राजस्थान में प्रसूताओं की मौत पर NHRC सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों का स्वतः संज्ञान लिया है। ...और पढ़ें

NHRC ने प्रसूताओं की मौत पर लिया स्वतः संज्ञान
HighLights
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रसूताओं की मौत पर स्वतः संज्ञान लिया।
राजस्थान सरकार से दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई।
भीलवाड़ा, बांसवाड़ा सहित कई जिलों में हुई हैं प्रसूताओं की मौतें।
जागरण संवाददाता, जयपुर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत के मामलों का स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है।
आयोग ने दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि राजस्थान में प्रसूताओं की मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामला बांसवाड़ा जिले का है जहां एक और प्रसूता की मौत हो गई।
NHRC ने प्रसूताओं की मौत पर लिया स्वतः संज्ञान
राज्य के सरकारी अस्पतालों में पिछले तीन महीने में प्रसव के बाद अब तक 23 प्रसूताओं की मौत किडनी खराब होने से हो चुकी है। इनमें जुलाई माह में पांच तारीख से लेकर अब तक बांसवाड़ा और भीलवाड़ा जिलों 11 प्रसूताओं की मौत हुई है।
इनमें बांसवाड़ा में छह और भीलवाड़ा में पांच की मौत हुई थी। मई के दूसरे सप्ताह से लेकर जून के अंत तक कोटा में पांच, बीकानेर में चार और जोधपुर में दो प्रसूताओं की मौत हो चुकी है।
आयोग ने कहा कि यदि रिपोर्ट सही हैं तो यह सुरक्षित मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर चूक और मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है। आयोग ने जांच की प्रगति और भविष्य की रोकथाम के उपायों की जानकारी भी मांगी है। वहीं, मौतों के कारणों की जांच के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित अलग-अलग कमेटियों की जांच अभी जारी है।
बांसवाड़ा जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार रात 12 बजे 23 वर्षीय सरला का प्रसव हुआ। प्रसव के कुछ घंटों बाद ही प्रसूता का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ने लगा और उच्च रक्तचाप की भी शिकायत हुई।
प्रसूता के स्वजन ने बताया कि स्वास्थ्य बिगड़ने पर ड्यृटी पर तैनात नर्सिंगकर्मियों को बुलाया गया, लेकिन वे सोते रहे। बार-बार प्रयास करने के बावजूद नर्सिंगकर्मियों ने सुबह देखने के लिए कहा।
प्रसूता पूरी रात दर्द से तड़पती रही। शुक्रवार सुबह करीब छह बजे स्वजन एंबुलेंस से प्रसूता को बांसवाड़ा जिला मुख्यालय स्थित सरकारी अस्पताल में लेकर जा रहे थे। इसी दौरान उसकी मौत हो गई।
जोधपुर में गलत खून चढ़ाया
जोधपुर के सरकारी अस्पताल में गुरुवार रात एक प्रसूता को गलत खून चढ़ा दिया गया, जिससे उसका पेशाब बंद हो गया और किडनी में संक्रमण हो गया।
प्रसूता धापू को सामान्य प्रसव के बाद एनीमिया एवं अन्य कारणों से उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया था। उपचार के दौरान उसे बी पाजिटिव का खून चढ़ा दिया गया, जबकि उसका ब्लड ग्रुप ए पाजिटिव था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि अस्पताल में धापू नाम की एक अन्य महिला पहले से में भर्ती थी, जिसका ब्लड ग्रुप बी पाजिटिव था।
देर रात फोन से नाराज हुए चिकित्सा मंत्री
राज्य के सरकारी अस्पतालों में लगातार हो रही प्रसूताओं की मौतों को लेकर सरकार में हड़कंप मचा हुआ है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर चार जिलों के अस्पतालों का दौर कर चुके हैं। वहीं प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ भी तीन जिलों का दौर कर चुकी है।
सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौतों के बीच गजेंद्र सिंह खींवसर का एक आडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। फलौदी के युवक ने बुधवार रात 12:15 बजे खींवसर को फोन से गांवों के अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था गड़बड़ होने की बात कही। देर रात फोन करने पर चिकित्सा मंत्री नाराज हो गए।