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    मानसून सत्र में विपक्षी वार की धार खत्म करने के लिए NDA तैयार, बैठक में बनी रणनीति

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 09:52 PM (IST)

    संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है, जिसमें विपक्ष नीट-यूजी गड़बड़ी और राम मंदिर चढ़ावे की चोरी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरेगा। सत्ताधारी रा ...और पढ़ें

    संसद भवन।

    संसद भवन।

    HighLights

    1. मानसून सत्र में विपक्ष नीट-यूजी, राम मंदिर चढ़ावे पर सरकार को घेरेगा।

    2. राजग ने राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में विपक्षी हमलों पर जवाबी रणनीति बनाई।

    3. परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण बिल पारित कराने पर जोर।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। बजट सत्र से लेकर अब तक देशभर में ऐसे कई घटनाक्रम हाे चुके हैं, जिन्हें मुद्दा बनाकर विपक्ष सदन में गरजने और सरकार पर बरसने के लिए कमर कसे है तो विपक्षी वार की धार कुंद करने की तैयारी सत्ता पक्ष ने भी कर ली है।

    शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई राजग मंत्रियों की बैठक में सत्र के लिए प्रस्तावित विधायी कार्य के साथ ही ऐसे संभावित मुद्दों पर चर्चा हुई और तय किया गया कि प्रत्येक विषय पर राजग का प्रतिउत्तर तार्किक हो, साथ ही सभी घटक दलों की एकजुटता का संदेश जाना चाहिए।

    राजग के बढ़ते जा रहे कुनबे और परिसीमन विधेयक पर विपक्षी खेमे के कुछ दलाें के बदले रुख पर भी चर्चा कर आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
    यूं तो संसद के प्रत्येक सत्र में सरकार को घेरने के लिए विपक्ष अपनी तैयारी करता ही है, लेकिन इस बार कुछ ऐसे ताजा मुद्दे हैं, जो देशभर में चर्चा के केंद्र में रहे हैं और विपक्ष को इन्हें मजबूती से उठाने का अवसर भी मिला है।

    विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश में

    मसलन, राम मंदिर चढ़ावा चोरी भले ही ट्रस्ट के कुप्रबंधन का परिणाम है, लेकिन विपक्षी ने सरकार को घेरने की कोशिश की है। इसके अलावा नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर लगातार हमलावर रहे विपक्ष को नई ऊर्जा जंतर-मंतर पर शुरू हो चुके सोनम वांगचुक के अनशन ने दे दी है। ई-20 ईंधन पर लेकर फैले असमंजस पर सवाल उठाया जाना लगभग तय है।

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    इसे देखते हुए ही अपनी रणनीति को मजबूत करने के लिए राजग के मंत्रियों की बैठक हुई। सूत्राें ने बताया कि सरकार मानकर चल रही है कि विरोधी खेमा इन विषयों को लेकर सदन की कार्यवाही को बाधित करना चाहेगा, लेकिन सरकार की प्राथमिकता है कि आवश्यक विधेयकों को पारित कराया जाए। निस्संदेह सामान्य विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार के पास बहुमत है।

    राजग के लिए एकजुटता ही हथियार

    ऐसे में राजग एकजुट रहेगा तो कोई बाधा सामने नहीं आने वाली। वहीं, परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर भी चर्चा हुई, जिसके लिए सरकार के पास अभी दो-तिहाई बहुमत नहीं है। हालांकि, टीएमसी और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दलों में टूट के बाद जिस तरह से कुछ अन्य दलों का रुख बदला है, उसने सभी सरकार को संभावनाओं की राह दिखाई है।

    उल्लेखनीय है कि अब तक परिसीमन का खुलकर विरोधी करने वाला डीएमके अब कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए से दूरी बना चुका है। साथ ही हाल ही बयान दिया है कि डीएमके कांग्रेस से दूर रहेगा और परिसीमन विधेयक को देखने के बाद उस पर निर्णय करेगा।

    वहीं, विपक्षी गठबंधन के साथ रहते हुए भी एनसीपी शरद गुट की नेता सुप्रिया सुले ने भी बिल देखने के बाद निर्णय की बात कह कर इस पर नरम रुख के संकेत दे दिए हैं। बताया गया है कि राजग संसदीय दल की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई और कहा गया कि इन दलों का स्पष्ट रुख सामने आने के बाद इससे संबंधित रणनीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

    राजग की बैठक का नाम अब मंगल मिलन

    नए प्रयोग और भावनात्मक नामकरण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाना जाता है। इसी क्रम में अब नया निर्णय सामने आया है। बताया गया है कि राजग ने संसदीय दल की बैठक का नाम भी बदल दिया है। अब इसे ''''मंगल मिलन'''' नाम दिया गया है।

    मंगल मिलन के साथ पहली बैठक 21 जुलाई को सुबह 9.30 बजे संसद भवन में होने वाली है। इसमें प्रधानमंत्री मोदी एनडीए सांसदों को संबोधित भी करेंगे। जाहिर है कि यह संदेश देने की कोशिश होगी कि की अहम विधेयक देश की तकदीर बदलेंगे। महिला आरक्षण भी इसमें शामिल होगा।