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गांधी परिवार से बाहर क्यों नहीं निकल पा रही कांग्रेस? सोनिया ने नेपोटिज्म के आरोप पर दिया जवाब

Published: Sat, 07 Nov 2026 08:43 PM (GMT+05:30)Updated: Sat, 07 Nov 2026 09:48 PM (GMT+05:30)

एक हालिया इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने कांग्रेस में गांधी परिवार के नियंत्रण और भाई-भतीजावाद के आरोपों पर सीधा जवाब देने से परहेज किया।

भाई-भतीजावाद पर सोनिया गांधी ने दिया जवाब (फोटो-ANI)

भाई-भतीजावाद पर सोनिया गांधी ने दिया जवाब (फोटो-ANI)

HighLights

  1. सोनिया गांधी ने कांग्रेस में भाई-भतीजावाद के आरोपों को टाला।

  2. 1975 के आपातकाल को इंदिरा गांधी की गलती बताया।

  3. यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार आरोपों पर मंत्रियों के इस्तीफे का जिक्र।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एक हालिया इंटरव्यू में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने पार्टी पर गांधी परिवार के लगातार नियंत्रण और भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) के आरोपों से जुड़े सवालों को टाल दिया। सोनिया गांधी ने कहा कि नेतृत्व से जुड़ा यह सवाल पार्टी से ही पूछा जाना चाहिए।

ब्रिटिश अखबार के साथ सोनिया गांधी का यह इंटरव्यू ऐसे समय में सामने आया है जब उनकी आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव' का एक संपादित अंश भी रिलीज होने वाला है।

नेपोटिज्म के सवाल पर साधी चुप्पी

इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी से यह सवाल किया गया कि कांग्रेस पार्टी गांधी परिवार के नेतृत्व के दायरे से बाहर क्यों नहीं निकल पा रही है, तो उन्होंने कहा कि आपको यह सवाल पार्टी से पूछना चाहिए। उन्होंने भाई-भतीजावाद से जुड़े आरोपों पर भी सीधा जवाब देने से बचते हुए गोलमोल टिप्पणी की।

उन्होंने कहा, हम सभी चुनाव लड़ते हैं; कभी जीतते हैं, तो कभी हारते हैं। हम सभी के साथ ऐसा हुआ है।

चुनावों में कांग्रेस की हार

कांग्रेस पार्टी लगातार चुनावी हार का सामना कर रही है और देश में बीजेपी की हिंदुत्व विचारधारा प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी को कई झटके लगे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी पर एक ही परिवार का वर्चस्व रहने के कारण कांग्रेस के लिए नेपोटिज्म और एलीट नेतृत्व के आरोपों से पीछा छुड़ाना बेहद मुश्किल हो गया है। इसके बावजूद सोनिया गांधी का मानना है कि कांग्रेस आज भी बीजेपी के एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभरने का माद्दा रखती है।

वहीं, जब उनसे 2014 तक एक दशक तक सत्ता में रही यूपीए सरकार के कार्यकाल और उस दौरान लगे भ्रष्टाचार के विवादों पर सवाल किया गया, तो उन्होंने बचाव की मुद्रा अपनाते हुए कहा कि लगभग हर मामले में संबंधित मंत्रियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

इमरजेंसी को बताया इंदिरा की गलती

सोनिया गांधी ने साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल पर भी खुलकर बात की। सोनिया गांधी ने इस ऐतिहासिक कदम को एक गलती करार दिया और बताया किया कि उनका मानना है कि बाद में खुद इंदिरा गांधी भी इस बात को महसूस करने लगी थीं।

उन्होंने स्वीकार किया, मुझे पता है कि कई लोग इस बात पर हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि इमरजेंसी के दौरान वह कभी सहज नहीं थीं। मुझे लगता है कि यह उनके मन पर एक भारी बोझ की तरह था। सोनिया ने यह भी खुलासा किया कि इस फैसले को लेकर गांधी परिवार के भीतर गंभीर मतभेद और तनाव पैदा हो गए थे।

राजीव गांधी ने किया था विरोध

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इंदिरा गांधी के इस कदम का कड़ा विरोध किया था और अपनी मां को अगले चुनाव तक इंतजार करने की सलाह दी थी। इसके विपरीत, उनके छोटे बेटे संजय गांधी विपक्ष के खिलाफ और ज्यादा आक्रामक और सख्त रुख अपनाने पर अड़े हुए थे।

परिवार के साथ एक डिनर के दौरान संजय ने इंदिरा गांधी को चेताया था कि विपक्ष उन्हें पूरी तरह बर्बाद कर देगा, और कहा था, उन्हें रोकना ही होगा।

सोनिया के अनुसार, संजय गांधी का यह प्रभाव परिवार के भीतर तनाव की बड़ी वजह बना था। यदि उस समय संजय गांधी पर लगाम कसी गई होती, तो देश और परिवार को बाद में उठाने पड़े नुकसान से बचाया जा सकता था।

पारिवारिक त्रासदियों और हत्याओं को किया याद

सोनिया गांधी ने अपने जीवन के सबसे दर्दनाक पलों, 1984 में इंदिरा गांधी और 1991 में राजीव गांधी की हत्या के सदमे का भी खुलकर जिक्र किया। उनकी बेटी प्रियंका गांधी भी इस बातचीत में साथ थीं।

उन्होंने 1984 के उस खौफनाक दिन को याद किया जब इंदिरा गांधी को उनके ही दो अंगरक्षकों ने गोलियों से भून दिया था। आतिशबाजी जैसी आवाजें सुनने के बाद जब वह मौके पर पहुंचीं, तो उन्होंने अपनी सास को खून से लथपथ और गोलियों के निशानों से छलनी पाया। अस्पताल ले जाने के दौरान उन्होंने इंदिरा गांधी को होश में लाने की पूरी कोशिश की थी।

उस सफर को बेहद कष्टदायक बताते हुए उन्होंने कहा, हर तरफ खून ही खून था, और मुझे एहसास हुआ कि वह मेरे सवालों का कोई जवाब नहीं दे रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे वह अब इस दुनिया में नहीं रहीं। इस घटना के बाद आए लंबे अवसाद और मानसिक आघात को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह उस दौरान एक भूत की तरह जीवन जी रही थीं।

इसके अलावा, उन्होंने 1991 में अपने पति राजीव गांधी की हत्या के बाद खुद को संभालने की जद्दोजहद और उस कठिन दौर में परिवार द्वारा झेले गए निजी दुखों को भी साझा किया।

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