विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मराठी नहीं जानते तो महाराष्ट्र में नहीं चला पाएंगे ऑटो-टैक्सी, पहले मिलेगा नोटिस; नहीं सीखे तो रद होगा लाइसेंस

Updated: Wed, 19 Aug 2026 04:16 PM (IST)

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य कर दिया है। नियमों का पालन न करने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है, जिससे हजारों चालकों की आजीविका पर असर पड़ेगा।

AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।

AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।

HighLights

  1. महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी भाषा जानना अनिवार्य।

  2. नियम न मानने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है।

  3. अभियान में RTO उड़न दस्ते करेंगे सख्त जांच।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में अब मराठी भाषा ना बोलने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों की मुश्किलें बढ़ने वाली है। कारण है कि राज्य सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया है।

राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने घोषणा की है कि जिन व्यावसायिक वाहन चालकों को मराठी की बुनियादी जानकारी नहीं है, उनके खिलाफ आज यानी गुरुवार से सख्त कार्रवाई का अभियान शुरू हो गया है।

राज्य परिवहन विभाग के नए नियम क्या?

परिवहन विभाग के नए नियमों के तहत राज्यभर में उन ऑटो और टैक्सी चालकों की जांच की जाएगी, जिन्हें मराठी भाषा नहीं आती है। नए नियमों के मुताबिक, जिन चालकों को मराठी नहीं आती, उन्हें पहले नोटिस दिया जाएगा और भाषा सीखने के लिए समय दिया जाएगा।

तीन महीनों के बाद रद होगा लाइसेंस

परिवहन मंत्री ने बताया कि यदि नोटिस मिलने के बाद भी कोई चालक तय समय में सुधार नहीं करता है, तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस और बैज को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। इतना ही नहीं यदि तीन महीने के बाद भी अनुपालन नहीं होता है, तो उनके परमिट और लाइसेंस को पूरी तरह से रद करने के आदेश दिए जा सकते हैं।

किसकी देखरेख में चलेगा अभियान?

मंत्री प्रताप सरनाइक ने आगे बताया कि यह महीना भर चलने वाला विशेष अभियान अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ के नेतृत्व में पूरे महाराष्ट्र में चलाया जाएगा। इस दौरान क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के उड़न दस्तों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सख्त चेकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अभियान में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाएगी।

चालकों और यूनियनों की चिंताएं कैसे बढ़ी?

सरकार के इस कदम से दूसरे राज्यों से आकर महाराष्ट्र में गाड़ी चलाने वाले हजारों चालकों में अपनी आजीविका को लेकर चिंता बढ़ गई है। 'सेवा सारथी ऑटो रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन' के नेता डीएम गोसावी का कहना है कि सरकार ने मराठी के 'वर्किंग नॉलेज' को अनिवार्य तो कर दिया है। 

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लेकिन इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा तय नहीं की गई है। इतना ही नहीं यूनियनों का मानना है कि इस अस्पष्टता के कारण आरटीओ अधिकारियों द्वारा चालकों का वित्तीय शोषण और भ्रष्टाचार बढ़ सकता है।

अब समझिए सरकार का पक्ष क्या है?

दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी की आजीविका छीनना नहीं, बल्कि लोगों को स्थानीय भाषा से जोड़ना है। परिवहन मंत्री ने बताया कि कुछ महीने पहले शुरू की गई मराठी भाषा सीखने की इस पहल में अब तक महाराष्ट्र भर से 1,65,601 से अधिक चालक आगे आ चुके हैं।

गौरतलब है कि मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) सहित राज्यभर के करीब छह लाख ऑटो और टैक्सी चालकों को इस पहल के दायरे में लाया जा रहा है, ताकि वे आसानी से भाषा सीख सकें और किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से बच सकें।