कर्नाटक सरकार ने स्थायी निवासी प्रमाण पत्र के लिए 11 मानदंड तय किए, विपक्ष ने उठाए सवाल
कर्नाटक सरकार ने चुनाव आयोग के मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) कार्यक्रम के बीच 'स्थायी निवासी प्रमाणपत्र' (पीआरसी) जारी करने के लिए 11 कड ...और पढ़ें

कर्नाटक सरकार ने स्थायी निवासी प्रमाण पत्र के लिए 11 मानदंड तय किए
HighLights
एसआईआर प्रक्रिया के बीच राज्य में 'स्थायी निवासी प्रमाणपत्र' (पीआरसी) जारी करने पर सियासी घमासान
भाजपा बोली, किस संवैधानिक प्रविधान के तहत राज्य को ऐसा प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार मिला है
विपक्षी पार्टी ने स्पष्ट किया कि नागरिकता और अप्रवासन पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं
आईएएनएस, बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने चुनाव आयोग के मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (एसआइआर) कार्यक्रम के बीच 'स्थायी निवासी प्रमाणपत्र' (पीआरसी) जारी करने के लिए 11 कड़े मानदंड तय किए हैं।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उप-मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने विधान सौध में इस ऐतिहासिक, लेकिन विवादित पहल की शुरुआत की।
सरकार का लक्ष्य पारदर्शी प्रशासन के जरिये मुफ्त जाति प्रमाणपत्र और पीआरसी सीधे नागरिकों के घर तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि पीआरसी उन 11 दस्तावेजों में शामिल है, जिन्हें चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए मान्यता दी है।
घर-घर पहुंचेंगे 4.85 करोड़ प्रमाणपत्र
उप-मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाना है। सरकार ने बड़े पैमाने पर वितरण की तैयारी की है, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के 4.85 करोड़ जाति प्रमाणपत्र शामिल हैं। नागरिक इन्हें आधिकारिक वेबसाइट, वाट्सएप या स्थानीय सेवा केंद्रों से मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं।
इसके लिए शिकायत निवारण तंत्र भी बनाया गया है। पीआरसी के लिए 11 पात्रता शर्तें तय की गई हैं, जिनमें कर्नाटक में जन्म, कम से कम 10 साल का निवास, यहां से शिक्षा, संपत्ति का स्वामित्व, सरकारी सेवा या राज्य के निवासी से विवाह शामिल हैं। इसके लिए पहचान के रूप में सरकारी दस्तावेजों (जैसे राशन कार्ड, राजस्व रिकार्ड आदि) को आधार बनाया जाएगा।
विपक्ष ने उठाए राष्ट्रीय सुरक्षा और वैधता पर सवाल
प्रेट्र के अनुसार, इस योजना के लागू होते ही राज्य में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे गंभीर संवैधानिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने एक खतरनाक संवैधानिक सीमा लांघ दी है।
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उन्होंने सवाल उठाया कि किस संवैधानिक प्रविधान के तहत राज्य सरकार को ऐसा प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार मिला है, क्योंकि नागरिकता और अप्रवासन पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। विपक्ष ने इस कदम की टाइमिंग पर भी गंभीर चिंता जताई है।