Sports Budget 2026: भारत ओलंपिक और कॉमनवेल्थ का मैदान मारने को भी तैयार
मोदी सरकार ने 'खेलो इंडिया मिशन' की घोषणा कर खेल बजट में भारी वृद्धि की है। युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय का बजट 4479.88 करोड़ रुपये हो गया है। इसका उद ...और पढ़ें

स्पोर्ट्स बजट 2026
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: दुनिया भर में खेलों के प्रति बढ़ती जा रही दीवानगी इस क्षेत्र को भी न सिर्फ राष्ट्र गौरव, बल्कि नए उद्योग क्षेत्र और रोजगार की संभावनाओं के रूप में सामने लेकर आई है। अब तक खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से देश में खेलों के प्रति माहौल बनाने के लिए प्रयास कर रही मोदी सरकार ने अब इस दिशा में मिशन मोड पर काम करने का इरादा जताते हुए ''''खेलो इंडिया मिशन'''' की घोषणा बजट से की है।
युवा मामलों एवं खेल मंत्रालय के बजट में कुल 1133.34 करोड़ रुपये की वृद्धि करते हुए जिस तरह पहली बार स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग के प्रोत्साहन के लिए नई योजना सहित नए कोच और सहायक कर्मचारी तैयार करने को एजेंडे में रखा गया है, उससे साफ संदेश मिलता है कि यह भारत को अगले कॉमनवेल्थ और ओलंपिक खेलों के लिए तैयार करने की दिशा में कदम है। पिछले वर्ष मंत्रालय का संशोधित बजट 3346.54 करोड़ था, जो कि वर्ष 4479.88 करोड़ कर दिया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बयान
बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि खेलकूद क्षेत्र कई प्रकार के रोजगार, कौशल और नौकरी के अवसर उपलब्ध कराता है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से चल रहे खेलकूद से जुड़ी प्रतिभाओं के व्यवस्थित विकास के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए अगले एक दशक में खेलकूद के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू किया जा रहा है। एक दशक का लक्ष्य भारत को सीधे तौर पर मेजबान के रूप में 2036 में प्रस्तावित ओलंपिक खेलों की तैयारी से जोड़ता है।
इस बजट में खेलो इंडिया मद में वर्ष 2025-26 के संशोधित बजट 700 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 924.35 करोड़ रुपये कर दिया है। सरकार का दावा है कि इस मिशन के तहत प्रशिक्षण केंद्रों पर आधारभूत, माध्यमिक और एलीट स्तर पर प्रतिभा विकास का पाथवे तैयार किया जाएगा। कौशल विकास कर कोच और सहायक कर्मचारियों का व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाएगा।
2030 में भारत में कॉमनवेल्थ
खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण, खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और प्लेटफार्म उपलब्ध कराने के लिए प्रतिस्पर्धा और लीग का आयोजन किया जाएगा। साथ ही प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा के लिए खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा। इसके अलावा ग्लासगो में इसी वर्ष जुलाई-अगस्त में कॉमनवेल्थ गेम्स होने हैं, जबकि भारत की मेजबानी में राष्ट्रमंडल खेल वर्ष 2030 में प्रस्तावित हैं, इसलिए इसके प्रति भी गंभीरता दिखाई दी है।
कॉमनवेल्थ की वजह से बढ़ा बजट
कॉमनवेल्थ की मदद में बजट को 28.05 करोड़ से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दिया गया है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी आफ इंडिया का बजट भी 880 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 917.38 करोड़ रुपये किया गया है। खेल गतिविधियों के साथ ही सरकार इस क्षेत्र को उभरते उद्योग क्षेत्र में भी देखती है, इसलिए पहली बार स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग के प्रोत्साहन की घोषणा करते हुए इसके लिए 500 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।
इस योजना का लाभ मेरठ सहित उन शहरों को होगा, जहां स्पोर्ट्स गुड इंडस्ट्री लंबे समय से चल रही है और उसके विकास की तमाम संभावनाएं भी हैं। उल्लेखनीय है कि खेलों के क्षेत्र में कौशल विकास के प्रयास कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की ओर से भी शुरू किए जा चुके हैं। मंत्रालय स्पोर्ट्स स्किल्स के पाठ्यक्रम बनाने की तैयारी कर रहा है।
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