अगर लद्दाख कर सकता है तो हम क्यों नहीं; महबूबा ने उमर समेत तमाम नेताओं से मतभेद भुला दिल्ली से बातचीत का मांगा साथ
महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के नेताओं से मतभेद भुलाकर एकजुट होने का आग्रह किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत् ...और पढ़ें

महबूबा मुफ्ती ने लद्दाख की मिसाल देकर कहा, जम्मू-कश्मीर के हक के लिए दिल्ली से एकजुट होकर करो बात।
HighLights
महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से एकजुट होने का आग्रह किया।
केंद्र सरकार से बातचीत शुरू करने के लिए संयुक्त पहल की अपील।
लद्दाख के सफल संवाद को उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के नेताओं से मतभेद भुलाकर एकजुट होने तथा प्रधानमंत्री नरेन्दर मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बातचीत की प्रक्रिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए संयुक्त पहल करने का आग्रह किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, जेकेपीसीसी अध्यक्ष तारिक हमीद करा सीपीआई (एम) नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन, सांसद इंजीनियर राशीद, आम आदमी पार्टी के नेता मेराज मलिक, पीडीएफ अध्यक्ष हाकिम मोहम्मद यासीन, पैंथर्स पार्टी अध्यक्ष हर्ष देव सिंह, शिवसेना (जम्मू-कश्मीर) अध्यक्ष मनीष साहनी, कश्मीरी हिंदू नेता नेता संजय टिक्कू तथा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष जसपाल सिंह को पत्र भेजे हैं।
अब और देरी की गुंजाइश नहीं
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को लिखे पत्र में महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उन्होंने उनसे मिलने का समय मांगा था, लेकिन व्यस्तता के कारण मुलाकात संभव नहीं हो सकी। इसलिए उन्होंने पत्र के माध्यम से यह महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि समय तेजी से निकल रहा है और अब और देरी की गुंजाइश नहीं है।
मुफ्ती ने अपने पत्र में लद्दाख एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस द्वारा केंद्र सरकार के साथ संवाद के माध्यम से हासिल की गई प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस बात का महत्वपूर्ण उदाहरण है कि सार्थक परिणाम केवल बातचीत और संवाद से ही प्राप्त किए जा सकते हैं।
खबरें और भी
उन्होंने लिखा कि जम्मू-कश्मीर एक बार फिर अपने इतिहास के ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां निराशा और मोहभंग की भावना व्यापक रूप से लोगों को प्रभावित कर रही है। ऐसे में क्षेत्र को वर्तमान गतिरोध से बाहर निकालने के लिए राजनीतिक दलों की सीमाओं से ऊपर उठकर व्यापक सहमति बनाना आवश्यक है।
केंद्र के साथ रचनात्मक संवाद जरूरी
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यदि लोगों की गरिमा और सुरक्षा को बहाल करना है तो भारत सरकार के साथ रचनात्मक संवाद अत्यंत जरूरी है। उन्होंने सभी दलों से एकजुट होकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से आग्रह करने की अपील की कि वे जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ निरंतर संवाद प्रक्रिया शुरू करें।
पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों और वैचारिक असहमतियों को फिलहाल पीछे रखकर सामूहिक हित और जनकल्याण के लिए एकजुट होना चाहिए। यह राजनीतिक श्रेय लेने या एक-दूसरे पर बढ़त हासिल करने का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि उन लोगों के व्यापक हित में एकता का अवसर बनना चाहिए जिनका प्रतिनिधित्व सभी दल करने का दावा करते हैं।
महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से आग्रह किया कि वे राज्य के प्रमुख होने के नाते सभी राजनीतिक दलों की एक आधिकारिक बैठक बुलाने की पहल करें। उनके अनुसार, इससे केंद्र सरकार के साथ औपचारिक संवाद प्रक्रिया शुरू करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
लद्दाख कर सकता है तो हम क्यों नहीं?
उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 के बाद की परिस्थितियों में क्षेत्रीय दलों के बीच मतभेद और टकराव जम्मू-कश्मीर के सामूहिक हितों के लिए नुकसानदेह साबित हुए हैं। इसलिए व्यापक सहमति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने कहा, “यदि लद्दाख ऐसा कर सकता है, तो हम भी कर सकते हैं।”
मुफ्ती ने यह भी कहा कि इस राजनीतिक मंच की सफलता के लिए मुख्यमंत्री का समर्थन आवश्यक है। उनका मानना है कि वर्तमान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में वास्तविक एकता लोगों के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान की बहाली का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
पत्र के अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध करते हुए कहा कि अब और देरी करना उचित नहीं होगा। साथ ही उन्होंने उन दलों की सूची भी संलग्न की है, जिनसे उन्होंने संपर्क किया है, और सुझाव दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर अन्य दलों को भी इस पहल में शामिल किया जा सकता है।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।