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    'दहेज लेना पाप है': 8 बड़े केस और आंकड़ों में जानिए दहेज प्रथा की सच्चाई, Dowry Act में अब तक हुए ये बदलाव

    By Sakshi GuptaEdited By: Sakshi Gupta
    Updated: Wed, 20 May 2026 11:57 PM (IST)

    भारत में दहेज प्रथा और इससे होने वाली मौतों ने लोगों को झकझोर दिया है, जिसमें ट्विशा शर्मा और दीपिका नागर जैसे हालिया दर्दनाक मामलों का जिक्र है। ...और पढ़ें

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    दहेज ने जकड़े महिलाओं के पैर (जागरण)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 'दहेज लेना पाप है', यह बात हम सालों से लगातार सुनते आ रहे हैं, लेकिन आज भी ये कुरीति देश के हर हिस्से में पैर जमाए हुई है। एक तरफ जहां हम मॉडर्न विचारों को अपनाने की बात कहते हैं, वहीं लोगों के बीच दहेज की मानसिकता हमें पिछली कई पीढ़ियों में धकेल देती है।

    दहेज प्रताड़ना को लेकर सामने आ रहे मामलों ने देश को झकझोर दिया है। 12 मई को भोपाल की ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला सामने आने से फिर एक बार दहेज उत्पीड़न का मामला चर्चा में है।

    ट्विशा शर्मा के बाद 17 मई को नोएडा की रहने वाली दीपिका नागर की आत्महत्या का मामला सामने आया। ट्विशा की तरह इस मामले में भी लड़की के घरवालों ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप लगाए। कर्नाटक की रहने वाली 24 वर्षीय ऐश्वर्या की भी दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के कारण मौत की खबर सामने आई।

    हरियाणा के सिरसा में निक्की भाटी, भोपाल की ट्विशा शर्मा, नोएडा की दीपिका नागर और कर्नाटक की ऐश्वर्या तक, ऐसी कई महिलाएं हैं, जिनके परिवार वाले दहेज प्रताड़ना को अपनी बेटियों की मौत की वजह बता रहे हैं।

    Dowry Act (1)

    दहेज से मौत के 8 बड़े मामले

    • इंदौर में 16 सितंबर 2006 को एक ऐसी वारदात सामने आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। सर्वोदयनगर में भूमि (ऋचा) रामचंदानी की हत्या कर उसके दो टुकड़े किए थे। टुकड़ों को दो पोटलियों में बांधकर धन्वंतरि स्कूटी से पटेलनगर स्थित उद्यान में दो बार में फेंक गया था।
    • 2024 में प्रयागराज की अंशिका का दहेज प्रताड़ना से मौत का ऐसा ही मामला सामने आया था। अंशिका का शव ससुराल में फांसी के फंदे से लटकता हुआ मिला था। इस मामले में तीन लोगों की मौत हुई और सात लोगों को जेल हुई।
    • उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में 28 वर्षीय निक्की भाटी को जिंदा जलाकर उसकी हत्या कर दी गई। 21 अगस्त 2025 को हुई इस वारदात ने लोगों को हैरान कर दिया।
    • भोपाल की 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की मौत का मामला सामने आया। इसमें ट्विशा के पति समर्थ सिंह के साथ सास और रिटायर्ड जज पर उसे प्रताड़ित करने के आरोप लगे हैं।
    • ग्रेटर नोएडा की रहने वाली दीपिका नागर भी दहेज लोभियों की हैवानियत का शिकार हो गई। 17 मई की रात मकान की चौथी मंजिल से संदिग्ध परिस्थितियों में गिरी दीपिका नागर की मौत हो गई।
    • कर्नाटक के बल्लारी जिले में दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न से जुड़ा एक और दर्दनाक मामला सामने आया है। 24 वर्षीय ऐश्वर्या नाम की महिला ने पति और सास की दी गई लगातार मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर आत्महत्या कर ली।
    • ग्वालियर की सुरैयापुरा में इंटरनेट मीडिया इंफ्लुएंसर पलक रजक की संदिग्ध मौत का मामला भी सामने आया। जहां ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया, वहीं मायका पक्ष ने इसे हत्या करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए।
    • हाल ही में लखनऊ की  29 वर्षीय सोनी राजपूत की मौत का मामला सामने आया है। परिवारजन ने पति समेत अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाया है।

