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    मानसून सत्र खत्म: हंगामे में पास हुए 11 बिल, BJP बोली - अहंकार की भेंट चढ़ी संसद

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 10:41 PM (IST)

    संसद का मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया, जिसमें लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए। भाजपा ने सत्र बाधित होने के लिए राहुल गांधी के अहंकार ...और पढ़ें

    लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के हंगामे में पास

    लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के हंगामे में पास

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र पूरी तरह से धुल गया। दोनों सदनों में कुल 12 विधेयक पास हुए, जिनमें लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के पास हुए। गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह की अंतिम समय में गतिरोध तोड़ने की कोशिश भी सफल नहीं रही।

    इसके लिए पूरी तरह से नेता प्रतिपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'राहुल गांधी के अहंकार, अनुशासनहीनता और उद्दंडता ने मानसून सत्र की बलि ले ली।'

    लोकसभा में 11 विधेयक बिना चर्चा के हंगामे में पास

    सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संकेत करते हुए कांग्रेस के पवन खेरा और अन्य विपक्षी सांसदों के टेडीबीयर और '56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर' के नारे के साथ संसद परिसर में प्रदर्शन ने मानसून सत्र में संसद की गिरी गरिमा का नया अध्याय लिख गया।

    संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू के अनुसार लोकसभा में सिर्फ एक पेपर लीक से जुड़े विधेयक पर चर्चा हुई, इसके अलावा सभी 11 विधेयक बिना चर्चा के हंगामे के बीच पास हो गए।

    इस तरह से पूरे सत्र में लोकसभा में उत्पादकता 19 फीसद रही, जो न्यूनतम उत्पादकता वाले सत्रों में से एक है। रिजीजू के अनुसार लोकसभा की कार्यवाही कांग्रेस के हंगामे के कारण चलाना संभव नहीं हो सका।

    राहुल गांधी के अहंकार के कारण सत्र बाधित: भाजपा

    लोकसभा में कांग्रेस सदन के स्थगित होने तक नारेबाजी करती रही, वहीं राज्यसभा में बहिर्गमन के कारण कार्यवाही थोड़ी चली और सत्ता के साथ-साथ कुछ विपक्षी सांसदों ने भी चर्चा में भाग लिया।

    इस तरह से राज्यसभा की उत्पादकता 39 फीसद रही। रिजीजू ने कहा कि सामान्यतौर पर सरकार संसद के भीतर चर्चा के बचने की कोशिश करती है। लेकिन यह पहली बार हुआ कि सरकार चर्चा चाहती थी, लेकिन विपक्ष चर्चा से भागता रहा।

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    अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साये में शुरू हुए सत्र में विपक्ष शुरू से आक्रामक रहा।

    दो हफ्ते तक अमित शाह के सदन में आने और पुलिस ज्यादती पर बयान देने की मांग के साथ हंगामे की भेंट चढ़ने के बाद सरकार की ओर से राहुल गांधी से सीधी बातचीत कर तीसरे हफ्ते में गतिरोध तोड़ने की गंभीर पहल शुरू हुई।

    रविशंकर प्रसाद ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि 'पूरे सत्र के दौरान राहुल गांधी गोलपोस्ट बदलते रहे, चर्चा से भागते रहे और सदन को बाधित करते रहे।'

    महज 19 फीसद कामकाज के साथ मानसून सत्र न्यूनतम कामकाज वाले सत्रों में एक रहा। विशेषकर 2014 के बाद किसी न किसी मुद्दे पर विपक्ष के भारी शोर शराबे के कारण कई बार यही स्थिति रही है। कभी पेगासस तो कभी नोटबंदी जैसे मुद्दो पर कामकाज इससे भी कम हुआ था।

    कांग्रेस की असली मानसिकता को दर्शाता है: भाजपा

    पवन खेरा और अन्य विपक्षी सांसदों के टेडीबीयर और "56 इंच का छोटा बंदर, जल्दी आओ सदन के अंदर" के नारे से संसद परिसर में प्रदर्शन पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    भाजपा के मीडिया विभाग के प्रमुख व सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि जिस तरह की भाषा का प्रयोग हो रहा है और जिस तरह का विरोध हो रहा है, वह कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जनता उनके सारे कृत्यों को देख रही है और समय पर आने पर जरूर जवाब देगी।

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