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    रडार, जैमर और हार्ड किल गन... भारत की एंटी-ड्रोन शील्ड तैयार, नया AI सिस्टम दुश्मन को पलक झपकते ही करेगा ढेर

    Updated: Wed, 27 May 2026 10:48 PM (IST)

    भारत ने Zen Technologies द्वारा विकसित एक नया AI-संचालित स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम पेश किया है। ...और पढ़ें

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    भारत का नया एंटी-ड्रोन सिस्टम (फोटो-X/Zen Technologies)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया तक आधुनिक युद्ध का चेहरा तेजी से बदल रहा है। अब महंगे लड़ाकू विमानों से ज्यादा खतरा सस्ते ड्रोन, FPV (फर्स्ट पर्सन व्यू) अटैक ड्रोन और ड्रोन स्वॉर्म यानी एक साथ हमला करने वाले ड्रोन झुंड से पैदा हो रहा है। इसी बदलती चुनौती को देखते हुए भारत ने अपनी स्वदेशी एंटी-ड्रोन क्षमता को तेजी से मजबूत करना शुरू कर दिया है।

    हैदराबाद स्थित रक्षा कंपनी Zen Technologies ने प्रयागराज में आयोजित North Tech Symposium 2026 में एक नया AI-संचालित Counter Unmanned Aerial System (CUAS) पेश किया है।

    यह सिस्टम दुश्मन ड्रोन को पहचानने, ट्रैक करने, जाम करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें हवा में मार गिराने में सक्षम बताया जा रहा है। विशेषज्ञ इसे भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा अभियान के तहत एक बड़ी उपलब्धि मान रहे है।

    क्यों बढ़ रही है एंटी-ड्रोन सिस्टम की जरूरत?

    हाल के वर्षों में छोटे और सस्ते ड्रोन युद्ध के बेहद खतरनाक हथियार बनकर उभरे हैं। ये ड्रोन जासूसी कर सकते हैं, सीमा पार हथियार और ड्रग्स पहुंचा सकते हैं, तोपखाने को लक्ष्य निर्देशित कर सकते हैं, आत्मघाती हमला कर सकते हैं और समूह में हमला कर एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सकते हैं।

    भारत के लिए यह खतरा खास तौर पर संवेदनशील सीमाओं पर बढ़ा है, जहां पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थ भेजने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।

    सैन्य रणनीतिकारों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में AI आधारित स्वायत्त ड्रोन और ड्रोन स्वॉर्म बेहद निर्णायक भूमिका निभाएंगे। ऐसे में एक ऐसा सिस्टम जरूरी हो गया है जो एक साथ कई ड्रोन की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय कर सके।

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    कैसे काम करता है नया भारतीय एंटी-ड्रोन सिस्टम?

    Zen Technologies द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म 'Soft Kill' और 'Hard Kill' दोनों क्षमताओं से लैस है। यह सिस्टम जरूरत के हिसाब से वाहन पर लगाया जा सकता है। पोर्टेबल रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। स्थायी सुरक्षा ढांचे के रूप में तैनात किया जा सकता है।

    Soft Kill क्या है?

    इसमें ड्रोन को जाम या भ्रमित करके गिराया जाता है, बिना उसे सीधे नष्ट किए।

    Hard Kill क्या है?

    इसमें ड्रोन को हथियारों से मार गिराया जाता है। 

    70 MHz से 12 GHz तक निगरानी

    कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम 70 MHz से 12 GHz तक की फ्रीक्वेंसी स्कैन कर सकता है। यानी यह ड्रोन के लगभग सभी प्रमुख कम्युनिकेशन चैनल पकड़ने में सक्षम है।

    1. RF आधारित ड्रोन डिटेक्टर: यह सिस्टम रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सिग्नल के जरिए ड्रोन की पहचान करता है। इससे दुश्मन ड्रोन के करीब आने से पहले ही चेतावनी मिल सकती है।

    • 70 MHz से 12 GHz तक स्कैनिंग
    • एक साथ 100 से अधिक ड्रोन ट्रैक करने की क्षमता
    • विजुअल पहचान से पहले ही खतरे का पता लगाने में सक्षम

