सूरत में बिना नोटिस मकान ढहाने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज, गुजरात हाई कोर्ट ने कहा- दोषी अधिकारियों के खर्च पर हो पुनर्वास
गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत के नासीरनगर में अवैध तरीके से सौ से अधिक मकान ढहाने के मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए ब ...और पढ़ें

दोषी अधिकारियों के खर्च पर हो सूरत में पुनर्वास- गुजरात हाई कोर्ट (सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
गुजरात हाई कोर्ट ने सूरत के पीड़ितों के हक में सुनाया ऐतिहासिक फैसला
सूरत में बेघर हुए 150 परिवारों को न्याय की उम्मीद
अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने सूरत के नासीरनगर में अवैध तरीके से सौ से अधिक मकान ढहाने के मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना डेढ सौ परिवारों को सड़क पर ला दिया। न्यायालय ने पूरे मामले की समीक्षा के बाद कहा कि दोषी अधिकारियों के खर्चे से इन परिवारों का पुनर्वास किया जाना चाहिए।
सूरत के नासीरनगर में मई के अंतिम सप्ताह में सूरत महानगर पालिका के अधिकारियों ने स्थानीय बिल्डर से मिलीभगत कर उसके नवनिर्मित आवासीय फ्लैट के सामने बने झौंपड़ी व मकानों को ढहा दिया था।
उच्च न्यायालय ने 26 पीड़ित परिवारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मनपा अधिकारियों ने कानूनी की पालना किए बिना डेढ सौ परिवारों को सडक पर ला दिया। न्यायालय ने यहां तक कहा कि अब इन परिवारों का पुनर्वास दोषी अधिकारियों के खर्च से होना चाहिए।
ध्यान रहे कि सूरत में मई के आखिर में जमीन सीमांकन के नाम पर नासीर नगर में करीब एक सौ मकान व झौंपडों पर बुलडोजर चलाने के मामले में महानगर पालिका आयुक्त एम नागरत्न ने कार्यकारी अभियंता समेत 5 अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।
न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए सूरत महानगर पालिका व सूरत पुलिस आयुक्त से जवाब मांगा था कि बिना नोटिस दिए मनमाने तरीके से लोगों के घर क्यों ढहाए गये।
पुलिस आयुक्त से इस बात का जवाब मांगा गया था कि मनपा ने सीमांकन के लिए जाप्ता मांगा था तो पुलिस बुलडोजर से मकान ढहाने के दौरान क्यों सुरक्षा करती रही।