हाई कोर्ट के CBI जांच के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट जाएगी पंजाब सरकार, कैश फॉर ट्रांसफर के आरोपों से गरमाई सियासत
तबादलों, टेंडर और नीतियों में कथित भ्रष्टाचार के मामले में हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। पंजाब सरकार अब आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

कैबिनेट मिनिस्टर हरपाल चीमा।
HighLights
पंजाब सरकार हाई कोर्ट के सीबीआई जांच आदेश को चुनौती देगी।
अधिकारियों के तबादलों में कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
2020 में सीबीआई को दी सामान्य सहमति वापस ली गई थी।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब में अधिकारियों के तबादलों और तैनाती से लेकर टेंडर, लाइसेंस व अन्य सरकारी मंजूरियां दिलाने के नाम पर कथित लेन-देन के आरोपों ने सियासी माहौल गरमा दिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने के फैसले के बाद अब पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्पष्ट किया कि सरकार हाई कोर्ट के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती देगी। सरकार का यह फैसला हाई कोर्ट की खंडपीठ द्वारा सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज कर तत्काल जांच शुरू करने के निर्देश दिए जाने के कुछ घंटे बाद आया। हाई कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच में निष्पक्षता और पारदर्शिता की जरूरत बताई है।
ध्यान रहे की मुख्य न्यायाधीश अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने शनिवार सुबह खुले न्यायालय में फैसला सुनाया। अदालत ने सीबीआई को मामले में प्राथमिकी दर्ज कर तुरंत जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। साथ ही जांच की प्रगति और उसके परिणाम से संबंधित रिपोर्ट दो महीने के भीतर अदालत में पेश करने को कहा है।
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दायर याचिका की सुनवाई कर रही हाई कोर्ट
यह मामला अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार में संलिप्तता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसमें दावा किया गया कि अधिकारियों के तबादलों और तैनाती के अलावा विभिन्न विभागों में महत्वपूर्ण पद हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत का नेटवर्क काम कर रहा था।
याचिका में भारतीय प्रशासनिक सेवा और पुलिस अधिकारियों के तबादलों व तैनाती को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा निर्माण कारोबार से जुड़े लोगों, भूमि विकासकर्ताओं और अन्य कारोबारियों को टेंडर, अनुमति और लाइसेंस दिलाने के बदले कथित अवैध भुगतान लिए जाने का आरोप लगाया गया है।
झूठे मामलों में फंसाने के नाम पर वसूली का भी आरोप
याचिका में कथित वसूली तंत्र का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि लोगों को झूठे मामलों में फंसाने का डर दिखाकर भी कथित तौर पर पैसे की मांग की जाती थी। हाई कोर्ट ने इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच राज्य की एजेंसियों के बजाय सीबीआई से कराने का निर्देश दिया है।
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2020 में सामान्य सहमति वापस लेने का दिया हवाला
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले के पीछे वर्ष 2020 में लिया गया निर्णय भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि नवंबर 2020 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पंजाब में सीबीआई को जांच के लिए दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी। चीमा ने इसी आधार पर कहा कि मौजूदा सरकार हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। अब इस मामले में शीर्ष अदालत के रुख पर सबकी नजर रहेगी।
