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    हाईवे पर आपका सफर होगा सुहाना, बनेंगे नए रिंगरोड और बाईपास; देशभर में बढ़ेगा राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क

    Updated: Tue, 02 Jun 2026 10:00 PM (IST)

    केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने शहरी डी-कंजेशन नीति बनाई है ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर शहरी यातायात का दबाव कम हो सके। ...और पढ़ें

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    शहरी यातायात कम करने को डी-कंजेशन नीति

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    जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। देश में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क तो बढ़ता जा रहा है, लेकिन उसी गति से बढ़ रहा अनियोजित शहरीकरण चुनौती भी बन रहा है। अध्ययन में यह सामने आ चुका है कि हाईवे का जो हिस्सा शहरी क्षेत्र से होकर गुजरता है, वहां स्थानीय यातायात शामिल हो जाने के बाद हाईवे पर वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है।

    इसे देखते हुए ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने अर्बन डी-कंजेशन नीति बनाई है। इसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर से स्थानीय यातायात का भार कम करने के लिए उसके आसपास एलिवेटेड रोड, बाईपास और रिंग रोड बनाए जाएंगे।

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    क्या है डी-कंजेशन प्लान?

    राज्य इसमें सहभागी होंगे और डी-कंजेशन के तहत चिन्हित परियोजनाओं को संबंधित शहर या कस्बे के मास्टर प्लान में शामिल करेंगे। केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों के साथ डी-कंजेशन नीति साझा कर दी है।

    इससे पहले भारतमाला परियोजना के तहत प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित एक लाख से अधिक आबादी वाले 191 कस्बों और शहरों की पहचान की गई थी। उन पर स्थानीय यातायात के कारण हाईवे से गुजरने वाले वाहनों की औसत गति 10 प्रतिशत या उससे भी कम हो जाती थी।

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    ऐसे कई कारिडोर पर यातायात दबाव की समस्या को दूर करने के लिए कुछ उपाय किए जा चुके हैं या किए जा रहे हैं। इनमें से जहां भी नान-एक्सेस कंट्रोल बाईपास या रिंग रोड बनाए गए। वहां राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अनियोजित शहरी विकास के कारण बाधा दूर नहीं हो सकी।

    इसे देखते हुए ही अर्बन डी-कंजेशन नीति में प्रविधान किया गया है कि शहरी क्षेत्रों में या उसके आसपास नवनिर्मित रिंग रोड और बाईपास के किनारे नई सड़कों के निर्माण को रोकना होगा।

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    बाईपास, एलिवेटेड रोड और रिंग रोड 

    डी-कंजेशन के तहत बनाई जाने वाले बाईपास, एलिवेटेड रोड या बाईपास को न्यूनतम चार लेन वाले एक्सेस-कंट्रोल गलियारों के रूप में विकसित किया जाएगा। इंटरचेंज या स्लिप रोड के माध्यम से एक्सेस-कंट्रोल हाईवे तक पहुंच केवल अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों या जिलों की प्रमुख सड़कों द्वारा ही होगी।

    इंटरचेंज कम से कम पांच किमी के अंतराल पर बनाए जाएंगे, जबकि अन्य सार्वजनिक सड़कों तक पहुंच स्लिप रोड के माध्यम से दी जाएगी। नीति में स्पष्टत: कहा गया है कि इन परियोजनाओं काे 50 वर्षों तक के अनुमानित शहरी विस्तार और जनसांख्यिकीय वृद्धि का आकलन करते हुए बनाया जाएगा। रिंग रोड या बाईपास के बाहरी हिस्से पर सर्विस रोड का विकास राज्य सरकार द्वारा आवश्यकता के आधार पर किया जाएगा।

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    15 मीटर का होगा निषिद्ध विकास

    नियंत्रण क्षेत्र डी-कंजेशन नीति के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग, बाईपास या रिंग रोड के दोनों ओर 15 मीटर का निषिद्ध विकास नियंत्रण क्षेत्र राज्य सरकार द्वारा राज्य नगर नियोजन कानूनों के तहत हरित क्षेत्र के रूप में अधिसूचित किया जाएगा।

    इस क्षेत्र में विकास निषिद्ध रहेगा। वहां सिर्फ सार्वजनिक परिवहन आवश्यकताओं जैसे बस स्टाप, बिजली, पानी या सीवरेज पाइपलाइन जैसे ही काम हो सकेंगे।

    इस विकास नियंत्रण क्षेत्र के बाहर राज्य सरकार आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और संस्थागत अवसंरचना के विकास के लिए बाईपास या रिंग रोड के दोनों ओर दो किमी तक की रेडियस दूरी तक विनियमित विकास क्षेत्र (आरडीजेड) की योजना बना सकती है।

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    इन पैमानों पर होगा चयन

    पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों और राज्य की राजधानियों को 2025-26 के लिए अनुमानित जनसंख्या के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद एक लाख से पांच लाख की जनसंख्या वाले शहरों को रखा जाएगा।

    10 किमी के दायरे में स्थित दो या अधिक कस्बों के शहरी समूह, जिनकी जनसंख्या एक लाख से अधिक है, उन्हें भी प्राथमिकता दी जाएगी। पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के एक लाख से कम जनसंख्या वाले कस्बों-शहरी केंद्रों पर मामले-दर-मामले आधार पर विचार किया जा सकता है।

    शहरों से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात जाम का आकलन करने के लिए एक अध्ययन किया जाएगा। यह आकलन शहर या कस्बे से गुजरते समय राजमार्ग पर यातायात की गति में गिरावट और शहर या कस्बे के बाहर स्थित राजमार्ग के खंडों पर यातायात की गति में गिरावट के आधार पर किया जाएगा।

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