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पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं दिया तो कट जाएगी सैलरी, ओडिशा में सरकारी कर्मचारियों के लिए नया नियम

Updated: Mon, 31 Aug 2026 09:29 AM (IST)

ओडिशा सरकार ने अदालत के आदेश के बावजूद गुजारा-भत्ता न देने वाले सरकारी कर्मचारियों के वेतन से सीधे कटौती कर पत्नी/बच्चों के खाते में भेजने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री मोहन माझी। फाइल फोटो

मुख्यमंत्री मोहन माझी। फाइल फोटो

HighLights

  1. अदालत के आदेश पर वेतन से कटेगा गुजारा-भत्ता।

  2. मुख्यमंत्री मोहन माझी ने दिए सख्त निर्देश।

  3. HRMS से जुड़ेगा गुजारा-भत्ता भुगतान का मामला।

जागरण संवाददाता, भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने अलग रह रही पत्नी और बच्चों को अदालत के आदेश के बावजूद गुज़ारा भत्ता (एलिमनी) नहीं देने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर अब ऐसे कर्मचारियों के वेतन से बकाया गुज़ारा भत्ता सीधे काटकर संबंधित पत्नी या बच्चों के बैंक खाते में जमा कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की ओर से रविवार को जारी बयान में कहा गया कि राज्य सरकार अदालत के आदेशों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू कर रही है।

इसके तहत यदि कोई सरकारी कर्मचारी न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद गुज़ारा भत्ता देने में लापरवाही करता है, तो उसकी मासिक सैलरी से निर्धारित राशि स्वतः काट ली जाएगी।

लगातार आ रही थी शिकायतें

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि राज्य के खजाने से वेतन पाने वाले कर्मचारियों द्वारा अपने जीवनसाथी और बच्चों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेशों का सम्मान और परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाना प्रत्येक सरकारी कर्मचारी का कर्तव्य है।

जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं, जिनमें महिलाओं ने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद उन्हें गुज़ारा भत्ता नहीं मिल रहा है।

सीएमओ के मुताबिक, लगभग हर जनसुनवाई में दो से तीन ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है।

डीडीओ करेगा कटौती

नई व्यवस्था के तहत संबंधित विभाग का ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) अदालत का आदेश प्राप्त होने के बाद कर्मचारी के वेतन बिल से निर्धारित राशि काटेगा और उसे सीधे लाभार्थी के खाते में स्थानांतरित करेगा। इससे लंबी प्रक्रिया और अनावश्यक देरी से राहत मिलने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों को राज्य के केंद्रीकृत मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) से भी जोड़ा जाए। इससे वेतन कटौती और भुगतान की प्रक्रिया स्वचालित हो सकेगी तथा अदालत के आदेशों के अनुपालन में पारदर्शिता और तेजी आएगी।

सरकार के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से न्यायालय के आदेश के बावजूद आर्थिक सहायता से वंचित थे।

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