भुवनेश्वर में चॉकलेट से बनी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की 100 किलो की प्रतिमा, 15 कलाकारों ने 3 दिनों में बनाया
विश्व पखाल दिवस पर भुवनेश्वर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की 100 किलोग्राम की चॉकलेट प्रतिमा बनाई गई है। 'चॉकलेट क्लब' ने शेफ राकेश साहू के नेतृत्व म ...और पढ़ें

द्रौपदी मुर्मु की 100 किलो की प्रतिमा

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जागरण टीम, बालेश्वर/अनुगुल। विश्व पखाल दिवस के अवसर पर ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में इस बार कुछ खास देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चॉकलेट प्रतिमा के बाद अब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की 100 किलोग्राम वजनी भव्य चॉकलेट प्रतिमा तैयार की गई है, जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
भुवनेश्वर के भोमिखाल स्थित ‘चॉकलेट क्लब’ द्वारा तैयार की गई यह जीवन-आकार (लाइफ साइज) प्रतिमा पूरी तरह चॉकलेट से बनाई गई है। इस अनूठी कलाकृति को तैयार करने में शेफ राकेश साहू और रंजन परिदा के नेतृत्व में 15 कलाकारों की टीम ने लगातार तीन दिनों तक कड़ी मेहनत की।
कलाकारों ने बारीकी से राष्ट्रपति मुर्मु के चेहरे के भाव, व्यक्तित्व और गरिमा को उकेरने का प्रयास किया है, जिससे प्रतिमा बेहद जीवंत नजर आती है।
15 दिनों से चल रही थी प्लानिंग
शेफ राकेश साहू बताते हैं कि इस पूरे प्रोजेक्ट की प्लानिंग पिछले 15 दिनों से चल रही थी, ताकि देश की प्रथम नागरिक को एक यादगार सलमाी दी जा सके।कलाकारों का कहना है कि इस प्रतिमा को केवल एक कला के रूप में नहीं, बल्कि ओडिशा की बेटी और देश की प्रथम नागरिक को सम्मान देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मू का संघर्षपूर्ण जीवन, सादगी और आदिवासी समाज से जुड़ी उनकी जड़ें इस कृति की प्रेरणा रही हैं।
इस चॉकलेट प्रतिमा को विश्व पखाल दिवस के मौके पर प्रदर्शित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों में भी उत्साह देखा जा रहा है। लोग बड़ी संख्या में इस अनोखी कलाकृति को देखने पहुंच रहे हैं और इसके साथ तस्वीरें भी खिंचवा रहे हैं।
‘पखाल भात’ को समर्पित विशेष दिन
गौरतलब है कि पाखाल दिवस ओडिशा के पारंपरिक व्यंजन ‘पखाल भात’ को समर्पित एक विशेष दिन है, जिसे हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन राज्यभर में पारंपरिक भोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रचनात्मक आयोजनों के जरिए ओडिशा की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित किया जाता है।

इसी कड़ी में चॉकलेट से बनी राष्ट्रपति मुर्मु की यह प्रतिमा न सिर्फ कला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि यह ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को भी नए अंदाज में प्रस्तुत कर रही है।
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