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    'शिक्षकों के खाली होने वाले पदों को 90 दिनों में भरें उच्च शिक्षण संस्थान', संसदीय समिति ने दिए सुझाव

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 10:42 PM (IST)

    विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के खाली पदों को 90 दिनों के भीतर भरने का सुझ ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. शिक्षक पद 90 दिन में भरने का संसदीय समिति का सुझाव।

    2. सेवानिवृत्ति से 6 माह पूर्व भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश।

    3. उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुधार हेतु शिक्षकों की कमी दूर हो।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने विश्वविद्यालय सहित देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के खाली होने वाले पदों को 90 दिनों के भीतर भरने का सुझाव दिया है। साथ ही कहा कि शिक्षकों की सेवानिवृत्त से खाली होने वाले पदों को भरने की प्रक्रिया उस पद के खाली होने के छह महीने पहले से ही शुरू की जाए, ताकि उसे समय से भरा जा सके। अप्रैल, 2025 तक आंकड़ों के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग 28 प्रतिशत रिक्तियां थीं।

    जेसीपी ने यह सुझाव विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को लेकर सौंपे जाने वाले मसौदे में दिया। माना जा रहा है कि 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में इसे सौंप दिया जाएगा। हालांकि मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए शुक्रवार यानी 17 जुलाई को समिति की बैठक बुलाई गई थी, जिसे बाद में टाल दिया। सूत्रों की मानें तो अब यह बैठक 20 जुलाई को होगी।

    इससे पहले समिति इस विधेयक पर करीब 23 बैठक कर चुकी है। इस दौरान राज्यों व शिक्षाविदों आदि की भी राय जान चुकी है। विधेयक में उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही इसके लिए प्रस्तावित विधेयक में गुणवत्ता को जांचने वाली परिषद भी बनाने का प्रस्ताव है।

    विधेयक पर चर्चा के दौरान समिति के सदस्यों ने सवाल उठाए थे कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जब शिक्षक ही नहीं रहेंगे तो गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी। इस पर समिति ने सर्वसम्मति से यह सुझाव पारित किया गया कि उच्च शिक्षण संस्थान शिक्षकों के खाली होने वाले पद को 90 दिन में भरें।

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    साथ ही इसकी तैयारी शिक्षकों की सेवानिवृत्त से खाली होने के छह महीने पहले से शुरू करें। सूत्रों की मानें तो सरकार यदि इस सुझाव को मानती है तो उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की लंबे तक रहने वाली कमी आने वाले दिनों में खत्म हो जाएगी।