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    कौन संभालेगा टाटा की कमान? जल्द शुरू होगी नए चेयरमैन चयन की प्रक्रिया, लेकिन राह नहीं आसान

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 09:44 PM (IST)

    एन. चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से हटने के फैसले के बाद नए चेयरमैन की तलाश शुरू हो गई है, लेकिन नोएल टाटा के नेतृत्व में ट्रस्टों के भीतर पुर ...और पढ़ें

    कौन संभालेगा टाटा की कमान?

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन के फैसले का सम्मान करते हुए समूह के नये चेयरमैन को नियुक्त करने के लिए चयन समिति गठित करने का ऐलान किया है, लेकिन पूरी नियुक्ति प्रक्रिया आसान नहीं होने वाली।

    नोएल टाटा के नेतृत्व में ट्रस्टों के अंदर पुराने मतभेद, मेहली मिस्त्री सहित कई ट्रस्टियों से चल रहे विवाद, कानूनी अड़चनें और सर्वसम्मति की जरूरत प्रक्रिया को जटिल बनाने के लिए काफी माने जा रहे हैं। चंद्रशेखरन के इस्तीफे से नोएल टाटा मजबूत जरूर हुए हैं, लेकिन इस बात में अभी संदेह है कि वह अपने मनपसंद उम्मीदवार (जैसे टाटा स्टील के टी.वी. नरेंद्रन) को चंद्रशेखरन की जगह आसानी से बिठा पाएंगे।

    चंद्रशेखरन 2027 में टाटा संस चेयरमैन पद छोड़ेंगे

    ट्रस्ट की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, '12 अगस्त 2026 को हमारे नामित निदेशकों को टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का ईमेल मिला, जिसमें उन्होंने 20 फरवरी 2027 को अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद चेयरमैन पद के लिए दोबारा नामांकन न करने के फैसले के बारे में बताया है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट उनके इस फैसले का सम्मान करता है।'

    ट्रस्टियों ने प्रस्ताव पारित कर टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार चयन समिति बनाने का फैसला लिया है। यह समिति नए चेयरमैन की सिफारिश करेगी। ट्रस्ट ने कहा कि वह सुचारू, समयबद्ध और व्यवस्थित नेतृत्व बदलाव के लिए टाटा संस को पूरा समर्थन देगा।

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    जल्द शुरू होगी नियुक्ति की प्रक्रिया 

    बुधवार (12 अगस्त) को चंद्रशेखरन ने टाटा संस बोर्ड को सूचित किया था कि वे फरवरी 2027 के बाद पद के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। उनका मौजूदा पांच वर्षीय कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। वे तब तक पद पर बने रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट नेतृत्व की जरूरत बताते हुए उत्तराधिकारी की प्रक्रिया जल्द शुरू करने को कहा था।

    जानकारों का कहना है कि चंद्रशेखरन का इस्तीफा अगर टाटा ट्रस्ट् के अंदर लंबे समय से चल रहे मतभेदों का नतीजा है तो अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस इस्तीफे से उन विवादों का पटाक्षेप हो गया है। नोएल टाटा का विवाद सिर्फ चंद्रशेखरन तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ( रतन टाटा के करीबी और साइरस मिस्त्री के संबंधी) के पुनर्नियुक्ति का विरोध किया था, जिसके बाद मिस्त्री को ट्रस्ट से बाहर होना पड़ा।

    मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास गवर्नेंस विफलताओं, हितों के टकराव और पारदर्शिता की कमी जैसे आरोप लगाये जो टाटा समूह के इतिहास में पहली बार हुआ था। मिस्त्री के साथ प्रामित झावेरी, डेरियस खंबाटा और जहांगीर एच.सी. जहांगीर जैसे ट्रस्टियों का खेमा था।

    नोएल टाटा का पलड़ा भारी 

    नोएल टाटा का पहले वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह (पूर्व रक्षा सचिव) के साथ भी मतभेद रहे हैं। साथ ही टाटा संस को लिस्टेड करने के मुद्दे पर भी ट्रस्टियों में फूट दिखी। नोएल टाटा इसके खिलाफ बताए जाते हैं।

    इसी तरह से सर रतन टाटा ट्रस्ट पर चैरिटी कमिश्नर की रोक और कानूनी चुनौतियां भी प्रक्रिया को जटिल बना रही हैं। विवाद के बने रहने की स्थिति में नामित चेयरमैन के लिए सर्वसम्मति की जरूरत संबंधी प्रावधान एक बड़ी बाधा बन कर उभर सकती है।

    चंद्रशेखरन के फैसले से एक तरह से नोएल टाटा मजबूत होकर उभरे हैं, क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के रूप में चयन समिति में उनकी भूमिका निर्णायक रहेगी। लेकिन अभी यह बात पक्के तौर पर नहीं कही जा सकती कि नोएल टाटा अपने मनपसंद उम्मीदवार को आसानी से चंद्रशेखरन की जगह बिठा सकेंगे।

    कारपोरेट गलियारों में टाटा स्टील के एमडी व सीईओ टी.वी. नरेंद्रन का नाम सबसे प्रमुखता से चर्चा में है। नरेंद्रन को नोएल टाटा का विश्वस्त माना जाता है और वे समूह में लंबे अनुभव, ऑपरेशनल क्षमता तथा वैश्विक कारोबार संभालने के लिए जाने जाते हैं। अन्य नामों में टाटा संस के सीएफओ सौरभ अग्रवाल और कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

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