मोहाली में VR Punjab मॉल बंद पर उठे सवाल; भूकंप से बिल्डिंग असुरक्षित या वजह कुछ और? रोजगार पर संकट
मोहाली के वीआर पंजाब मॉल को भूकंप से नुकसान का हवाला देकर बंद करने पर विवाद खड़ा हो गया है। आउटलेट संचालकों ने इसे बहाना बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया ...और पढ़ें

कभी ट्राईसिटी का सबसे बड़ा मॉल माना जाता था मोहाली का वीआर पंजाब मॉल।
जागरण संवाददाता, मोहाली। कभी ट्राईसिटी का सबसे बड़ा मॉल रहे मोहाली स्थित वीआर पंजाब मॉल को बंद करने पर हजार तरह के सवाल उठ रहे हैं। मल्टीलेवल कंपनियों के आउटलेट्स बंद होने के डर से हजारों कर्मचारियों को बेरोजगार होने की चिंता सताने लगी है।
मॉल प्रबंधकों ने भूकंप से बिल्डिंग को खतरा होने का तर्क देकर मॉल को बंद कर दिया है, जबकि विशेषज्ञों का दावा है कि 3.5 से 4.0 तीव्रता के भूकंप से आमतौर पर किसी मजबूत और आधुनिक इमारत को गंभीर संरचनात्मक नुकसान नहीं होता।
इसी आधार पर वीआर पंजाब माॅल को बंद करने के फैसले ने अब विवाद का रूप ले लिया है। माॅल प्रबंधन के इस निर्णय के खिलाफ भीतर संचालित विभिन्न कंपनियों के आउटलेट संचालकों ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है और वे असली वजह जानना चाह रहे हैं।
स्तव में इमारत असुरक्षित होती तुंरत कार्रवाई होती
प्रबंधन ने 20 अप्रैल से माॅल बंद करने का निर्णय लेते हुए 3 अप्रैल को आए भूकंप के कारण भवन की संरचना को नुकसान होने का हवाला दिया है। आउटलेट संचालकों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि वास्तव में इमारत असुरक्षित होती, तो तुरंत कार्रवाई की जाती, न कि 15 दिन बाद अचानक नोटिस जारी कर माल बंद करने का आदेश दिया जाता।
आउटलेट संचालकों के अनुसार, 18 अप्रैल को नोटिस जारी कर 20 अप्रैल से माल बंद करने का फैसला न केवल जल्दबाजी में लिया गया, बल्कि इससे व्यापारियों को किसी भी तरह की तैयारी का समय भी नहीं मिला। उनका आरोप है कि इस निर्णय से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
दिनभर बैठकें, नतीजा जीरो
सोमवार को पूरे दिन माल के भीतर आउटलेट संचालकों और प्रबंधन के बीच बैठकों और बातचीत का दौर चलता रहा, लेकिन देर शाम तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। कई कंपनियों ने माल प्रबंधन से मुआवजे की मांग भी की है, जबकि कुछ ने अपने कानूनी सलाहकारों के जरिए मामले को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है।
24 घंटे के भीतर आउटलेट खाली करने का निर्णय पूरी तरह गलत है। इतने कम समय में किसी भी व्यवसाय को समेटना संभव नहीं होता। हमारी कंपनी ने यहां आउटलेट स्थापित करने में लाखों रुपये का निवेश किया है इंटीरियर, मशीनरी, स्टाक और स्टाफ पर भारी खर्च किया गया है। इसके बावजूद प्रबंधन ने मुआवजे (कंपनसेशन) के संबंध में कोई जानकारी या आश्वासन नहीं दिया है, जो बेहद निराशाजनक है।
-सुनील, रीजनल मैनेजर, कैफे काफी डे
हमारे आउटलेट पर बिक्री अच्छी चल रही थी। ऐसे में अचानक लिया गया यह फैसला बिल्कुल गलत है। माल प्रबंधन को कम से कम 15 दिन का अल्टीमेटम देना चाहिए था, ताकि हम अपनी व्यवस्था संभाल पाते। फिलहाल कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी इस मुद्दे को लेकर मॉल प्रबंधन से बातचीत कर रहे हैं।
-अजय कुमार, स्टोर इंचार्ज, कोस्टा काफी
अचानक लिए गए इस निर्णय से हमारी नौकरी पर भी संकट आ गया है। कंपनी तो माल प्रबंधन से अपनी व्यवस्था कर ही लेगी, लेकिन हमारे लिए स्थिति काफी मुश्किल हो गई है। अब हमें यह भी नहीं पता कि कंपनी हमें कहां ट्रांसफर कर देगी। हम यहां मुश्किल से खुद को ठीक से स्थापित कर पाए थे।
-राजन, स्टोर इंचार्ज, लीवाइस
हमें अपनी नौकरी की चिंता सता रही है। कंपनी हमें आगे रखेगी या नहीं, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है। माल प्रबंधन द्वारा लिया गया यह फैसला पूरी तरह एकतरफा है, जिसमें कर्मचारियों और दुकानदारों के हितों के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा गया।
-अजय, स्टोर स्टाफ, लीवाइस
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