयास को सफलतापूर्वक विफल कर दिया। ...और पढ़ें
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INS Kolkata की ताकत देख रही दुनिया

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। हिंद महासागर में एक बार फिर भारतीय नौसेना ने अपनी तेज प्रतिक्रिया क्षमता और समुद्री ताकत का प्रदर्शन किया है।
भारतीय नौसेना ने बुधवार को पश्चिमी हिंद महासागर में व्यापारी जहाज MV Mashallah 1 के पास संदिग्ध समुद्री डकैती (Piracy) की कोशिश को नाकाम कर दिया।
इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत INS Kolkata ने किया, जिसने समय रहते कार्रवाई कर संभावित खतरे को टाल दिया।
भारतीय नौसेना ने कैसे किया ऑपरेशन?
भारतीय नौसेना के अनुसार, पश्चिमी हिंद महासागर और अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) के पास तैनात INS Kolkata को व्यापारी जहाज के आसपास संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली थी। सूचना मिलते ही युद्धपोत ने तुरंत जांच और निगरानी अभियान शुरू कर दिया।
INS Kolkata ने अपने हेलीकॉप्टर को हवाई निगरानी के लिए तैनात किया, जबकि बोर्डिंग टीमों ने समुद्र में जाकर स्थिति की जांच की। नौसेना की त्वरित कार्रवाई से MV Mashallah 1 सुरक्षित रहा और संभावित समुद्री डकैती की घटना को टाल दिया गया।
भारतीय नौसेना ने दोहराया कि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा, समुद्री डकैती रोकने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत 2008 से अदन की खाड़ी में लगातार एंटी-पायरेसी मिशन चला रहा है।

क्यों है INS Kolkata इतना खतरनाक?
INS Kolkata भारतीय नौसेना के सबसे शक्तिशाली और तकनीकी रूप से उन्नत युद्धपोतों में गिना जाता है। इसे अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना में शामिल कराया था।
यह स्वदेशी रूप से विकसित कोलकाता-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर का प्रमुख युद्धपोत है, जिसे Project 15A के तहत तैयार किया गया।
मुंबई स्थित मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) में बने इस युद्धपोत को भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता का बड़ा प्रतीक माना जाता है।
- INS Kolkata की लंबाई लगभग 164 मीटर
- INS Kolkata की चौड़ाई करीब 18 मीटर
- INS Kolkata का वजन (Full Load Displacement) लगभग 7,400 टन
- INS Kolkata की अधिकतम गति 30 नॉट्स से ज्यादा
INS Kolkata में Combined Gas and Gas propulsion system लगाया गया है, जिसमें चार शक्तिशाली गैस टर्बाइन लगे हैं। यह सिस्टम युद्धपोत को बेहद तेज गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता देता है।
इसके विद्युत तंत्र लगभग 4.5 मेगावाट बिजली उत्पन्न कर सकते हैं, जो एक छोटे शहर को रोशन करने के लिए पर्याप्त मानी जाती है।
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INS Kolkata की बहुआयामी युद्ध क्षमता
INS Kolkata को मल्टी-डायमेंशनल वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया गया है। यह हवा, समुद्र और पानी के नीचे तीनों प्रकार के खतरों से मुकाबला कर सकता है। यह युद्धपोत दुश्मन के विमानों, मिसाइलों, युद्धपोतों और पनडुब्बियों का एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है।
खबरें और भी
- एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम
- सरफेस-टू-सरफेस मिसाइल
- मध्यम और कम दूरी की तोपें
- एडवांस एयर और सरफेस सर्विलांस रडार
- पनडुब्बी रोधी HUMSA NG सोनार सिस्टम
डिजिटल युद्ध तकनीक से लैस INS Kolkata
INS Kolkata की सबसे बड़ी ताकत इसकी अत्याधुनिक डिजिटल कॉम्बैट आर्किटेक्चर है। इसमें कई स्वदेशी तकनीकें लगाई गई हैं। सभी तकनीकों से INS Kolkata की समुद्री निगरानी और युद्ध क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
AISDN (Integrated Ship Data Network): यह जहाज का “डिजिटल नर्वस सिस्टम” है, जो हथियारों और सेंसरों से मिलने वाली जानकारी को रियल टाइम में जोड़ता है।
ACS (Auxiliary Control System): यह सिस्टम जहाज की मशीनरी की रिमोट मॉनिटरिंग और कंट्रोल करता है।
APMS (Automatic Power Management System): यह पूरे युद्धपोत की बिजली वितरण प्रणाली को नियंत्रित करता है।
CMS (Combat Management System): यह युद्ध क्षेत्र की सूचनाओं को इकट्ठा कर कमांड सिस्टम को तत्काल निर्णय लेने में मदद करता है।
स्वदेशी ताकत का प्रतीक
INS Kolkata भारत के रक्षा आत्मनिर्भरता अभियान का बड़ा उदाहरण है। इसके कई महत्वपूर्ण सिस्टम भारत में ही विकसित किए गए हैं। इससे भारत को भविष्य के नौसैनिक कार्यक्रमों के लिए मजबूत औद्योगिक आधार तैयार करने में मदद मिली है। स्वदेशी सिस्टमों में शामिल हैं।
- Combat Management System
- Auxiliary Control System
- Automatic Power Management System
- Foldable Hangar Doors
- Helo Traversing System
- HUMSA NG Sonar
हेलीकॉप्टर ऑपरेशन की क्षमता
INS Kolkata एक साथ दो हेलीकॉप्टर संचालित कर सकता है, जिनमें Sea King और Chetak शामिल हैं। इससे जहाज की निगरानी, टोही और पनडुब्बी रोधी क्षमता काफी बढ़ जाती है।
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भारतीय नौसेना की 'ब्लू वॉटर' ताकत
INS Kolkata, INS Kochi और INS Chennai मिलकर कोलकाता क्लास डिस्ट्रॉयर बेड़े का हिस्सा हैं। यह युद्धपोत भारत की बढ़ती 'ब्लू वॉटर नेवी' क्षमता का प्रतीक माने जाते हैं यानी ऐसी नौसेना जो अपने तटों से दूर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में भी प्रभावी सैन्य उपस्थिति बनाए रख सके।
भारतीय नौसेना के Directorate of Naval Design द्वारा तैयार इस श्रेणी के युद्धपोतों ने भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक मजबूत समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
पश्चिमी हिंद महासागर और अदन की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री मार्गों में शामिल हैं। यहां से हर साल अरबों डॉलर का अंतरराष्ट्रीय व्यापार गुजरता है। ऐसे में समुद्री डकैती या आतंकवादी गतिविधियां वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं।
INS Kolkata की त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक व्यापारी जहाज को सुरक्षित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि भारतीय नौसेना अब हिंद महासागर क्षेत्र में तेजी से उभरती समुद्री सुरक्षा शक्ति बन चुकी है।
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