    भारत में दहेज से होने वाली मौतें

    NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2024 में दहेज से कुल 5,737 मौतें दर्ज की गईं, जिसका मतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर दहेज से होने वाली मौतों की दर प्रति एक लाख महिला आबादी पर 0.8 मामले है।

    यह डेटा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के दिए गए आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304B, दोनों के तहत दर्ज मामले शामिल हैं।

    2024 में दहेज प्रताड़ना के कारण उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2,038 मौतें हुईं। दूसरे नंबर पर बिहार, जहां 1,078 ऐसे मामले सामने आए।

    साथ ही, इन राज्यों में दहेज से होने वाली मौतों की दर भी सबसे ज्यादा रही। उत्तर प्रदेश में प्रति एक लाख महिला आबादी पर 1.8 मौतें और बिहार में प्रति एक लाख महिला आबादी पर 1.7 मौतें। हालांकि ज्यादा आबादी वाले राज्यों में स्वाभाविक रूप से मामलों की कुल संख्या ज्यादा रही।

    खबरें और भी

    नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 से 2022 के बीच भारत में हर साल औसतन 7,000 दहेज से जुड़ी मौतें हुईं।

    NCRB के ये आंकड़े असल स्थिति से कम ही हैं, क्योंकि दहेज से जुड़ी कई मौतें तो रिपोर्ट ही नहीं हो पातीं। यह इस समस्या की गंभीरता को और भी ज्यादा उजागर करती है।

    Dowry Act (2)

    दहेज ने जकड़े महिलाओं के पैर

    उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में दहेज से जुड़ी मौतों के इस भयावह आंकड़ों से पता चलता है कि यह गैर-कानूनी प्रथा अभी भी कितनी मजबूती से अपनी पकड़ बनाए हुए है।

    दहेज के चलते महिलाओं को लगातार उत्पीड़न, मारपीट और आत्महत्या जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि जांच प्रक्रियाएं धीमी गति से चलती हैं और दोषियों को सजा मिलने में वक्त लग जाता है।

    भारत में 1961 से ही दहेज देना और दहेज लेना दोनों ही जुर्म है। फिर भी इसे एक सामाजिक प्रथा के तौर पर ही देखा जाता है। कई परिवार आज भी इसे शादी का एक जरूरी हिस्सा मानते हैं, जिसे अक्सर तोहफों का नाम दे दिया जाता है।

    समाज के कुछ तबकों में, लड़की की अहमियत इस बात से नहीं आंकी जाती कि उसने अपनी जिंदगी में क्या हासिल किया है, बल्कि इस बात से आंकी जाती है कि वह अपने साथ कितना दहेज लाई है।

    सांस्कृतिक और सामाजिक दबाव परिवारों को दहेज की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर करते हैं, जिसका नतीजा अक्सर उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और यहां तक कि मौत के रूप में सामने आता है।

    विश्व बैंक के एक अध्ययन में, जिसमें 1960 से 2008 के बीच ग्रामीण भारत में हुई 40,000 शादियों का जायजा लिया गया था, यह बात सामने आई कि 95% शादियों में दहेज दिया गया था। यह इस बात का सबूत है कि यह प्रथा आज भी कितनी गहरी जड़ें जमाए हुए है।

    Dowry Act में क्या है सजा का प्रावधान?

    भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80 के मुताबिक, शादी के 7 साल के भीतर किसी महिला की जलने, चोट लगने या किसी अन्य अप्राकृतिक परिस्थिति में हुई मृत्यु को 'दहेज के कारण हुई मृत्यु' माना जाता है, यदि उसकी मृत्यु से ठीक पहले उसे दहेज को लेकर किसी प्रकार की क्रूरता या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो।

    सजा- ऐसी परिस्थिति में आरोपी को कम से कम 7 साल की कैद, जिसे बढ़ाकर आजीवन कारावास तक किया जा सकता है।

    क्रूरता को लेकर मामलों में BNS की धारा 86 के तहत, 'क्रूरता' को ऐसे किसी भी जान-बूझकर किए गए आचरण के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसके कारण किसी महिला को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़े या जिससे उसके शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचे।

    इसमें ऐसा उत्पीड़न भी शामिल है, जिसका उद्देश्य महिला या उसके परिवार को पैसे या संपत्ति से जुड़ी गैर-कानूनी मांगें पूरी करने के लिए मजबूर करना हो अथवा ऐसी मांगें पूरी न कर पाने के कारण किया गया उत्पीड़न भी इसी श्रेणी में आता है।

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