विवेक अग्निहोत्री के बयानों पर विहिप ने उठाए सवाल, कहा- हिंदू धर्म पर सवाल उठाने वाले कौन होते हैं
विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री के हिंदू धर्म पर हालिया टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए पूछा ...और पढ़ें

विवेक अग्निहोत्री के बयानों पर विहिप ने उठाए सवाल
HighLights
विहिप ने पूछा-क्यों वह अन्य धर्मों में अंधविश्वास पर टिप्पणी नहीं करते
राष्ट्रीय प्रवक्ता बंसल ने कहा-'धर्म कर' टिप्पणी के लिए माफी मांगें विवेक
पीटीआई, नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री के हिंदू धर्म पर हालिया टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए पूछा कि वह धर्म पर सवाल उठाने वाले कौन होते हैं और क्यों वह अन्य धर्मों में कथित अंधविश्वास और असंवैधानिक प्रथाओं पर इसी तरह की टिप्पणी नहीं करते।
विहिप ने फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री से धार्मिक स्थलों पर जाने वाले लोगों के संदर्भ में "धर्म कर" से संबंधित उनके बयान को वापस लेने और करोड़ों हिंदू श्रद्धालुओं की भावनाओं का ध्यान रखते हुए माफी मांगने का आग्रह किया।
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने बुधवार को एक्स पर पोस्ट में कहा कि अग्निहोत्री का यह अवलोकन कि लोगों को धर्म, विशेषकर हिंदू धर्म के बारे में "ज्ञान साझा नहीं करना चाहिए", क्योंकि "यहां सभी पहले से ही ज्ञानी हैं", फिल्म उद्योग के लोगों पर भी लागू होता है।
बंसल ने कहा, "आपके इस बयान से सभी सहमत हैं कि यहां कोई भी धर्म के बारे में, विशेषकर हिंदू धर्म के बारे में ज्ञान साझा नहीं करना चाहिए, क्योंकि सभी ज्ञानी हैं। लेकिन यह फिल्म जगत में डूबे लोगों पर भी समान रूप से लागू होता है।"
अपने नवीनतम पोस्ट में अग्निहोत्री ने भक्तों से "नम्र अनुरोध" किया कि वे इस प्लेटफार्म पर धर्म, विशेषकर हिंदू धर्म के बारे में ज्ञान साझा न करें, चूंकि "यहां सभी पहले से ज्ञानी हैं"।
अग्निहोत्री ने चार अक्टूबर को भी उत्तराखंड के कैंची धाम में भीड़ का एक वीडियो एक्स पर री-पोस्ट किया। इस पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा कि अगर सरकार धर्म पर कर लगा सके, तो भारत रातोंरात सबसे अमीर देश बन जाएगा। यह इसलिए नहीं कि लोग कर देंगे। बल्कि वे खुद अमीर बनने की कोशिश करेंगे, चमत्कारों की प्रतीक्षा करने के बजाय।"
अग्निहोत्री के अंधविश्वास और धार्मिक स्थलों पर रील बनाने के लिए इकट्ठा होने वाली भीड़ के संदर्भ पर बंसल ने पूछा कि क्या ऐसे प्रथाएं उन्हें "मजारों, मदरसों, चर्चों और उपचार सभाओं" में दिखाई नहीं देतीं।
उन्होंने कहा, "यदि नहीं, तो कृपया उन अनगिनत पीड़ितों से मिलें जिनका विश्वास, धर्म और सब कुछ इनसे प्रभावित हुआ है।"
उन्होंने कहा, "व्यक्ति को अपनी सीमाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए और जब धर्म के बारे में बात करें, तो विशेष रूप से यह महत्वपूर्ण है कि पहले सम्मानित संतों और विद्वानों से आवश्यक ज्ञान प्राप्त करें जो इस विषय के जानकार हैं।"
बंसल ने पोस्ट में कहा,"तीर्थ स्थल केवल पूजा के स्थान नहीं हैं; ये हमारी सभ्यता, संस्कृति, सामाजिक जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं से गहराई से जुड़े हैं।" बंसल ने कहा,"विवेक जी, आप ऐसे नहीं थे! इसलिए, सवाल उठता है: क्या किसी ने आपको ऐसा कहने के लिए प्रेरित किया है?"
