सड़क दुर्घटना के मामलों में मिलेगा अंतरिम मुआवजा, सरकार ने लागू की योजना
सरकार ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए अंतरिम मुआवजा योजना लागू की है, जिसमें मृतक के परिवार को दो लाख और गंभीर घायल को एक लाख रुपये मिलेंगे।

HighLights
सड़क दुर्घटना में मृतक को 2 लाख, घायल को 1 लाख मुआवजा।
सुप्रीम कोर्ट ने गैर-बीमित वाहनों को शामिल करने पर विचार को कहा।
दिल्ली हाई कोर्ट के पास सड़क सुरक्षा व्यवस्था बनाने का निर्देश।
माला दीक्षित, नई दिल्ली। कई बार सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले या गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के परिवार पर तत्काल आजीविका और चिकित्सा खर्च का संकट आ जाता है। परिवार को मुसीबत में तात्कालिक राहत देने के लिए सरकार ने सड़क दुर्घटना के मामलों में अंतरिम मुआवजे की योजना लागू की है।
इसमें दुर्घटना में जान गंवाने वाले के स्वजन को दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल को एक लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का प्रविधान है। इस योजना की जानकारी शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी।
हालांकि योजना में अभी बीमित वाहन से दुर्घटना होने पर अंतरिम मुआवजे की बात है, लेकिन कोर्ट ने केंद्र सरकार से गैर-बीमित वाहन से दुर्घटना होने को भी इसमें शामिल करने पर विचार करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने 28 अप्रैल, 2025 को केंद्र सरकार को चार महीने के भीतर सड़क दुर्घटना के मामले में अंतरिम मुआवजा योजना बनाने का निर्देश दिया था। जब योजना नहीं बनी तो इसी आदेश को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के वकील केसी जैन ने सरकार के विरुद्ध अवमानना याचिका दाखिल की थी।
शुक्रवार को केसी जैन की अवमानना याचिका पर जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की। जैन ने सरकार पर मोटर वाहन अधिनियम 164ए के तहत अंतरिम मुआवजा योजना नहीं लागू करने का आरोप लगाया, तो सरकार की पैरोकारी कर रहे अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने योजना तैयार कर लागू कर दी है।
योजना 25 फरवरी, 2026 को तैयार हुई और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, प्रशासकों एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है। कोर्ट ने सवाल किया कि क्या इस योजना की जानकारी न्यायमित्र व वरिष्ठ वकील गौरव अग्रवाल को दी गई। इस पर अग्रवाल ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या योजना विधिवत प्रकाशित की गई है। आखिर लोगों को इसकी जानकारी कैसे मिलेगी कि योजना लागू है। मोटर वाहन दुर्घटना के मामलों की सुनवाई कर रहे ट्रिब्युनलों को इसकी जानकारी कैसे होगी। इस पर एएसजी ने कहा कि सभी राज्यों को योजना भेज दी गई है।
मामले में याचिकाकर्ता केसी जैन ने कहा कि इस योजना में सिर्फ बीमित वाहन से दुर्घटना होने पर अंतरिम मुआवजा देने का प्रविधान है, उन्होंने आग्रह किया कि इसमें गैर-बीमित वाहन से दुर्घटना होने पर भी मुआवजा देने का प्रविधान किया जाए जो कि वाहन का मालिक दे। कोर्ट ने सरकार से इस सुझाव पर विचार करने को कहा है।
योजना के मुताबिक अंतरिम मुआवजा भी मुआवजा दावा दाखिल करने वाले को ट्रिब्युनल से दिलवाया जाएगा, यानी मुआवजा दावा लंबित होना जरूरी है और जब मामले में अंतिम फैसला आ जाएगा और अंतिम मुआवजा तय कर दिया जाएगा तो अंतरिम मुआवजे में दी गई रकम को समायोजित कर दिया जाएगा। योजना के मुताबिक आवेदन के लिए आनलाइन पोर्टल की व्यवस्था प्रस्तावित है।
दिल्ली हाई कोर्ट जाने वालों के लिए 25 नवंबर तक बनाएं सड़क पार करने की व्यवस्था
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार को एक बार फिर चेताया कि वह अगली सुनवाई की तिथि 25 नवंबर तक दिल्ली चिड़ियाघर के सामने से हाई कोर्ट जाने के लिए सड़क पार करने की सुरक्षित समुचित व्यवस्था बनाकर तैयार करे। कोर्ट ने कहा कि वह पहले आदेश दे चुका है और अगर काम पूरा नहीं हुआ तो वह मुख्य सचिव को अदालत में तलब कर लेगा।
जस्टिस पार्डीवाला ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अगर काम नहीं हुआ तो हम दोनों न्यायाधीश दिल्ली हाई कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच जाएंगे और वहीं बैठेंगे जब तक काम पूरा नहीं होता। धरना देंगे। कोर्ट ने सात अक्टूबर, 2025 को आदेश दिया था कि कोर्ट जाने वालों की सुविधा के लिए वहां सड़क पार करने के लिए फुटओवर ब्रिज बनाया जाए।
इसके लिए कोर्ट ने सात महीने का समय दिया था। 15 सितंबर को कोर्ट ने अपना आदेश दोहराया और ताकीद के साथ अगली तिथि 25 नवंबर तय कर दी। शुक्रवार को सुनवाई के दैरान कोर्ट को बताया गया कि उच्चस्तरीय समिति बनाई जा रही है।
