Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    राम मंदिर से दूरी और 'चढ़ावा चोरी' पर पैनी नजर, क्या सपा के लिए 'रामबाण' बनेगा ये दांव?

    By Jitendra sharmaEdited By: Garima Singh
    Updated: Thu, 13 Aug 2026 09:30 PM (IST)

    सपा 2027 के विधानसभा चुनाव में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे को भुनाकर भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। ...और पढ़ें

    सपा 2027 चुनाव में 'चंदा चोरी' को बनाएगी मुद्दा

    सपा 2027 चुनाव में 'चंदा चोरी' को बनाएगी मुद्दा

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। जिस राम मंदिर के निर्माण का राजनीतिक लाभ भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में नहीं मिला, उस मंदिर में चढ़ावा चोरी से उसे कितना नुकसान होगा, यह समय बताएगा। परंतु, मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी अवश्य इसे भगवा खेमे के विरुद्ध 'रामबाण' मानकर चल रही है।

    राजनीतिक विमर्श के मुख्य केंद्र में जब छात्र आंदोलन था, तब भी संसद के पूरे मानसून सत्र के दौरान सपा ने लगातार 19-20 दिन तक राम मंदिर चढ़ावा चोरी की घटना को ही प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शन कर सरकार को घेरने का प्रयास किया।

    सपा 2027 चुनाव में 'चंदा चोरी' को बनाएगी मुद्दा

    फिर सत्र के स्थगन के बाद जिस तरह से सपा संसदीय दल की ओर से दिल्ली के कनाट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर में विपक्षी सांसदों से जुटाया चंदा दान किया, उसका साफ संदेश है कि सेकुलर राजनीति की मजबूरी में सपा मुखिया अखिलेश यादव भले ही अब तक राम मंदिर से दूरी बनाए हों, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव में वह चंदा चोरी की घटना के सहारे अपनी 'साफ्ट हिंदुत्व' की राजनीति को कुछ आधार देकर भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाना चाहते हैं।

    संसद के मानसून सत्र में गतिरोध को बल एकजुट विपक्ष का मिला। विपक्षी दलों ने लगभग सभी मुद्दों पर एक-दूसरे को समर्थन तो दिया, लेकिन अपना-अपना प्राथमिक एजेंडा भी पकड़े रहे। जिस तरह कांग्रेस छात्र आंदोलन पर मुखर रही, वहीं समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले को प्राथमिकता पर रखा।

    खबरें और भी

    चूंकि, यह मुद्दा अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़ा है और कुछ माह बाद वहां विधानसभा चुनाव होना है, इसलिए सपा ने इस मुद्दे में प्रासंगिकता के साथ ही उस धार को भी महसूस किया, जो कि उत्तर प्रदेश के भगवाधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ईमानदार छवि, सख्त कानून व्यवस्था और भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे पर प्रहार में काम आ सकती है। सपा सांसदों ने अखिलेश यादव के नेतृत्व में लगातार संसद के मकर द्वार के सामने दान पात्र रखकर, तख्तियां लेकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर सरकार से जवाब मांगा।

    सांसदों का चंदा हनुमान मंदिर में दान किया

    अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद अक्सर दानपेटी को अपने सिर पर रखकर प्रदर्शन करते दिखाई दिए। सपा सदस्यों सहित विपक्षी सांसदों ने दान भी दिया।

    31 जुलाई को तो बिहार से कांग्रेस समर्थित निर्दलीय सांसद पप्पू यादव साधु वेश में पहुंचे और सपा सांसदों के साथ मिलकर चंदा चोरी का नाटकीय प्रदर्शन भी किया।

    बुधवार को अखिलेश यादव, प्रो. रामगोपाल यादव, डिंपल यादव, जया बच्चन सहित अन्य सदस्यों ने दानपात्र, पानी, दूध, बोरी आदि रखकर प्रदर्शन किया।

    2,15,490 का किया दान 

    वहीं, मानसून सत्र अनिश्चितकाल के स्थगित होने के बाद गुरुवार को अवधेश प्रसाद, धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव, आदित्य यादव, देवेश शाक्य, रुचि वीरा, राजीव राय आदि ने कनाट प्लेस पहुंचकर 2,15,490 रुपये और दो चांदी के सिक्के दान किए। रसीद पर सपा संसदीय दल लिखा था।

    सपा सांसद आनंद भदौरिया ने बताया कि यह चंदा मानसून सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों से जुटाया गया। उनका कहना है कि सपा के लिए यह चुनावी मुद्दा नहीं, लेकिन जनता के बीच इसे ले जाना चाहते हैं। जनता खुद भाजपा से इस पर जवाब मांगेगी।

    यह भी पढ़ें- मानसून सत्र: संसद में गतिरोध खत्म करने के लिए खुद आगे आए अमित शाह

    यह भी पढ़ें- संसद में गूंजा आंतरिक सुरक्षा का मुद्दा, गृह मंत्रालय ने कहा- आतंकवाद के खिलाफ 'प्रहार' जारी रखेगी सरकार