सनातन का अपमान करने वाली ऑनलाइन सामग्रियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सुप्रीम कोर्ट में सांप्रदायिक सद्भावना भंग करने वाली ऑनलाइन सामग्री के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में सनातन धर्म और हिंदू देवी-देवताओ ...और पढ़ें
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सुप्रीम कोर्ट।
HighLights
ऑनलाइन सामग्री पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर।
सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं के अपमान पर रोक की मांग।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की विफलता पर सवाल उठाए गए।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सांप्रदायिक सद्भावना में बाधा उत्पन्न करने वाली ऑनलाइन विषय सामग्री को रोकने के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें केंद्र सरकार से मांग की गई है कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों से सनातन धर्म और हिंदू देवताओं का अपमान करने वाली ऑनलाइन सामग्री की पहचान, हटाने और ब्लाक करने के लिए निर्देश जारी किए जाएं।
यह जनहित याचिका गुजरात के सामाजिक कार्यकर्ता हितेंद्र कुमार पारसोत्थमभाई गढिया द्वारा दायर की गई है, जिसमें गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दिल्ली सरकार, गूगल/यूट्यूब, मेटा प्लेटफार्म (फेसबुक और इंस्टाग्राम), एक्स कार्प और वाट्सएप को प्रतिवादी बनाया गया है।
याचिका में क्या-क्या?
याचिका में कहा गया है, 'प्रतिवादियों को आदेश दिया जाए कि वे उन इंटरनेट मीडिया पोस्ट को ब्लाक करें या हटाएं जो सांप्रदायिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ आम जनता को भड़काने की प्रवृत्ति रखती हैं और संवैधानिक अधिकारियों की प्राधिकृति को अनजान भीड़ के जरिये कमजोर करती हैं।
इसमें अवैध, उत्तेजक, घृणास्पद, अपमानजनक और भ्रामक डिजिटल सामग्री की पहचान, रोकथाम, हटाने या ब्लाक करने के लिए निर्देश मांगे गए हैं। इसमें फर्जी समाचार, भड़काऊ भाषण और राष्ट्र विरोधी नारे शामिल हैं, जो इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से फैलाए जा रहे हैं।
खबरें और भी
याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव की सुरक्षा और अवैध डिजिटल सामग्री से संबंधित कानूनी दायित्वों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
याचिका के अनुसार, इसका उद्देश्य उन वीडियो, मीम्स, हेरफेर की गई सामग्री, अपमानजनक पोस्ट और अन्य इलेक्ट्रानिक सामग्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना है, जो इंटरनेट प्लेटफार्मों पर अपलोड की गई हैं और हिंदू धार्मिक विश्वासों, सनातन धर्म और हिंदू देवी-देवताओं का "अपमान और घृणा को बढ़ावा" देती हैं।
इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर विफलता का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत अपने दायित्वों को ठीक से निभाने में विफलता दिखाई है और उन सामग्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है जो दुश्मनी, घृणा और सार्वजनिक अव्यवस्था को बढ़ावा देती हैं। इसमें यह भी दावा किया गया है कि ऑनलाइन प्रसारित फर्जी संदेश और उत्तेजक सामग्री ने सार्वजनिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव को बाधित किया है।