Trending

    loading ads...
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    2022 में 7 नई सीटों के बाद अब फिर बदल सकता है जम्मू-कश्मीर का चुनावी नक्शा, परिसीमन बिल पर सबकी नजर

    By Naveen NawazEdited By: Rahul Sharma
    Updated: Fri, 17 Apr 2026 01:20 PM (IST)

    केंद्र सरकार का नया परिसीमन बिल जम्मू-कश्मीर में 1947 के बाद छठी बार और केंद्र शासित प्रदेश के लिए दूसरा परिसीमन ला सकता है। 2022 में सात नए विधानसभा ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    केंद्र का परिसीमन बिल पास हुआ तो 1947 के बाद छठी बार, केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में दूसरी बार होगा परिसीमन।

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र सरकार द्वारा लाया गया परिसीमन बिल अगर पारित हो जाता है तो फिर जम्मू कश्मीर में वर्ष 1947 के बाद छठी बार परिसीमन होगा, लेकिन केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में यह दूसरा परिसीमन होगा।

    आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 के तहत 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर राज्य दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में पुनर्गठित हुआ है। पुनर्गठन के बाद अस्तित्व मेंआए केंद्र शासित जम्मू कश्मीर प्रदेश में पहला परिसीमन  2020 में शुरु हुआ था जो वर्ष 2022 में संपन्न हुआ था और जम्मू-कश्मीर में सात नए विधानसभा क्षेत्रों का सृजन हुआ था।

    24 सीटेंगुलाम जम्मू-कश्मीर के लिए आरक्षित

    मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में 114 विधानसभा सीटें हैं और इनमें से 24 गुलाम जम्मू-कश्मीर के लिए आरक्षित हैं और उन पर चुनाव नहीं होता। अन्य 90 सीटों पर चुनाव होता है और इनमें से 47 कश्मीर में और 43 जम्मू प्रांत में हैं।  पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य में 111 विधानसभा सीटें थी, जिनमें से 24 गुलाम जम्मू-कश्मीर कोटे की थी। लद्दाख की चार, 46 कश्मीर प्रांत और 37 जम्मू प्रांत में थी।

    पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य में 1957, 1966, 1975 और 1995 परिसीमन हो चुका है। अंतिम परिसीमन वर्ष 2022 में हुआ। परिसीमन के साथ ही विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव भी होता आया है।

    1947 के बाद छठी बार होने जा रहा परिसीमन

    जम्मू-कश्मीर मामलों के एडवोकेट अजात जम्वाल ने कहा कि 1951 में जम्मू-कश्मीर में गुलाम जम्मू-कश्मीर के कोटे की सीटों के अलावा 73 विधानसभा सीटें थी, जिन्हें 1957, 1966 और 1975 में हुए परिसीमन के आधार पर बढ़ाकर 76 किया गया। इसके बाद 1981 की जनगणना के आधार पर, लगभग सात वर्ष की प्रक्रिया में 1995 में परिसीमन पूरा हुआ और सात नए विधानसभा क्षेत्रों का सृजन हुआ था।

    उन्होंने बताया  2019 से पहले, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन जम्मू-कश्मीर संविधान और जम्मू-कश्मीर  जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1957 के तहत होता था जबकि संसदीय सीटों का परिसीमन भारत के संविधान के तहत होता था।