Odisha Flood: ओडिशा के उत्तरी जिलों में बाढ़ का खतरा, जलका और बुढ़ाबलंग नदियां उफान पर; 50 से अधिक गांवों पर खतरा
बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव के कारण ओडिशा के उत्तरी जिलों में भारी बारिश से बाढ़ का खतरा बढ़ ...और पढ़ें

ओडिशा के उत्तरी जिलों में बाढ़ का खतरा
HighLights
उत्तरी ओडिशा में भारी बारिश से बाढ़ की आशंका बढ़ी।
जलका और बुढ़ाबलंग नदियां खतरे के निशान पर।
बालेश्वर-मयूरभंज के 50 से अधिक गांव प्रभावित।
जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से ओडिशा के उत्तरी जिलों में लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ की आशंका बढ़ा दी है। बालेश्वर जिले में जलका नदी खतरे के निशान तक पहुंच गई है, जबकि मयूरभंज जिले में बुढ़ाबलंग नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है।
जानकारी के अनुसार, बालेश्वर जिले के बस्ता ब्लॉक स्थित मथानी में जलका नदी का जलस्तर मंगलवार सुबह छह बजे खतरे के निशान 6.50 मीटर तक पहुंच गया। पिछले दो दिनों से बालेश्वर और मयूरभंज के ऊपरी इलाकों में हुई भारी बारिश के कारण नदी में पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा है।
50 से अधिक गांव प्रभावित
रासगोविंदपुर, मोरडा, सुलियापदा और चित्रदा क्षेत्रों में हुई तेज वर्षा से स्थिति और गंभीर हो गई है। प्रशासन का कहना है कि यदि जलका नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो बस्ता ब्लॉक की लगभग 10 ग्राम पंचायतों के 50 से अधिक गांव प्रभावित हो सकते हैं।
दूधहंसा, बहरदा, नटकटा, ब्रह्मांडा, मथानी और बरुनागड़िया पंचायतों में बाढ़ का खतरा सबसे अधिक माना जा रहा है। बालेश्वर सदर ब्लॉक की दो पंचायतों पर भी संकट मंडरा रहा है। बाढ़ की स्थिति बनने पर बड़ी मात्रा में कृषि भूमि और खड़ी फसलें जलमग्न हो सकती हैं।
कई निचले इलाकों में जलभराव की समस्या
उधर, मयूरभंज जिले में बुढ़ाबलंग नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है। बारीपदा में नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। शहर के वार्ड संख्या सात और आठ सहित कई निचले इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई है। एहतियात के तौर पर कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए हैं, जबकि प्रशासन ने लोगों को बाढ़ आश्रय केंद्रों में पहुंचाना शुरू कर दिया है।
बारीपदा, बांगिरीपोसी, कुलियाना, बिसोई और जशीपुर क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश से नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। इस बीच, झारखंड स्थित गलूडीह बैराज के नौ गेट खोले जाने के बाद सुवर्णरेखा नदी के जलस्तर पर भी प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।
राज्य प्रशासन ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को सतर्क रहने और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव की तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं।
