विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'डमी' दाखिलों पर सूचना आयोग चिंतित, सीबीएसई स्कूलों में औचक निरीक्षण की सिफारिश

Published: Fri, 16 Oct 2026 02:06 AM (IST)

आयोग ने सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में डमी दाखिलों के आरोपों की जांच और अनिवार्य उपस्थिति के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण की सिफारिश की है।

'डमी' दाखिलों पर सूचना आयोग चिंतित (फाइल फोटो)

'डमी' दाखिलों पर सूचना आयोग चिंतित (फाइल फोटो)

HighLights

  1. शिकायतकर्ता का आरोप, कक्षाओं में उपस्थित नहीं होने वाले विद्यार्थियों को भी जारी किए जा रहे डमी प्रमाणपत्र

  2. तकनीकी आधार पर सूचना न देना आरटीआई कानून की भावना के अनुरूप नहीं : सूचना आयोग

पीटीआई, नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के स्कूलों में पढ़ रहे 'डमी' दाखिलों पर चिंता जताई है।

आयोग ने सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में डमी दाखिलों के आरोपों की जांच और अनिवार्य उपस्थिति के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण की सिफारिश की है।

डमी दाखिला का मतलब ऐसा दिखावे का एडमिशन होता है, जिसमें छात्रों का नाम स्कूल के रजिस्टर में तो होता है, लेकिन उसे स्कूल नहीं जाना पड़ता। छात्र केवल परीक्षा देने स्कूल जाता है।

हाल ही में जारी आदेश में, सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने सीबीएसई को सुझाव दिया है कि वह अपने संबद्ध स्कूलों का औचक निरीक्षण करे।

यह सुझाव एक शिकायत के बाद दिया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कक्षाओं में उपस्थित नहीं होने वाले विद्यार्थियों को भी डमी प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं, जो संबद्धता की शर्तों का उल्लंघन है। सूचना आयुक्त ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 की धारा 25(5) के तहत यह सिफारिश की।

शिकायतकर्ता ने भोपाल के प्राइवेट मिशनरी स्कूलों में उपस्थिति, विषय चयन और निर्धारित पाठ्यपुस्तकों से जुड़े नियमों की जानकारी मांगी थी। उसका आरोप है कि छात्रों को कक्षाओं में उपस्थित हुए बिना डमी प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

शुरुआत में सीबीएसई के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआइओ) ने आवेदन शुल्क के लिए जमा इंडियन पोस्टल आर्डर में त्रुटि बताते हुए आवेदन लौटा दिया था।

सुनवाई के दौरान आयोग ने स्पष्ट किया कि तकनीकी आधार पर सूचना रोकना आरटीआई कानून की भावना के अनुरूप नहीं है। सीपीआइओ ने माफी मांगी और जानकारी देने पर सहमति जताई। इसके बाद सीबीएसई ने प्रत्येक बिंदु पर जवाब प्रस्तुत किया, जिसे रिकार्ड में लिया गया।

सीबीएसई ने अपने संबद्धता उपनियम, 2018 का हवाला देते हुए कहा कि नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित नहीं रहने या न्यूनतम उपस्थिति की शर्त पूरी नहीं करने वाले छात्रों कोों को बोर्ड परीक्षा में शामिल करने की अनुमति नहीं है।