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    मनु सिंघवी की तीखी बहस, कोर्ट ने कहा- दलीलें स्वीकार लेते, लेकिन... SC ने क्यों खारिज की मीनाक्षी नटराजन की याचिका?

    Updated: Fri, 12 Jun 2026 09:39 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा नामांकन खारिज करने के खिलाफ याचिका खारिज कर दी। ...और पढ़ें

    सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मीनाक्षी नटराजन की याचिका

    सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मीनाक्षी नटराजन की याचिका

    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की।

    2. राज्यसभा नामांकन खारिज करने के खिलाफ थी याचिका।

    3. चुनाव याचिका दाखिल करने की छूट दी गई।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने नामांकन खारिज करने के रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को चुनौती देने वाली मीनाक्षी नटराजन की याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।

    अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्हें जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत चुनाव याचिका दाखिल करने की छूट दी है।

    जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एएस चंदुरकर की पीठ ने नटराजन के वकील अभिषेक मनु सिंघवी, प्रतिपक्षी वकील मुकुल रोहतगी, कनु अग्रवाल, चुनाव आयोग की ओर से पेश डीएस नायडू व मध्य प्रदेश सरकार की ओर से तुषार मेहता की दलीलें सुनने की बाद सुनवाई से इनकार कर दिया।

    अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 33A कहती है कि दो साल से अधिक सजा वाले अपराध या जिन आपराधिक मामलों में अदालत ने आरोप तय कर दिये हों, उनका ब्योरा हलफनामे में देना होगा।

    जिस केस की जानकारी नहीं देने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन रद किया है, उसमें अदालत से आरोप तय नहीं हुए हैं। न ही अदालत ने संज्ञान लिया है। अभी कोर्ट ने एक निजी शिकायत पर उन्हें सिर्फ समन जारी किया है।

    कोर्ट ने कहा कि अगर सिंघवी की दलीलें स्वीकार की जाती हैं, तो इसका मतलब है कि जिन मामलों में नामांकन खारिज होने में स्पष्ट गलती है तो कोर्ट उन्हें अनुच्छेद 32 और 226 के तहत दाखिल याचिकाओं में सुन सकता है और जहां नामांकन खारिज होना पहली निगाह में स्पष्ट तौर पर उतना गलत नहीं है उन्हें चुनाव याचिकाओं के लिए भेज दिया जाए।

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    ऐसा करने का मतलब है कि कोर्ट एक ऐसा सिद्धांत तय कर रहा है, जिसका जिक्र अनुच्छेद 329 में नहीं है। इस व्याख्या को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। यह कहते हुए कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

    हालांकि, कोर्ट ने नटराजन को चुनाव याचिका दाखिल करने की छूट देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अदालत ने केस की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

    सभी लंबित आपराधिक मामलों का ब्योरा देना जरूरी

    मध्य प्रदेश से निर्विरोध चुने गए भाजपा सांसदों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव लड़ना विधायी अधिकार है। यह कोई मौलिक अधिकार नहीं है।

    ऐसे में अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकता, क्योंकि अनुच्छेद 32 के तहत याचिका मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर दाखिल की जाती है। ऐसी किसी भी याचिका पर सुनवाई करने पर अनुच्छेद 329 स्पष्ट रूप से रोक लगाता है।

    नियम के मुताबिक हलफनामे में सभी लंबित आपराधिक मामलों का ब्योरा देना होता है। सिर्फ उन मामलों का नहीं, जिनमें आरोप तय हुए हों।

    नामांकन रद होने पर चुनाव आयोग से संपर्क करना एकमात्रा रास्ता

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब रिटर्निंग ऑफिसर किसी उम्मीदवार का नामांकन रद कर देता है, तो चुनाव आयोग से संपर्क करना ही एकमात्र रास्ता है।

    फैसला चाहे कितना भी गलत क्यों न हो, एक बार नामांकन रद हो जाने पर आम तौर पर समाधान कहीं और ही होता है। क्या इस अदालत का कोई ऐसा फैसला है, जिसमें हमने इस चरण में दखल दिया हो?

    यह है मामला

    रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उन्होंने नामांकन के साथ दिए गए फार्म 26 के हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में उनके खिलाफ लंबित निजी शिकायत का ब्योरा नहीं दिया था।

    नटराजन ने पहले इस संबंध में चुनाव आयोग को ज्ञापन दिया। जब चुनाव आयोग से कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी।

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