मालदा की आजादी के नायक शिबेंदु राय: PM मोदी ने याद किया वह संघर्ष जिसने पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को बंगाल के मालदा जिले में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। यहां उनको स्वतंत्रता सेनानी शिबेंदु शेखर राय का ए ...और पढ़ें

मालदा में शिबेंदु के आंदोलन के बाद लहराया था तिरंगा- पीएम मोदी (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, सिलीगुड़ी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को बंगाल के मालदा जिले में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करने पहुंचे। यहां उनको स्वतंत्रता सेनानी शिबेंदु शेखर राय का एक चित्र सौंपा गया।
पीएम ने अपने भाषण की शुरुआत में सबसे पहले शिबेंदु शेखर राय का ही नाम लिया और कहा कि उनकी वजह से मालदा आज भारत का हिस्सा है। इसके साथ ही शिबेंदु शेखर राय का नाम एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली लेकिन बंगाल का मालदा पाकिस्तान में चला गया।
वर्तमान का बांग्लादेश उस समय पूर्वी पाकिस्तान था। आजादी की घोषणा के साथ ही मालदा के प्रशासनिक मुख्यालय पर पाकिस्तानी झंडा लहराने लगा। पूरे जिले में पाकिस्तान सेना की बूट की धमक सुनाई देने लगी।
उस समय पाकिस्तानी सेना को खान सेना कहा जाता था। खान सेना की बूट की धमक से मालदा के लोग डरे हुए थे। यहां काफी संख्या में हिंदू थे और वह नहीं चाहते थे कि मालदा पाकिस्तान में जाए।
आखिरकार भारत में ही रहने की मांग को लेकर पूरे जिले में आंदोलन हुआ। शुबेंदु शेखर राय ने इस आंदोलन की अगुवाई की। आखिरकार पाकिस्तान को मालदा से अपना कब्जा छोड़ना पड़ा।
आजादी के तीन दिन बाद 18 तारीख को फैसला हुआ कि मालदा जिले के 10 थाना क्षेत्र भारतीय सीमा में रहेंगे। चंपई नवाबगंज समेत पांच थानों को पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया। यह फैसला होते ही जिला मुख्यालय पर पाकिस्तानी झंडे को उतार दिया गया और वहां शान से तिरंगा लहराने लगा।
शिबेंदु के पुत्र अभी तृणमूल के राज्यसभा सदस्य
शिबेंदु शेखर शुरू से ही स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हुए थे। 1905 से 1947 तक चले विरोध आंदोलनों से भी जुड़े रहे। वह बंगाल विभाजन के खिलाफ 1905 के स्वदेशी आंदोलन से लेकर आजादी की लड़ाई तक सक्रिय रहे। शिबेंदु के पुत्र शुखेंदु शेखर अभी तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं। वह मालदा के ही मूल निवासी हैं।
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