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    'सभी कोर्ट परिसर में शौचालय बनाइए, भले ही शराब-सिगरेट पर अतिरिक्त शुल्क लगाइए,' SC ने राज्यों को दिया निर्देश

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 10:03 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जिला अदालतों में बुनियादी वाशरूम सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट ने सभी जिला अदालतों में वाशरूम सुविधा अनिवार्य की।

    2. इसे मौलिक मानवाधिकार बताया, फंड की कमी बहाना नहीं।

    3. राज्यों को छह हफ़्ते में हलफ़नामा दाखिल करने का निर्देश।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश भर की जिला अदालतों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे सभी अदालतों में शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएं। बेंच ने मौखिक रूप से कहा, "भले ही शराब या सिगरेट पर अतिरिक्त एक्साइज टैक्स लगाएं, और हम उसे सही ठहराएंगे।"

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जायमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि शौचालय की सुविधा एक बुनियादी मानवाधिकार है और इसके लिए फंड की कमी को बहाना नहीं बनाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस मामले पर छह हफ़्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

    बेंच ने मौखिक रूप से कहा, "कृपया महिला वकीलों के काम करने की खराब स्थिति पर ध्यान दें। सभी एडवोकेट जनरल को जमीनी स्तर पर असल स्थिति का पता लगाना चाहिए और कदम उठाने चाहिए।

    सिर्फ यह कह देना कि फंड नहीं है, काफी नहीं है क्योंकि यह बुनियादी मानवाधिकारों के खिलाफ है।" सुप्रीम कोर्ट एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें देश भर की अदालतों में महिला वकीलों के लिए बार रूम और दूसरी जरूरी सुविधाओं के न होने का मुद्दा उठाया गया था।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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