जम्मू-कश्मीर में 51 दिनों में 1000+ गिरफ्तारियां, नशे के खिलाफ जंग अब बना जन-आंदोलन, LG बोले- 'परिवार बनकर लड़ेंगे'
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 'नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर' अभियान को जन-आंदोलन बताया, जिसमें 51 दिनों में 923 FIR और 1000 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं। उन्हों ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई, 50 दिनों में रिकॉर्ड तोड़ गिरफ्तारी, पुनर्वास नीति तैयार।
HighLights
51 दिन में 923 FIR, 1000+ ड्रग तस्कर गिरफ्तार।
नशे के आदी युवा पीड़ित, अपराधी नहीं: LG सिन्हा।
हर जिले में खुलेंगे आधुनिक नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर’ अभियान को जन-आंदोलन का रूप देते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि प्रशासन इस लड़ाई में जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। उन्होंने खुद को “आपके परिवार का सदस्य” बताते हुए नशे के खिलाफ जंग में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम स्थित लारू बस स्टैंड पर जनसभा को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने बताया कि 51 दिन पहले शुरू हुआ यह अभियान अब सिर्फ सरकारी या पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, युवा, स्कूल-कॉलेज, धार्मिक नेता और नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी है।
50 दिनों की बड़ी कार्रवाई
- 923 FIR दर्ज की गईं।
- 1000 से अधिक ड्रग तस्कर गिरफ्तार किए गए।
- 56 से ज्यादा बड़े तस्कर एहतियाती तौर पर हिरासत में।
- 600+ ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित, 124 पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू।
युवा पीड़ित, अपराधी नहीं: सिन्हा
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा, “नशे के आदी युवाओं को अपराधी न समझा जाए। वे वास्तविक पीड़ित हैं और उन्हें सम्मान, संवेदना व पुनर्वास की जरूरत है।” उन्होंने ऐलान किया कि हर जिले में जल्द आधुनिक नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र खोले जाएंगे। देशभर के विशेषज्ञों से सलाह लेकर पुनर्वास नीति भी तैयार की गई है।
सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने दशकों तक आतंकवाद झेला है, अब नशा युवा पीढ़ी के लिए नया खतरा बनकर उभरा है। “हमने आतंकवाद और नशे की परछाइयों को हटाने का प्रयास किया है। आज नशे की बेड़ियां टूट रही हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में शुरू किए गए ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ के बाद 2021 से जम्मू-कश्मीर में प्रयास तेज किए गए।
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100 दिन का लक्ष्य जागरूकता
उपराज्यपाल ने माना कि जम्मू-कश्मीर 100 दिनों में पूरी तरह नशामुक्त नहीं हो सकता, लेकिन इस अभियान का मकसद समाज में जागरूकता और सामूहिक संकल्प को मजबूत करना है। “जब तक एक भी ड्रग गिरोह मौजूद है, यह अभियान पूरे जोर-शोर से जारी रहेगा,” उन्होंने दोहराया। अभियान में जिला प्रशासन, महिला समितियों, युवा क्लबों, सामाजिक-धार्मिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी सराहना की गई।
उपराज्यपाल के अनुसार तहत मादक पदार्थों से जुड़े अपराधियों के 600 से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि 124 पासपोर्ट निरस्तीकरण मामलों की भी प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने कहा, “पुलिस लगातार ड्रग तस्करों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। यह एक कठिन और सतत प्रक्रिया है।” सिन्हा ने स्वीकार किया कि नशे की समस्या को कम समय में पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता, लेकिन 100-दिवसीय अभियान का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और जनभागीदारी को मजबूत करना है।
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