मानसून सत्र में शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर संकट, जेपीसी की बैठक स्थगित; आगे क्या होगा?
मानसून सत्र में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक के पारित होने पर संशय गहरा गया है, क्योंकि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक टीडीपी की आपत्ति क ...और पढ़ें
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HighLights
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक पर जेपीसी बैठक स्थगित।
टीडीपी ने धारा 47 पर आपत्ति जताई, संघीय ढांचे का उल्लंघन।
केंद्र को राज्य विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण की शक्ति पर विवाद।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उच्च शिक्षा को एक नियामक के दायरे में लाने के लिए प्रस्तावित विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक को भले ही सरकार संसद के मानसून सत्र में पारित कराने की तैयारी में है।
सोमवार को विधेयक से जुड़ी सिफारिशों को अंतिम रूप देने के लिए बुलाई गई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी)की बैठक के अचानक स्थगित कर दिए जाने से विधेयक के इस सत्र में पारित होने को लेकर संशय बढ़ गया है। वैसे भी जेपीसी की सिफारिशों के बगैर विधेयक को संसद में पेश भी नहीं दिया जा सकता है।
राज्यों की स्वायत्तता कतई प्रभावित नहीं होगी
उच्च शिक्षा से जुड़े इस विधेयक के स्वरूप को लेकर तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर आपत्ति जताते आ रहे है, हालांकि सरकार ने राज्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए साफ किया था, कि इससे राज्यों की स्वायत्तता कतई प्रभावित नहीं होगी।
सूत्रों की मानें तो जेपीसी इस मामले पर लंबी चर्चा के बाद सोमवार को विधेयक से जुड़ी सिफारिशों को अंतिम रूप देने की तैयारी थी। हालांकि इससे पहले ही एनडीए के अहम सहयोगी दल टीडीपी की आपत्ति आने के चलते बैठक को स्थगित कर दिया।
जेपीसी की अगली बैठक कब होगी?
साथ ही अभी यह भी तय नहीं किया है, कि विधेयक पर सिफारिशों को अंतिम रूप देने के लिए जेपीसी की अगली बैठक कब होगी। सूत्रों के मुताबिक टीडीपी ने विधेयक की धारा 47 पर आपत्ति जताई है। साथ ही यह कहा है कि इससे राज्य विश्वविद्यालयों पर केंद्र का सीधा नियंत्रण स्थापित हो सकता है जो संघीय ढांचे के खिलाफ है।
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गौरतलब है कि उच्च शिक्षा से जुड़े इस विधेयक को सरकार 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में लेकर आयी थी, हालांकि विपक्षी दलों के विरोध के बाद इसको तुरंत ही जेपीसी को भेज दिया गया था। ऐसे में जेपीसी को मानसून सत्र में ही विधेयक को लेकर अपनी सिफारिश भी देनी थी।
क्या कहती है विधेयक का धारा 47
विधेयक की धारा 47 केंद्र सरकार को यह शक्तियां देता है, वह विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान व उसके अधीन आने वाली परिषदों को राष्ट्रीय हितों या फिर अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहने पर कभी भी निलंबित या भंग कर सकती है। इस दौरान अधिष्ठान पर केंद्र सरकार का पूरा नियंत्रण रहेगा। निलंबन की यह अवधि भी शुरूआत में छह महीने तक रहेगी, जबकि इसे आगे भी छह महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है।