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ट्रंप से जुड़ी कंपनी का पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता, अमेरिका के बदलते रुख पर खड़े हुए सवाल

Published: Mon, 05 Oct 2026 12:01 AM (IST)Updated: Mon, 05 Oct 2026 02:14 AM (IST)

अमेरिकी डिफेंस स्टार्ट-अप पावरस ने पाकिस्तानी सेना के साथ मानवरहित हवाई सिस्टम के लिए समझौता किया है।

ट्रंप से जुड़ी कंपनी का पाक से समझौता (फाइल फोटो)

ट्रंप से जुड़ी कंपनी का पाक से समझौता (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका की एक नई डिफेंस स्टार्ट-अप कंपनी पावरस ने हाल ही में पाकिस्तानी सेना के साथ एक समझौता किया है। इसके लिए बिना वाले हवाई सिस्टम के लिए शुरुआती ऑर्डर हासिल किया है।

हालांकि, फ्लोरिडा स्थित यह कंपनी महज एक साल पुरानी है। लेकिन पाकिस्तान के साथ इसका सौदा भारत-अमेरिका रणनीतिक संबंधों और दक्षिण एशियाई क्षेत्र के शक्ति संतुलन को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है।

यूक्रेनी तकनीक और भारत-पाक से जुड़ाव

पावरस के पास रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान विकसित की गई अग्रिम यूक्रेनी काउंटर-ड्रोन तकनीक गार्जियन का एक्सेस है। हैरान करने वाली बात यह है कि पावरस पहले से ही भारतीय रक्षा बाजार में सक्रिय है। जून में पावरस की सहायक कंपनी टैंडेम डिफेंस ने भारत की पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज को गार्जियन-1 काउंटर ड्रोन इंटरसेप्टर भारत में बनाने का लाइसेंस दिया था।

अब वही अमेरिकी कंपनी पाकिस्तान को यह तकनीक ट्रांसफर करने जा रही है। मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई संघर्ष में ड्रोन्स का इस्तेमाल हुआ था, इनकी अहम भूमिका भी रही थी। ऐसे में एक ही अमेरिकी कंपनी का दोनों दुश्मन देशों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाना असाधारण माना जा रहा है।

ट्रंप के परिवार के जुड़े तार

यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील है क्योंकि पावरस के संबंध अमेरिकी राष्ट्रपित डोनल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़े हैं। पावरस का हाल ही में ऑरियस ग्रीनवे होल्डिंग्स में विलय हुआ है, जिसमें ट्रंप जूनियर और एरिफ ट्रंप की अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 9.9 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

वहीं दूसरी ओर, इस सौदे को लेकर पाकिस्तान के अंदर भी असहजता देखी जा रही है। इसका कारण पावरस के को-फाउंडर जिव मारोम का पूर्व इजरायली रक्षा बल अधिकारी होना और कंपनी का इजरायल से कनेक्शन है। इसके बावजूद, चीन और तुर्किए पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए पाकिस्तान इसे अपने हथियार आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने का जरिया मान रहा है।

अमेरिका-पाकिस्तान हथियारों की बहाली का संकेत है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह समझौता अमेरिका और पाकिस्तान के बीच ठंडे बस्ते में पड़े रक्षा संबंधों की दोबारा बहाली की शुरुआत है। ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल दिसंबर में पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए 686 मिलियन डॉलर के स्पेयर पार्ट्स और तकनीक पैकेज को मंजूरी दी थी।

हालांकि किसी एक निजी कंपनी का सौदा सीधे तौर पर अमेरिकी विदेश नीति का बदलाव नहीं दर्शाता, लेकिन ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, सर्विलांस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसी आधुनिक तकनीकें पाकिस्तान को मिलने से उसकी सैन्य क्षमताएं मजबूत होंगी। भारत इस घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए है।