विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

एथनॉल के बाद आइसोबिटोनाल से चलेगी आपकी गाड़ी, गडकरी बोले- डीजल यूज करने वालों को मिलेगा फायदा

Published: Mon, 02 Nov 2026 10:30 PM (IST)Updated: Mon, 02 Nov 2026 10:55 PM (IST)

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि डीजल में 15% आइसोबिटोनॉल मिलाने का प्रयोग चल रहा है, साथ ही शत-प्रतिशत एथेनॉल वाहनों पर भी निर्णय हो चुका है।

केंद्रीय गृह मंत्री नितिन गडकरी।

केंद्रीय गृह मंत्री नितिन गडकरी।

HighLights

  1. डीजल में 15% आइसोबिटोनॉल मिश्रण का प्रयोग जारी।

  2. शत-प्रतिशत एथेनॉल वाहनों पर सरकार ने लिया निर्णय।

  3. कार्बन डाइऑक्साइड से यूरिया, DME बनाने की तकनीक पर जोर।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल मिलाए जाने से वाहनों के इंजन को नुकसान के दावे लगभग दब चुके हैं और अब सरकार शत-प्रतिशत एथेनॉल पर चलने वाले वाहनों को लेकर भी निर्णय कर चुकी है।

इस बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि भारत में अब डीजल में आइसोबिटोनॉल मिलाने का भी प्रयोग चल रहा है। हालांकि, अभी इसकी रिपोर्ट नहीं आई है। उन्होंने वेस्ट टू वेल्थ के मंत्र को दोहराते हुए जैविक ईंधन के अन्य विकल्पों के बारे में भी केपीएमजे के कार्यक्रम में चर्चा की।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि एथेनॉल को टूटे चावल, गन्ने, मक्का और बांस से बनाया जाता है। इसे किसानों के लिए हितकारी बताने के साथ ही भविष्य के ईंधन के रूप में भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यदि गन्ने के रस से एथेनॉल के साथ ही आइसोबिटोनॉल भी बनाया जा सकता है। चूंकि, देश में आइसोबिटोनॉल से चलने वाले इंजन भी बनने लगे हैं, इसलिए यह एक अच्छा विकल्प है।

केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में इस बात पर जोर दिया कि हम कार को एथेनॉल से चला सकते हैं और 15 प्रतिशत आइसोबिटोनॉल को डीजल में मिलाने का प्रयोग भी चल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने एविएशन बायो फ्यूल के सफल प्रयोगों का दावा करते हुए कहा कि अब दुनिया में यह चर्चा शुरू हो चुकी है कि एविएशन फ्यूल में भी दो प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाए। इसके लिए 18 देशों में प्रयोग चल रहा है।

कार्बन डाइऑक्साइड को बताया बड़ी समस्या

नितिन गडकरी ने कार्बन डाइऑक्साइड को बहुत बड़ी समस्या बताते हुए इसके समाधान को भी वैकल्पिक ऊर्जा के रूप में प्रस्तुत किया। बताया कि हाल ही में एक शोध हुआ कि कार्बनडाइआक्साइड में हाइड्रोजन मिलाकर यूरिया बनाया जा सकता है। इससे देश के ऊपर से साढ़े पांच से छह लाख करोड़ रुपये के यूरिया आयात का बोझ कम होगा।

उन्होंने बताया कि इस तकनीक से व्यावसायिक उपयोग के लिए एनटीपीसी की आेर से टेंडर भी जारी किया गया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि कार्बनडाइआक्साइड में हाइड्रोजन मिलाकर डाइमेथिल ईथर (डीएमई) भी बन सकता है। यूएसए में एलपीजी में 40 प्रतिशत एलपीजी मिलाई जाती है। भारत में यह प्रयोग शुरू हो तो एलपीजी के आयात से भी राहत मिल सकती है।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।