कौन हैं BJP के 'इलेक्शन इंजीनियर' सुनील बंसल? साइलेंट वार से उड़ा दी ममता बनर्जी की नींद, पर्दे के पीछे बदला गेम
सुनील बंसल, जिन्हें भाजपा का 'इलेक्शन इंजीनियर' कहा जाता है, ने पश्चिम बंगाल सहित ओडिशा और तेलंगाना में पार्टी की रणनीतिक सफलता में अहम भूमिका निभाई ह ...और पढ़ें

सुनील बंसल

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही भाजपा ने ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को उखाड़ फेंका।
इस जीत के वैसे तो कई नायक हैं लेकिन एक नाम जो सबसे ज्यादा चर्चे में है वो है सुनील बंसल का, जिन्होंने पार्टी की प्रचंड जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई। आइए सुनील बंसल के सियासी सफर पर एक नजर डालते हैं।
कौन हैं सुनील बसंल?
57 वर्ष के सुनील बंसल ने पर्दे के पीछे के खिलाड़ी के रूप बंगाल चुनाव में भूमिका निभाई। मीडिया की सुर्खियों से दूर बंसल चुपचाप संगठन का काम करने वाले नेताओं में से जाने जाते हैं।
ABVP से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले बंसल राजस्थान के निवासी हैं। उन्होंने 1989 में राजस्थान विश्वविद्यालय के महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ा और विजयी हुए।
इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ गए और 1990 में आरएसएस के प्रचारक के रूप में कार्य शुरू किया। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सदस्य के रूप में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

शाह की रणनीति धरातल पर उतारने वाले सूत्रधार
2014 के चुनाव से पहले RSS ने बंसल को भाजपा में भेजने का फैसला किया। उन्हें उत्तर प्रदेश का सह संगठन मंत्री बनाया गया। उस समय अमित शाह राष्ट्रीय महासचिव के रूप में यूपी के प्रभारी थे। बंसल को शाह के साथ करीब से काम करने का मौका मिला।
यहां बंसल ने अपनी संगठन क्षमता, अनुशासन और मेहनत से शाह को प्रभावित किया। क्षेत्रीय दलों को जोड़ने, बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत करने और पन्ना प्रमुख जैसी शाह की महत्वपूर्ण योजनाओं को बंसल ने लागू किया। ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ अभियान को भी उन्होंने प्रभावी ढंग से चलाया।
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बंसल बने तीन राज्य के प्रभारी
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद बंसल को प्रमोशन देते हुए उत्तर प्रदेश का संगठन मंत्री बना दिया गया। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की भारी जीत में भी उनकी अहम भूमिका रही। 2019 और 2022 के चुनावों में भी उन्होंने यूपी में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
लगातार आठ वर्ष तक यूपी में संगठन मंत्री रहते हुए उन्होंने योगी सरकार और पार्टी संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखा। 2022 में योगी सरकार की वापसी के बाद उन्हें दिल्ली बुलाया गया और जेपी नड्डा की टीम में राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। उन्हें ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे अहम राज्यों का प्रभारी बनाया गया।
ओडिशा में नवीन पटनायक का किला तोड़ा
ओडिशा में प्रभारी के रूप में बंसल ने नवीन पटनायक की लंबे समय से चली आ रही सत्ता को चुनौती दी। उन्होंने वहां पार्टी संगठन को बुनियादी स्तर तक मजबूत किया।
नतीजा यह रहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 21 में से 20 सीटें जीत लीं और विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल कर राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई।

तेलंगाना में सफलता, बंगाल में 2019 का प्रदर्शन नहीं दोहरा पाए
तेलंगाना में भी बंसल के संगठन कौशल ने कमाल किया। उनकी रणनीति से भाजपा को राज्य की 17 लोकसभा सीटों में से 8 पर जीत हासिल हुई।
हालांकि पश्चिम बंगाल में 2024 के लोकसभा चुनाव में 2019 वाला प्रदर्शन दोहराने में सफलता नहीं मिली। 2019 में 40।64% वोट शेयर के साथ 18 सीटें मिली थीं, जबकि 2024 में वोट शेयर थोड़ा घटकर 38।73% रह गया और सीटें 12 पर सिमट गईं।
2026 विधानसभा चुनाव में जीत का परचम फहराया
2026 के विधानसभा चुनाव को लक्ष्य करके बंसल ने पूरी तैयारी शुरू की। उन्होंने स्थानीय मुद्दों की पहचान की, केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया।
हाशिए पर रहे नेताओं को मुख्यधारा में लाया, पार्टी को एकजुट किया और बूथ स्तर तक व्यापक अभियान चलाया। एसआईआर (सूचना, संचार और रणनीति) को सक्रिय किया, डेटा आधारित माइक्रो मैनेजमेंट पर जोर दिया।
हर विधानसभा क्षेत्र के जातिगत समीकरण, स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की लोकप्रियता का गहन विश्लेषण किया। आरएसएस के साथ समन्वय बनाया और उम्मीदवार चयन में उनकी फीडबैक ली।
अमित शाह के 15 दिनों के राज्य दौरे के दौरान उनके साथ निकट से काम किया और उनके निर्देशों को प्रभावी रूप से लागू किया। नाराज नेताओं को मनाने और चुनावी चुनौतियों को दूर करने की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली।
भाजपा के 'इलेक्शन इंजीनियर' सुनील बंसल
बंसल ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब और आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर अमित शाह की रणनीति को बंगाल में जमीन पर उतारा।
उनकी शांत स्वभाव वाली लेकिन बेहद प्रभावी कार्यशैली के कारण उन्हें भाजपा का 'इलेक्शन इंजीनियर' कहा जाता है। कठिन राज्यों में पार्टी का संगठन खड़ा करने और उसे चुनावी मशीन में बदलने में वे माहिर हैं।
2027 के चुनावों में नई जिम्मेदारी का इंतजार
सुनील बंसल का नाम जेपी नड्डा के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए भी चर्चा में रहा था, हालांकि यह जिम्मेदारी नितिन नवीन को सौंपी गई। राजस्थान में मुख्यमंत्री पद की दौड़ में भी उनका नाम शामिल था, लेकिन भजनलाल शर्मा ने बाजी मारी। अब 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव होने हैं।
पंजाब और हिमाचल को छोड़कर बाकी राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। पार्टी के सामने अपनी सरकारें बचाने के साथ-साथ पंजाब और हिमाचल में सत्ता हासिल करने की चुनौती है। देखना होगा कि आगामी चुनावों में बंसल को क्या बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाती है।
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