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    कांग्रेस के 'कॉम्प्रोमाइज' वाले बयान पर भाजपा का पलटवार, BJP ने लगाए कई आरोप

    Updated: Fri, 27 Feb 2026 09:18 PM (IST)

    भाजपा ने 'कम्प्रोमाइज्ड पीएम' आरोपों पर कांग्रेस पर पलटवार किया है। प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इंदिरा गांधी के कार्यकाल में विदेशी एजेंसियों से धन ल ...और पढ़ें

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    भाजपा का गंभीर आरोप- कांग्रेस ने विदेशी एजेंसियों से पैसा लेकर किए समझौते (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाते हुए 'कम्प्रोमाइज्ड पीएम' के पोस्टर लहरा रही कांग्रेस पर पलटवार करते हुए भाजपा ने अब कांग्रेस शासनकाल के पुराने पन्ने श्रंखलाबद्ध रूप से पलटकर उसे कठघरे में खड़ा करने का प्रयास तेज कर दिया है।

    भारत के हितों से समझौते को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कई प्रसंगों का उल्लेख कर चुकी भाजपा ने शुक्रवार को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को निशाने पर ले लिया।

    सुधांशु त्रिवेदी का आरोप

    पार्टी प्रवक्ता एवं सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने गंभीर आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल के दौरान विदेशी एजेंसियों से पैसा लेकर कई बार 'कम्प्रोमाइज' किया और कई पुस्तकों में दर्ज इन बातों का कांग्रेस ने अब तक खंडन क्यों नहीं किया?

    कई संदर्भों का उल्लेख करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि कांग्रेस के कम्प्रोमाइज से देश का कैलेंडर भरा पड़ा है। डा. सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि ब्रिटिश इतिहासकार पाल मैकगैर की पुस्तक ''स्पाइंग इन साउथ एशिया: ब्रिटेन, यूनाइटेड स्टेट्स, इंडिया एंड द सीक्रेट कोल्ड वार'' में लिखा है कि इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भारतीय व्यवस्था का ऐसा कोई हिस्सा नहीं था, जो उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए की पहुंच से बाहर न रहा हो।

    उन्होंने अमेरिका के पूर्व राजदूत डेनियल पैट्रिक मायनिहान की 1978 में प्रकाशित संस्मरण पुस्तक ''ए डेंजरस प्लेस'' का हवाला देते हुए कहा कि उनकी जानकारी में सीआइए ने दो अवसरों पर भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप किया था।

    पुस्तक में क्या-क्या है?

    पुस्तक में यह भी उल्लेख है कि सीआईए द्वारा तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस को धन उपलब्ध कराया गया और एक प्रसंग में इस बात का भी उल्लेख है कि वह धन सीधे तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष के रूप में इंदिरा गांधी को दिया गया। भाजपा सांसद ने कहा कि एक सबसे बड़ा कम्प्रोमाइज यह भी किया गया कि 1971 की उस ऐतिहासिक विजय को कैसे राजनीति की कूटनीति की मेज पर पराजय में तब्दील कर दिया गया।

    युद्ध में सफलता के बावजूद 93,000 पाकिस्तानी युद्धबंदियों को वापस कर दिया गया, जबकि भारत के 54 सैनिकों की वापसी सुनिश्चित नहीं हो सकी। साथ ही पाकिस्तान के कब्जे वाले लगभग 30,000 वर्ग मील क्षेत्र की वापसी नहीं हुई, जबकि पश्चिमी पाकिस्तान का लगभग 2,500 से 3,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, जो भारतीय नियंत्रण में था, उसे लौटा दिया गया। यह कौन सा कम्प्रोमाइज था और किस आधार पर यह निर्णय लिया गया था?

    सुधांशु त्रिवेदी ने कटाक्ष किया कि कांग्रेस को आधा नग्न तो राहुल गांधी ने स्वयं कर लिया था और बाकी इज्जत उनके सलाहकार किताबें लाकर उतरवा देंगे। कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि ''करोगे याद तो हर बात याद आएगी, गुजरते वक्त की हर किताब निकल आएगी।''

    भाजपा ने यह भी लगाए आरोप

    • मित्रोखिन आर्काइव्स में केजीबी के संदर्भ में लिखा है कि सोवियत पोलित ब्यूरो की ओर से 1976 में कांग्रेस को पहले 20 लाख रुपये और बाद में 10 लाख रुपये दिए गए।
    • केजीबी के प्रभाव में कांग्रेस ने ''कम्प्रोमाइज'' करके भारत के रुपये की विनिमय दर रूबल के संदर्भ में बढ़ाकर 8.33 से 10 कर दी थी, ताकि सोवियत संघ से अधिक आयात हो सके और उसकी कीमत भारत के लोगों को चुकानी पड़े।
    • 1977 में कांग्रेस की हार के बाद मास्को में इस विषय पर बैठक हुई कि केजीबी के इतने प्रयासों के बावजूद इंदिरा गांधी की पराजय क्यों हुई।
    • अमेरिका के परमाणु विश्लेषक रिचर्ड बार्लो ने अपनी किताब में लिखा है कि 1980 के दशक में पाकिस्तान के कहुटा परमाणु रिएक्टर को नष्ट करने के लिए एक प्रस्ताव आया था, जिसमें इजराइल सहयोग के लिए तैयार था, लेकिन इंदिरा गांधी इसके लिए तैयार नहीं हुईं।
    • येवगेनिया अल्बेट्स की पुस्तक ''स्टेट विद इन स्टेट'' में केजीबी की ओर से कांग्रेस की फर्स्ट फैमिली को दिए गए धन के संबंध में लेटर नंबर और रेजोल्यूशन नंबर तक लिखे हैं।

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