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    सोनिया गांधी के दखल के बाद कांग्रेस ने किया सोनम वांगचुक का समर्थन, सरकार पर साधा निशाना

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 11:08 PM (IST)

    कांग्रेस ने पेपर लीक और व्यवस्थागत खामियों के विरोध में अनशन कर रहे सोनम वांगचुक का समर्थन किया है। ...और पढ़ें

    सोनम वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस (फोटो-पीटीआई)

    सोनम वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस (फोटो-पीटीआई)

    HighLights

    1. कांग्रेस ने सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया।

    2. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

    3. सोनिया गांधी के निर्देश पर पवन खेड़ा मिले।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने पेपर लीक तथा व्यवस्था की गंभीर खामियों के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का समर्थन करते हुए उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है।

    समझा जाता है कि छात्रों की मांग में जारी अनशन का समर्थन करने की कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की स्पष्ट राय के बाद पार्टी ने जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के मंच पर जाकर वांगचुक के प्रति अपनी एकजुटता दिखाई।

    सोनम वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस

    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने वैसे तो गुरूवार को ही एक संक्षिप्त बयान में वांगचुक का समर्थन करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया था। लेकिन शुक्रवार को पार्टी मीडिया विभाग के प्रमुख राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा को कांग्रेस प्रतिनिधि के तौर पर वांगचुक से मिलने जंतर-मंतर पर भेजा गया। ताकि मुख्य विपक्षी पार्टी के रूख को लेकर किंतु-परंतु के सारे सवालों का रास्ता बंद हो जाए।

    वांगचुक तथा अनशनकारी छात्रों से जंतर-मंतर पर मुलाकात के बाद पवन खेड़ा ने कहा कि जब नागरिक विरोध करते हैं तो उनकी बातें सुनना सरकार का कर्तव्य है। मगर वांगचुक तथा युवा छात्रों की बात नहीं सुना जाना सरकार की असंवदेनशीलता के साथ ही लोकतंत्र के प्रति उसके अशोभनीय अहंकार को दर्शाता है।

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    वांगचुक और छात्रों से बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने का अनुरोध करते हुए कहा कि अपने लोगों को खोकर कोई आंदोलन मजबूत नहीं होता।

    खेड़ा ने कहा कि सरकार का कर्तव्य है कि अनशन करने वालों की बात सुने, न कि मुंह फेर ले और यही राज धर्म है। उन्होंने इंदिरा गांधी के 1984 तथा मनमोहन सिंह सरकार के 2011 के आंदोलनों के संबंध में दिखाई संवेदनशीलता का जिक्र किया।

    सूत्रों के अनुसार कांग्रेस संसदीय रणनीतिक समूह की गुरूवार हुई बैठक के दौरान मानसून सत्र में पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के मुद्दे को उठाए जाने पर चर्चा हुई।

    सोनिया गांधी के कहने पर समर्थन

    सोनिया गांधी ने तीन हफ्ते से लगातार जारी अनशन के कारण वांगचुक की गंभीर होती स्थिति को देखते हुए उनका समर्थन किए जाने की जरूरत बताई।

    सोनिया गांधी ने ही लद्दाख को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग करते हुए सोनम वांगचुक के पिता सोनम वांग्याल के 1984 के अनशन का उदाहरण देते हुए बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने खुद जाकर वांग्याल का अनशन समाप्त कराया था।

    कांग्रेस की सबसे वरिष्ठ नेता के इस रूख के मद्देनजर ही केसी वेणुगोपाल ने रणनीतिक समूह की बैठक के तत्काल बाद गुरूवार को एक्स पर एक पोस्ट में वांगचुक का समर्थन कर सरकार पर निशाना साधा और शुकव्रार को पार्टी ने पवन खेड़ा को जंतर-मंतर पर उनसे मिलने के लिए भेजा।

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