केंद्र ने 20 साल की बंदरगाहों को मिली पर्यावरणीय मंजूरी की वैधता अवधि, मोदी सरकार का बड़ा फैसला
केंद्र सरकार ने बंदरगाहों, हार्बर, ड्रेजिंग (समुद्र तल से गाद, मिट्टी और रेत निकालना) परियोजनाओं के लिए दी गई पर्यावरणीय ...और पढ़ें

केंद्र ने 20 साल की बंदरगाहों को मिली पर्यावरणीय मंजूरी की वैधता अवधि
HighLights
बाद में इसे पांच-पांच साल के लिए दो बार और बढ़ाया जा सकेगा
पर्यावरणीय मंजूरी की वैधता अवधि बढ़ाने की कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है
पीटीआई, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बंदरगाहों, हार्बर, ड्रेजिंग (समुद्र तल से गाद, मिट्टी और रेत निकालना) परियोजनाओं के लिए दी गई पर्यावरणीय मंजूरियों की वैधता अवधि को मौजूदा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया है। इसे बाद में पांच-पांच साल के लिए दो बार और बढ़ाया जा सकेगा। इस बारे में अधिसूचना सोमवार को जारी की गई।
इससे पहले पर्यावरण मंत्रालय ने मई में ड्राफ्ट अधिसूचना में ऐसी परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय मंजूरियों की वैधता 15 साल तक बढ़ाने और इसे आगे पांच साल और बढ़ाने का विकल्प देने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, हितधारकों के साथ परामर्श के बाद वैधता को 20 साल तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय इसलिए लिया गया है, क्योंकि इन परियोजनाओं के निर्माण में लंबा समय लगता है और इनका विकास कई चरणों में होता है। 10 साल की अवधि इन परियोजनाओं के लिए पर्याप्त नहीं थी।
पर्यावरणीय मंजूरी की वैधता अवधि बढ़ाने की कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंगलवार को एक्स पर पोस्ट में, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह संशोधन "ग्रेट निकोबार में प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए किया गया है।
ग्रेट निकोबार में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बुनियादी ढांचा पहल "ग्रेट निकोबार आइलैंड्स परियोजना" का हिस्सा है। इसके तहत एकीकृत टाउनशिप, नागरिक और ग्रीनफील्ड सैन्य हवाईअड्डा, और 450-एमवीए गैस और सौर ऊर्जा आधारित संयंत्र का निर्माण किया जाएगा।