    2. दिन-रात निगरानी करने वाला वीडियो ट्रैकिंग सिस्टम: इसमें ऑटोमैटिक सर्वो-आधारित कैमरा प्लेटफॉर्म लगाया गया है।

    • Day & Night कैमरे
    • 3 किलोमीटर तक ड्रोन ट्रैकिंग
    • ड्रोन की दिशा और गतिविधि की निगरानी

    3. स्वदेशी X-Band 3D रडार: यह सिस्टम भारत में विकसित X-band 3D Radar से लैस है। इसकी क्षमता छोटे और कम रडार सिग्नेचर वाले ड्रोन पकड़ सकता है। छोटे ड्रोन पारंपरिक रडार से बच निकलते हैं, लेकिन यह रडार खास तौर पर ऐसे लक्ष्यों के लिए डिजाइन किया गया है।

    • 15 से 20 किलोमीटर दूर तक पहचान
    • ड्रोन की ऊंचाई और दिशा की सटीक जानकारी

    4. AI आधारित कमांड सेंटर: यह पूरे सिस्टम का दिमाग माना जा रहा है। रडार डेटा, RF सिग्नल और वीडियो इनपुट को एक साथ जोड़कर खतरे का विश्लेषण करता है।

    AI की मदद से ड्रोन की पहचान, खतरे का स्तर तय करना, कई लक्ष्यों की प्राथमिकता तय करना और स्वॉर्म अटैक के दौरान तेज प्रतिक्रिया संभव हो पाती है।

    5. ड्रोन को जाम करने वाला सिस्टम: यह एंटी-ड्रोन शील्ड मल्टी-बैंड RF Jammer से लैस है। यह सिस्टम GPS सिग्नल बाधित कर सकता है, ISM बैंड जाम कर सकता है और मोबाइल नेटवर्क आधारित नियंत्रण तोड़ सकता है। इससे ड्रोन दिशा खो सकता है या जमीन पर गिर सकता है।

    6. हार्ड किल गन सिस्टम: यदि ड्रोन जामिंग से नहीं रुकता, तो सिस्टम उसे सीधे मार गिरा सकता है। इसमें शामिल हैं- Remote Controlled Weapon Stations, 12.7 mm और 7.62 mm गन और ऑटोमैटिक लक्ष्य लॉकिंग और फायरिंग।

    इसके अलावा सिस्टम में एयर डिफेंस गन, कामिकाजे इंटरसेप्टर ड्रोन और नेट आधारित ड्रोन कैप्चर सिस्टम भी जोड़े जा सकते हैं।

    ड्रोन स्वॉर्म से निपटने में बड़ी ताकत

    विशेषज्ञों के मुताबिक यह सिस्टम खास तौर पर “Swarm Attack” यानी कई ड्रोन के एक साथ हमले से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है।

    ऐसे हमलों में दुश्मन दर्जनों छोटे ड्रोन अलग-अलग दिशाओं से भेजकर सुरक्षा प्रणाली को भ्रमित करने की कोशिश करता है। AI आधारित यह नया सिस्टम एक साथ कई ड्रोन ट्रैक और इंटरसेप्ट कर सकता है।

    कंपनी के अनुसार, यह सिस्टम IDDM (Indigenous Design, Development and Manufacturing) फ्रेमवर्क के तहत विकसित किया गया है।

    इसका मतलब तकनीक पर भारत का पूरा नियंत्रण, विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम और स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूती देना है।

    Zen Technologies के चेयरमैन अशोक अतलुरी ने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से ड्रोन आधारित हो रहे हैं और जो देश समय रहते खुद को नहीं बदलेंगे, वे भविष्य के युद्धक्षेत्र में कमजोर साबित होंगे।

    भविष्य के युद्धों में गेमचेंजर बन सकते हैं ऐसे सिस्टम

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ड्रोन और AI आधारित हथियार युद्ध की रणनीति पूरी तरह बदल देंगे। ऐसे में भारत का यह स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम सीमाओं की सुरक्षा, सैन्य ठिकानों की रक्षा, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा और आतंकवाद रोधी अभियानों में बेहद अहम भूमिका निभा सकता है।

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