शांत मन से एशियाई खेलों की तैयारी कर रही हूं: मीराबाई चानू
राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक की हैट्रिक लगाने वाली मीराबाई चानू 19 सितंबर से शुरू हो रहे एशियाई खेलों के ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
शेखर झा, जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक की हैट्रिक लगाने वाली भारतीय महिला भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने 19 सितंबर से होने वाले एशियाई खेलों के लिए कमर कस ली है। ओलिंपिक और राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीत चुकीं चानू की नजर एशियाई खेलों में पदक जीतने पर है। 2022 में पदक से चूकने के बाद वह इस बार तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। मीराबाई चानू से शेखर झा ने विशेष बातचीत की।
पेश है प्रमुख अंश:-
सवाल: एशियाई खेलों की तैयारी अभी किस चरण में है और ट्रेनिंग में किन पहलुओं पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही हैं?
मीराबाई चानू - मेरी तैयारी बहुत ही सही दिशा में आगे बढ़ रही है। इस समय मेरा पूरा फोकस रोज की ट्रेनिंग पर है और मैं अपनी तरफ से सौ प्रतिशत मेहनत कर रही हूं। मैं पूरी तरह से इंजरी-फ्री और फिट हूं, इसलिए मेरा ध्यान बस अपनी लिफ्ट्स को और बेहतर बनाने पर है। मैं उम्मीद करती हूं कि मैं अपनी इस तैयारी से अपने देश के लिए अच्छा कर सकूं।
सवाल: 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद आत्मविश्वास कितना बढ़ा है? क्या उस प्रदर्शन को एशियाई खेलों में भी दोहराने का भरोसा है?
मीराबाई चानू - राष्ट्रमंडल खेलों का वह पल मेरे लिए बहुत खास था। देश का तिरंगा ऊपर जाते देखना हमेशा एक अलग ही गर्व और आत्मविश्वास देता है। एशियाई खेलों के लिए भी मेरा भरोसा मजबूत है। मैं अपनी तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ रही हूं और देश के लिए मंच पर अपना 100 प्रतिशत देने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।
सवाल: 2022 एशियाई खेलों में आप पदक से चूक गई थीं। उस अनुभव ने आपको क्या सिखाया और इस बार उसमें क्या बदलाव करना चाहती हैं?
मीराबाई चानू - हर प्रतियोगिता हमें कुछ न कुछ सिखा कर जाती है। पुराना अनुभव चाहे जैसा भी रहा हो, वह बीत चुका है। आज मैं पूरी तरह इंजरी-फ्री हूं, बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं और सिर्फ अपने वर्तमान पर ध्यान दे रही हूं। मेरा लक्ष्य बस यही है कि मैं इस बार भी अपने देश का नाम रोशन कर सकूं और अपनी पूरी ताकत से देश के लिए अपना कर्तव्य निभाऊं।
सवाल: एशियाई खेलों में पिछली बार पदक से चूकने की याद इस बार दबाव बढ़ाएगी या आपको बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी?
मीराबाई चानू - मैं दबाव के बारे में बिल्कुल नहीं सोचती, मेरा ध्यान सिर्फ सकारात्मक बातों पर रहता है। जब भी मैं देश के लोगों का प्यार और समर्थन देखती हूं तो मुझे और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है। मैं किसी पुरानी बात का दबाव लिए बिना, बिल्कुल शांत मन से अपनी तैयारी कर रही हूं।
सवाल: आपके करियर में ओलिंपिक और विश्व चैंपियनशिप सहित कई बड़ी उपलब्धियां हैं। एशियाई खेलों का पदक अब भी आपके लिए कितना खास है?
मीराबाई चानू - हर वह मंच जहां मुझे भारत की जर्सी पहनकर उतरने का मौका मिलता है, वह मेरे लिए बेहद खास है। चाहे ओलंपिक हो या एशियाई खेल, देश का प्रतिनिधित्व करना हमेशा एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। मेरी बस यही इच्छा और उम्मीद रहती है कि मैं हर बड़े मंच पर अपने देश के लिए अच्छा कर सकूं।
सवाल: उम्र और लंबे करियर के इस पड़ाव पर ट्रेनिंग के तरीके में क्या बदलाव आया है। रिकवरी और फिटनेस पर कितना ध्यान देना पड़ता है?
मीराबाई चानू - मेरी फिटनेस बहुत अच्छी है और भगवान की दया से मैं पूरी तरह चोट मुक्त होकर अपनी नियमित अभ्यास कर रही हूं। हमारे कोच और सपोर्ट स्टाफ ने मेरी तैयारियों का जो शेड्यूल बनाया है, वह बहुत बेहतरीन है। मैं बस अपनी रोज की दिनचर्या और ट्रेनिंग पर ध्यान दे रही हूं, ताकि देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकूं।
सवाल: प्रतियोगिता के दौरान मानसिक दबाव को संभालने के लिए आपकी तैयारी कैसी रहती है। खासकर जब पूरे देश की उम्मीदें आपसे जुड़ी हों?
मीराबाई चानू - पूरे देश की उम्मीदें और करोड़ों लोगों की दुआएं मेरे लिए कोई दबाव नहीं, बल्कि मेरा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच हैं। जब मैं पोडियम पर जाती हूं तो बस यही सोचती हूं कि मुझे अपने देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करना है। सकारात्मक सोच और ईश्वर पर भरोसा ही मुझे मानसिक रूप से मजबूत रखता है। मैं अपना 100 प्रतिशत देने के इरादे से ही आगे बढ़ती हूं।
सवाल: एशियाई खेलों में पदक जीतने के लिए आपके हिसाब से सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या होगी तकनीक, फिटनेस, मानसिक मजबूती या सही रणनीति?
मीराबाई चानू - मेरे हिसाब से खेल में यह सभी चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी होता है देश के लिए कुछ करने का जज्बा। इस समय मैं शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं और चोट मुक्त हूं। मेरा मानना है कि अगर हमारी तैयारी सही हो और हम अपना 100 प्रतिशत दें तो बाकी सब अपने आप सही हो जाता है। मुझे उम्मीद है कि मैं देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ कर पाऊंगी।
